{"_id":"59e21e804f1c1b98678b5ade","slug":"court-sentence-one-year-punishment-in-case-of-black-marketing-of-clothes","type":"story","status":"publish","title_hn":"राशन के कपड़े की कालाबाजारी के 30 साल पुराने मामले में एक साल की सजा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राशन के कपड़े की कालाबाजारी के 30 साल पुराने मामले में एक साल की सजा
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sat, 14 Oct 2017 08:07 PM IST
विज्ञापन
कोर्ट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राशन के कपड़े की कालाबाजारी के करीब 30 साल पुराने मामले में अदालत ने आरोपी को एक साल के कारावास की सजा सुनाई है।
जयपुर जिले के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने गरीबों के लिए आवंटित किए जाने वाले कपडे को फर्जी दस्तावेजों से हासिल कर उनकी कालाबाजारी करने वाले व्यवसायी पवनकुमार अग्रवाल को एक साल की सजा सुनाई है। सजा के साथ ही अदालत ने अभियुक्त पर बीस हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है।
मामले के अनुसार तत्कालीन खाद्य उपायुक्त जेपी विमल ने 30 दिसंबर 1988 को सीबीआई में रिपोर्ट दर्ज कराई दी। जिसमें कहा गया कि अभियुक्त ने राशन से मिलने वाले कपड़े की 208 गांठों की एनओसी मिल से लेकर उसकी कालाबाजारी कर दी। इस माल की कीमत करीब सवा सात लाख रुपए थी। रिपोर्ट पर कार्रवाई करते हुए सीबीआई ने अदालत में आरोप पत्र पेश किया।
विज्ञापन
जयपुर जिले के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने गरीबों के लिए आवंटित किए जाने वाले कपडे को फर्जी दस्तावेजों से हासिल कर उनकी कालाबाजारी करने वाले व्यवसायी पवनकुमार अग्रवाल को एक साल की सजा सुनाई है। सजा के साथ ही अदालत ने अभियुक्त पर बीस हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है।
मामले के अनुसार तत्कालीन खाद्य उपायुक्त जेपी विमल ने 30 दिसंबर 1988 को सीबीआई में रिपोर्ट दर्ज कराई दी। जिसमें कहा गया कि अभियुक्त ने राशन से मिलने वाले कपड़े की 208 गांठों की एनओसी मिल से लेकर उसकी कालाबाजारी कर दी। इस माल की कीमत करीब सवा सात लाख रुपए थी। रिपोर्ट पर कार्रवाई करते हुए सीबीआई ने अदालत में आरोप पत्र पेश किया।
विज्ञापन