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थानेदार बनकर दस्तावेज खंगालने एसओजी ऑफिस पहुंचा युवक गिरफ्तार
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Fri, 07 Jul 2017 09:20 PM IST
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गिरफ्तार आरोपी अशोक कुमार
- फोटो : Amar Ujala
चिट-फंड ठगी केस की फाइलों को खंगालने के इरादे से एक युवक फर्जी सब इंस्पेक्टर बनकर एसओजी थाने पर पहुंच गया और गेट पर सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों पर अपना रौब झाड़ने लगा। संदेह होने पर एसओजी के पुलिसकर्मियों ने उसे पकड़कर पूछताछ की तो युवक फर्जी थानेदार निकला। तब उसे आदर्श नगर थाना पुलिस को सौंप दिया। उसे शुक्रवार को कोर्ट में पेशकर एक दिन के रिमांड पर लिया।
थानाप्रभारी ब्रजभूषण अग्रवाल ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी विद्याधर नगर, जयपुर निवासी अशोक कुमार है। गुरुवार दोपहर को घाटगेट स्थित एसओजी कार्यालय में पहुंचा। वहां गेट पर तैनात कांस्टेबल कमलेश को रौब झाड़ते हुए कहा कि वह विद्याधरनगर थाने में तैनात सबइंस्पेक्टर है। इसके बाद कांस्टेबल कमलेश को बताया कि वह जांच पड़ताल के लिए चिटफंड कंपनियों की फाइलों को देखने के लिए आया है।
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थानाप्रभारी ब्रजभूषण अग्रवाल ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी विद्याधर नगर, जयपुर निवासी अशोक कुमार है। गुरुवार दोपहर को घाटगेट स्थित एसओजी कार्यालय में पहुंचा। वहां गेट पर तैनात कांस्टेबल कमलेश को रौब झाड़ते हुए कहा कि वह विद्याधरनगर थाने में तैनात सबइंस्पेक्टर है। इसके बाद कांस्टेबल कमलेश को बताया कि वह जांच पड़ताल के लिए चिटफंड कंपनियों की फाइलों को देखने के लिए आया है।
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ठगी की फाइलें देखने के लिए फर्जी पुलिसकर्मी बनना बताया
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- फोटो : Demo pic
सुरक्षा में तैनात कांस्टेबल कमलेश को को शक हुआ तो उसने आरोपी अशोक से पुलिस का आईडी कार्ड दिखाने को कहा। तब अशोक कुमार ने सीआईडी सीबी पुलिस का कार्ड दिखाया। जिसमें उसका नाम लिखा था। तब कांस्टेबल ने इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को दी।
एसओजी के अधिकारियों ने क्राइम ब्रांच से जानकारी जुटाई तो पता चला कि अशोक नाम का सब इंस्पेक्टर है ही नहीं, तब एसओजी ने फर्जी थानेदार अशोक को अादर्शनगर थाने के हवाले कर दिया। तब उसने चिटफंड ठगी की फाइलें देखने के लिए फर्जी पुलिसकर्मी बनना बताया। इस संबंध में एसओजी के कांस्टेबल कमलेश ने रिपोर्ट दर्ज कराई है।
एसओजी के अधिकारियों ने क्राइम ब्रांच से जानकारी जुटाई तो पता चला कि अशोक नाम का सब इंस्पेक्टर है ही नहीं, तब एसओजी ने फर्जी थानेदार अशोक को अादर्शनगर थाने के हवाले कर दिया। तब उसने चिटफंड ठगी की फाइलें देखने के लिए फर्जी पुलिसकर्मी बनना बताया। इस संबंध में एसओजी के कांस्टेबल कमलेश ने रिपोर्ट दर्ज कराई है।