Rajasthan: भंवरलाल शर्मा पर लगा था गहलोत सरकार गिराने की साजिश रचने का आरोप,राहुल गांधी पर की विवादित टिप्पणी
राजस्थान में सात बार विधायक रहे भंवरलाल शर्मा का रविवार को निधन हो गया। 17 साल की उम्र में उन्होंने राजनीति में कदम रखा। सात बार विधायक बनने के बावजूद भी उन्हें गहलोत सरकार में जगह नहीं मिली। यही वजह रहा कि उन्होंने अशोक गहलोत के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया था।
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक भंवरलाल शर्मा का रविवार को निधन हो गया। भंवर लाल शर्मा का राजनीतिक जीवन विवादों से घिरा रहा। वे सात बार विधायक रहे लेकिन एक बार भी गहलोत सरकार में उन्हें मंत्री पद नहीं मिला। सचिन पायलट गुट के नेता माने जाने वाले शर्मा सीएम गहलोत के खिलाफ बगावत का झंडा उठाए रहे। राजस्थान सियासी संकट के बीच भी इनका नाम राजस्थान ऑडियो कांड में आया था।
अपने 30 साल के राजनीतिक सफर के दौरान भंवरलाल शर्मा कांग्रेस सरकार के लिए सिरदर्द बने रहे। साल 2020 में सचिन पायलट के साथ बगावत करने के कारण उन्हें निलंबित होना पड़ा। कभी सिरदर्द तो कभी प्रदेश की सरकारों के लिए उन्होंने संकटमोचक की भी भूमिका निभाई।
भैरोंसिंह शेखावत सरकार के संकटमोचक बने थे शर्मा
साल 1990 में जब राजस्थान में भैरोंसिंह शेखावत के नेतृत्व में भाजपा और जनता दल की संयुक्त मोर्चा की सरकार बनीं, तब आडवाणी की रथ यात्रा के विरोध में जनता दल के सात कैबिनेट मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया था। जिससे सरकार अल्पमत में आ गई थी। इस सियासी संकट से उबरने के लिए 5 नवंबर 1990 को दिग्विजय सिंह की अगुवाई में जनता दल से 22 विधायक अलग होकर जनता दल- दिग्विजय का गठन किया और भाजपा सरकार को समर्थन दिया। तब जाकर भैरोसिंह शेखावत सरकार बच पाई। भैरों सिंह शेखावत की सरकार बचाने में भंवरलाल की अहम भूमिका रही थी।
सरपंच से सात बार विधायक का तय किया सफर
17 अप्रैल 1945 को भंवरलाल शर्मा का चूरू जिले के सरदारशहर में जन्म हुआ था। उनके पिता का नाम सेवगराम और माता का नाम पार्वती देवी था। भंवरलाल शर्मा ने 17 साल की उम्र में ही राजनीति में कदम रख दिया था। वे साल 1962 में सरदारशहर की जैतसीसर ग्राम पंचायत के सरपंच बने। इसके बाद वे साल 1962 से 1982 तक सरपंच रहे। इसके बाद 1982 में वे सरदारशहर पंचायत समिति के प्रधान चुने गए।
1985 में लड़ा था पहला विधानसभा चुनाव
भंवरलाल शर्मा ने 1985 में विधानसभा का चुनाव लड़ा। वे लोकदल से पहला राजस्थान विधानसभा चुनाव जीतकर विधायक बने। विधायक बनने के बाद शर्मा ने जनता दल पार्टी ज्वाइन की। 1990 में दूसरी बार विधायक बनने में सफल रहे। दूसरी बार विधायक बनने पर भंवरलाल शर्मा को राजस्थान में इंदिरा गांधी नहर परियोजना मंत्री बनाया गया। फिर भंवरलाल शर्मा ने 1996 में राजस्थान विधानसभा उपचुनाव में भी जीत दर्ज की। उसके बाद वे लगातार साल 1998, 2003, 2013 और 2018 के चुनाव में कांग्रेस की टिकट पर विधायक बने।
भाजपा लहर में भी की जीत दर्ज
2013 में भाजपा की लहर की बावजूद भंवरलाल शर्मा ने जीत दर्ज की। सात बार रहे विधायक को फिर भी गहलोत सरकार में जगह नहीं मिली। इसी वजह से शर्मा बागी बन गए। उनपर भाजपा के साथ मिलकर गहलोत सरकार गिराने की साजिश रचने का आरोप लगा। जिसके बाद कांग्रेस ने कार्रवाई करते हुए उनकी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता खत्म कर दी थी।
राहुल गांधी पर की थी विवादित टिप्पणी
भंवरलाल शर्मा ने राहुल गांधी पर जुबानी हमला बोला। उन्होंने कहा था कि राहुल गांधी चार-पांच जोकरों से घिरे हुए हैं, उन्हें चापलूसों ने घेर रखा है। राहुल गांधी और सचिन पायलट जैसे लोग राजनीतिक विरासत से आए हैं। तब कांग्रेस पार्टी ने उनके इस बयान पर उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया था। राजस्थान विधानसभा चुनाव 2008 से पहले उन्हें फिर से बहाल किया गया था।
15वीं विधानसभा के पांचवें विधायक का निधन
भंवरलाल शर्मा 15वीं विधानसभा के पांचवें विधायक हैं, जिनका निधन हो गया। इससे पहले कांग्रेस के कैलाश त्रिवेदी, मास्टर भंवर लाल मेघवाल, गजेंद्र सिंह शक्तावत और भाजपा विधायक गौतम लाल मीणा का निधन हो चुका है।
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