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झुंझुनूं का ये शहीद पांच बहनों का था इकलौता भाई, गांव में खोलना चाहता था कोचिंग
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sat, 07 Oct 2017 05:24 PM IST
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सतीश
- फोटो : अमर उजाला
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अरुणाचल प्रदेश के पटोगर में दुर्घटनाग्रस्त हुए एयरफोर्स के हैलिकॉप्टर में झुंझुनूं जिले के सूरजगढ़ थाना इलाके के कासनी गांव का रहने वाला जवान भी शहीद हो गया। इसके बाद से ही यहां पूरे गांव में शोक की लहर है।
जानकारी के अनुसार, एयरफोर्स का एमआई-17वी5 हेलिकॉप्टर शुक्रवार सुबह छह बजे अरुणाचल प्रदेश के पटोगर में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हेलिकॉप्टर सवार जवानों को सेना की अग्रिम चौकी पर केरोसिन के कैन गिराने थे। इस दौरान एक जरीकैन खुलकर हेलिकॉप्टर के टेल रोटर (पीछे वाले पंख) में उलझ गया और आग लगने से सात जवान शहीद हो गए। इन शहीदों में झुंझनूं जिले के कासनी गांव निवासी सतीश भी शामिल था। सतीश के शहीद होने की खबर मिलने के बाद से पूरे गांव में शोक की लहर है।
सतीश का शव आज रात तक आने की संभावना है। कासनी गांव के उप सरपंच और शहीद के दोस्त सांवरमल कुमावत ने बताया कि पांच बहनों का इकलौता भाई सतीश करीब 10 साल पहले एयरफोर्स में नौकरी लगा था। वर्ष 2013 में उसकी शादी जयपुर के सांगानेर इलाके में रहने वाली किरण के साथ हुई थी। इनके ढाई साल का बेटा हर्ष है।
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जानकारी के अनुसार, एयरफोर्स का एमआई-17वी5 हेलिकॉप्टर शुक्रवार सुबह छह बजे अरुणाचल प्रदेश के पटोगर में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हेलिकॉप्टर सवार जवानों को सेना की अग्रिम चौकी पर केरोसिन के कैन गिराने थे। इस दौरान एक जरीकैन खुलकर हेलिकॉप्टर के टेल रोटर (पीछे वाले पंख) में उलझ गया और आग लगने से सात जवान शहीद हो गए। इन शहीदों में झुंझनूं जिले के कासनी गांव निवासी सतीश भी शामिल था। सतीश के शहीद होने की खबर मिलने के बाद से पूरे गांव में शोक की लहर है।
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सतीश का शव आज रात तक आने की संभावना है। कासनी गांव के उप सरपंच और शहीद के दोस्त सांवरमल कुमावत ने बताया कि पांच बहनों का इकलौता भाई सतीश करीब 10 साल पहले एयरफोर्स में नौकरी लगा था। वर्ष 2013 में उसकी शादी जयपुर के सांगानेर इलाके में रहने वाली किरण के साथ हुई थी। इनके ढाई साल का बेटा हर्ष है।
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दो महीने पहले ही गया था ड्यूटी पर
प्रतीकात्मक फोटो
सतीश की तीन बहनों निर्मला, सुनिता और बनिता की शादी हो गई है। दो बहनें नीतू और दर्शना अभी एमए और नर्सिंग की पढ़ाई कर रही हैं। सतीश जून में गांव आया था और छुट्टियां बिता कर 10 जुलाई को वापस ड्यूटी पर लौटा था।
सतीश का सपना था कि गांव के युवा सेना में जाकर देश की रक्षा करे। इसके लिए वह युवाओं को ट्रेनिंग देना चाहता था। उसके दोस्त ने बताया कि सतीश की इच्छा थी कि वह गांव में युवाओं के लिए कोचिंग खोले और सेना में जाने के लिए उन्हें प्रेरित करें। किसान परिवार के सतीश का बचपन काफी मुश्किलो में गुजरा है। पिता ताराचंद की मौत के बाद मां अंगूरी देवी ने ही मेहनत मजदूरी करके उसे पढ़ाया-लिखाया।
गौरतलब है कि अरुणाचल में हुए इस हादसे में जोधपुर निवासी अनिल कुमार सिंह भी शहीद हो गए। एके. सिंह मूलत: बिहार में सारण जिले के मढौरा विधानसभा क्षेत्र के मुबारकपुर निवासी थे, लेकिन अभी हाल ही वे जोधपुर के शिकारगढ़ स्थित आशापूर्णा नैनोमैक्स टाउनशिप में रह रहे थे। उनकी पत्नी मीना देवी, बेटी अनुपमा और बेटे अनूप व प्रिंस के साथ गांव के लिए रवाना हो गई हैं।
सतीश का सपना था कि गांव के युवा सेना में जाकर देश की रक्षा करे। इसके लिए वह युवाओं को ट्रेनिंग देना चाहता था। उसके दोस्त ने बताया कि सतीश की इच्छा थी कि वह गांव में युवाओं के लिए कोचिंग खोले और सेना में जाने के लिए उन्हें प्रेरित करें। किसान परिवार के सतीश का बचपन काफी मुश्किलो में गुजरा है। पिता ताराचंद की मौत के बाद मां अंगूरी देवी ने ही मेहनत मजदूरी करके उसे पढ़ाया-लिखाया।
गौरतलब है कि अरुणाचल में हुए इस हादसे में जोधपुर निवासी अनिल कुमार सिंह भी शहीद हो गए। एके. सिंह मूलत: बिहार में सारण जिले के मढौरा विधानसभा क्षेत्र के मुबारकपुर निवासी थे, लेकिन अभी हाल ही वे जोधपुर के शिकारगढ़ स्थित आशापूर्णा नैनोमैक्स टाउनशिप में रह रहे थे। उनकी पत्नी मीना देवी, बेटी अनुपमा और बेटे अनूप व प्रिंस के साथ गांव के लिए रवाना हो गई हैं।