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नींद के आगोश में था पिता और कमरे में धू—धू कर जिंंदा जल गई बेटी
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Mon, 03 Apr 2017 12:11 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
जयपुर के श्याम नगर इलाके में रविवार को कमरे में एक पिता नींद के आगोश में था, वहीं पहली मंजिल पर कमरे में उनकी बेटी ने खुद पर केरोसिन छिड़ककर आत्मदाह कर लिया। वह धू—धू कर जलती रही। आखिरकार वहीं दम तोड़ दिया।
उधर, एक किराएदार ने मकान का दरवाजा खटखटाया तब बुजुर्ग पिता की आंख खुली वह बेटी को बुलाने कमरे में गए तब तक आत्मदाह से बेटी मौत की नींद सो चुकी थी। बरबस बेटी की जली हुई लाश को देखकर पिता चीख उठा। तब आस—पड़ौस के लोग दौड़कर मौके पर पहुंचे। सूचना मिलने पर श्याम नगर थाना पुलिस मौके पर भी आ गई और फिर शव को एसएमएस अस्पताल की मोर्चरी में पहुंचाया। आत्मदाह के कारणों का पता नहीं चला है।
सबइंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद ने बताया कि आत्मदाह करने वाली रुकमा प्रजापत करीब 36 साल की थी। उसका महज पांच साल की उम्र में ही बालविवाह हो गया था और करीब 15 साल पहले रुकमा का पति से तलाक हो गया। तब से वह श्याम नगर इलाके में डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद नगर में पिता बस्ती राम प्रजापत के पास ही रह रही थी।
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रविवार को रुकमा और उनके पिता बस्तीराम ही घर पर थे। अन्य परिजन किसी समारोह में हिस्सा लेने जैतारण स्थित अपने गांव गए हुए थे। सुबह करीब 10 बजे रुकमा पहली मंजिल पर कमरे में चली गई। वहीं बुजुर्ग पिता बस्तीराम नीचे कमरे में सो गए। कमरे में रुकमा ने आत्मदाह कर लिया।
उनके पिता बस्ती राम मुताबिक दोपहर करीब साढ़े 12 बजे उनके किराएदार ने मकान का मुख्य दरवाजा खटखटाया तब उनकी नींद खुली। फिर वह बेटी को आवाज लगाते हुए कमरे में गए। जहां आग की लपटें उठती रही थी। जहां उनकी बेटी धू धूकर जिंदा जल रही थी। उसे अस्पताल पहुंचाया। जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। बस्तीराम ने बताया कि उनकी बेटी के कोई बीमारी चल रही थी। करीब दो माह से उसका उपचार चल रहा था। इससे वह अवसाद में थी।
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उधर, एक किराएदार ने मकान का दरवाजा खटखटाया तब बुजुर्ग पिता की आंख खुली वह बेटी को बुलाने कमरे में गए तब तक आत्मदाह से बेटी मौत की नींद सो चुकी थी। बरबस बेटी की जली हुई लाश को देखकर पिता चीख उठा। तब आस—पड़ौस के लोग दौड़कर मौके पर पहुंचे। सूचना मिलने पर श्याम नगर थाना पुलिस मौके पर भी आ गई और फिर शव को एसएमएस अस्पताल की मोर्चरी में पहुंचाया। आत्मदाह के कारणों का पता नहीं चला है।
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सबइंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद ने बताया कि आत्मदाह करने वाली रुकमा प्रजापत करीब 36 साल की थी। उसका महज पांच साल की उम्र में ही बालविवाह हो गया था और करीब 15 साल पहले रुकमा का पति से तलाक हो गया। तब से वह श्याम नगर इलाके में डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद नगर में पिता बस्ती राम प्रजापत के पास ही रह रही थी।
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रविवार को रुकमा और उनके पिता बस्तीराम ही घर पर थे। अन्य परिजन किसी समारोह में हिस्सा लेने जैतारण स्थित अपने गांव गए हुए थे। सुबह करीब 10 बजे रुकमा पहली मंजिल पर कमरे में चली गई। वहीं बुजुर्ग पिता बस्तीराम नीचे कमरे में सो गए। कमरे में रुकमा ने आत्मदाह कर लिया।
उनके पिता बस्ती राम मुताबिक दोपहर करीब साढ़े 12 बजे उनके किराएदार ने मकान का मुख्य दरवाजा खटखटाया तब उनकी नींद खुली। फिर वह बेटी को आवाज लगाते हुए कमरे में गए। जहां आग की लपटें उठती रही थी। जहां उनकी बेटी धू धूकर जिंदा जल रही थी। उसे अस्पताल पहुंचाया। जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। बस्तीराम ने बताया कि उनकी बेटी के कोई बीमारी चल रही थी। करीब दो माह से उसका उपचार चल रहा था। इससे वह अवसाद में थी।