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सरकारी जमीन पर होटल, हाईकोर्ट ने पूर्व केंद्रीय मंत्री सहित अन्य से मांगा जवाब
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Mon, 27 Nov 2017 08:14 PM IST
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- फोटो : amar ujala
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राजस्थान हाईकोर्ट ने अलवर के कुशालगढ़ में सीलिंग एक्ट में जब्त भूमि पर अवैध रूप से होटल चलाने पर पूर्व केन्द्रीय मंत्री भंवर जितेन्द्रसिंह, उनकी पत्नी अम्बिका सिंह, मुख्य सचिव, प्रमुख पर्यटन सचिव और जेवीवीएनएल के एमडी सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नान्द्रजोग और न्यायाधीश डीसी सोमानी की खंडपीठ ने यह आदेश अशोक पाठक की ओर से दायर जनहित याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए।
याचिका में कहा गया कि कुशालगढ़ में पूर्व महाराजा स्व. तेजसिंह की आठ बीघा भूमि सीलिंग एक्ट के तहत वर्ष 2005 में जब्त होने के बाद भी अलवर के पूर्व राजपरिवार के सदस्य और पूर्व केन्द्रीय मंत्री जितेन्द्रसिंह ने भूमि का कब्जा नहीं छोड़ा।
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मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नान्द्रजोग और न्यायाधीश डीसी सोमानी की खंडपीठ ने यह आदेश अशोक पाठक की ओर से दायर जनहित याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए।
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याचिका में कहा गया कि कुशालगढ़ में पूर्व महाराजा स्व. तेजसिंह की आठ बीघा भूमि सीलिंग एक्ट के तहत वर्ष 2005 में जब्त होने के बाद भी अलवर के पूर्व राजपरिवार के सदस्य और पूर्व केन्द्रीय मंत्री जितेन्द्रसिंह ने भूमि का कब्जा नहीं छोड़ा।
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सरकारी भूमि पर बनी होटल में शराब परोसी जाती है !
court demo pic
इसके बाद वर्ष 2011 में होटल खोलकर जितेन्द्रसिंह की पत्नी ने एक अन्य को लीज पर दे दिया। याचिका में यह भी कहा गया कि 18 मई 2012 को बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन करने पर जेवीवीएनएल ने 16 लाख 57 हजार 836 रुपए की डिमांड जारी की।
वहीं भंवर जितेन्द्रसिंह के प्रभाव में आकर 20 सितंबर 2012 को बिजली कंपनी ने री-कनेक्शन के नाम पर डिमांड राशि घटाकर 2 लाख 89 हजार 768 कर दी। याचिका में यह भी कहा गया कि आबकारी विभाग से शराब लाईसेंस लिए बिना सरकारी भूमि पर बनी होटल में शराब परोसी जाती है।
जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने यह संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
वहीं भंवर जितेन्द्रसिंह के प्रभाव में आकर 20 सितंबर 2012 को बिजली कंपनी ने री-कनेक्शन के नाम पर डिमांड राशि घटाकर 2 लाख 89 हजार 768 कर दी। याचिका में यह भी कहा गया कि आबकारी विभाग से शराब लाईसेंस लिए बिना सरकारी भूमि पर बनी होटल में शराब परोसी जाती है।
जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने यह संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।