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प्रेमी के साथ मिलकर पत्नी ने की थी प्रॉपर्टी डीलर पति की हत्या, कोर्ट ने जमानत पर छोड़ा
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sat, 11 Nov 2017 04:14 PM IST
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राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रेमी के साथ मिलकर पति की हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे दो प्रेमी जोड़ों की सजा को स्थगित कर दिया है।
जानकारी के अनुसार आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे हत्या के आरोपी रामवीर गुर्जर और उसकी प्रेमिका कुसुमा की आजीवन कारावास की सजा को अपील के लंबित रहने तक स्थगित कर दिया है। इसके साथ ही अदालत ने दोनों अभियुक्तों को जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं। न्यायाधीश मोहम्मद रफीक और न्यायाधीश केसी शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश दोनों अभियुक्तों की अपील पर सुनवाई करते हुए दिए।
मामले के अनुसार अक्टूबर 2015 में भरतपुर की बजरंग कॉलोनी में प्रॉपर्टी डीलर सतीश जाट कि उसकी पत्नी कुसुमा ने अपने प्रेमी रामवीर गुर्जर के साथ मिल कर हत्या कर दी थी। प्रकरण में डीजे भरतपुर ने दोनों अभियुक्तों को जून 2017 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इस आदेश को अभियुक्तों की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दी गई।
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जानकारी के अनुसार आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे हत्या के आरोपी रामवीर गुर्जर और उसकी प्रेमिका कुसुमा की आजीवन कारावास की सजा को अपील के लंबित रहने तक स्थगित कर दिया है। इसके साथ ही अदालत ने दोनों अभियुक्तों को जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं। न्यायाधीश मोहम्मद रफीक और न्यायाधीश केसी शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश दोनों अभियुक्तों की अपील पर सुनवाई करते हुए दिए।
मामले के अनुसार अक्टूबर 2015 में भरतपुर की बजरंग कॉलोनी में प्रॉपर्टी डीलर सतीश जाट कि उसकी पत्नी कुसुमा ने अपने प्रेमी रामवीर गुर्जर के साथ मिल कर हत्या कर दी थी। प्रकरण में डीजे भरतपुर ने दोनों अभियुक्तों को जून 2017 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इस आदेश को अभियुक्तों की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दी गई।
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साबित नहीं हो पाए दोनों के बीच अवैध संबध
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- फोटो : Internet
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से सजा स्थगित करने का प्रार्थना पत्र पेश कर कहा गया कि अनुसंधान में ऐसी कोई साक्ष्य नहीं मिली, जो दोनों अभियुक्तों के बीच अवैध संबंध साबित करते हो और ना ही कोई ऐसा गवाह मिला है जो दोनों अभियुक्तों को हत्या में शामिल होने की पुष्टि करता हो। ऐसे में अपील के निस्तारण तक याचिकाकर्ताओं को जमानत पर रिहा किया जाए।