{"_id":"59fdd6964f1c1b86698b9707","slug":"challenge-of-the-appointment-of-parliamentary-secretaries-in-rajasthan","type":"story","status":"publish","title_hn":"राजस्थान में संसदीय सचिवों की नियुक्ति को चुनौती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राजस्थान में संसदीय सचिवों की नियुक्ति को चुनौती
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sat, 04 Nov 2017 08:33 PM IST
विज्ञापन
राजस्थान में राज्य सरकार की ओर से नियुक्त किए गए दस संसदीय सचिवों को पद से हटाने की गुहार करते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। खंडपीठ जनहित याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई करेगी।
अधिवक्ता दीपेश ओसवाल की ओर से पेश याचिका में मुख्य सचिव और केबीनेट सचिव को पक्षकार बनाया गया। पीआईएल में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट गत जुलाई माह में असम राज्य के मामले में निर्णय कर चुका है कि संवैधानिक प्रावधानों के तहत संसदीय सचिव का कोई पद ही नहीं है। ऐसे में राज्य सरकार को ऐसे किसी पद को सृजित करने का संवैधानिक अधिकार नहीं है। इसके चलते राज्य में नियुक्त दस संसदीय सचिवों को नियुक्त करने की अधिसूचना रद्द कर उन्हें पद से हटाया जाए।
गौरतलब है कि राज्य सरकार के मंत्रीमंडल सचिवालय ने दो अलग-अलग अधिसूचना जारी कर कुल दस विधायकों को संसदीय सचिव नियुक्त किया था।
विज्ञापन
अधिवक्ता दीपेश ओसवाल की ओर से पेश याचिका में मुख्य सचिव और केबीनेट सचिव को पक्षकार बनाया गया। पीआईएल में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट गत जुलाई माह में असम राज्य के मामले में निर्णय कर चुका है कि संवैधानिक प्रावधानों के तहत संसदीय सचिव का कोई पद ही नहीं है। ऐसे में राज्य सरकार को ऐसे किसी पद को सृजित करने का संवैधानिक अधिकार नहीं है। इसके चलते राज्य में नियुक्त दस संसदीय सचिवों को नियुक्त करने की अधिसूचना रद्द कर उन्हें पद से हटाया जाए।
विज्ञापन
गौरतलब है कि राज्य सरकार के मंत्रीमंडल सचिवालय ने दो अलग-अलग अधिसूचना जारी कर कुल दस विधायकों को संसदीय सचिव नियुक्त किया था।