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वृहदपीठ ने किया तय 20 लाख तक के मामले में नहीं हो सकती अपील
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Fri, 10 Nov 2017 07:18 PM IST
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court
राजस्थान हाईकोर्ट की वृहदपीठ ने कर विवाद संबंधी बिन्दु को तय करते हुए कहा है कि सीबीडीटी वर्ष 2015 में जारी परिपत्र के अनुसार बीस लाख रुपए से कम मुल्य के प्रकरणों में अपील नहीं कर सकता, भले ही संबंधित प्रकरण उच्चतम न्यायालय या हाईकोर्ट के आदेश से प्रभावित ही क्यों न हो।
न्यायाधीश केएस झवेरी, न्यायाधीश मनीष भंडारी और न्यायाधीश इन्द्रजीतसिंह की वृहदपीठ ने यह कानूनी बिन्दु दो एक के अनुपात से तय किया। वृहदपीठ के दो न्यायाधीशों ने माना कि बीस लाख रुपए से कम मुल्य वाले प्रकरणों की अपील नहीं हो सकती, लेकिन यदि विभाग चाहे तो अलग से रिट याचिका पेश कर सकता है। वहीं न्यायाधीश मनीष भंडारी ने अपना अलग आदेश देते हुए कहा कि यदि प्रकरण उच्चतम न्यायालय या हाईकोर्ट के आदेश से प्रभावित है तो परिपत्र के अपवाद के रूप में उसकी अपील की जा सकती है।
वृहदपीठ के सामने मुद्दा था कि 2015 में सीबीडीटी ने मुकदमों में कमी के लिए परिपत्र जारी किया, जिसके तहत पन्द्रह से बीस लाख रुपए से कम मूल्य वाले प्रकरणों में अपील नहीं की जाएगी। इसी मामले में हाईकोर्ट का यह मत आ चुका था कि किसी विषय पर सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट का फैसला पहले का चुका है और कोर्ट ने लंबित अपील उस फैसले से प्रभावित है तो कोर्ट का फैसला ही प्रभावी रहेगा। इस फैसले पर विवाद उठा की जब मुकदमों को कम किया जाना है तो परिपत्र लागू होगा ह्यया अदालती फैसला? इस पर प्रकरण को तय करने के लिए खंडपीठ के समक्ष भेजा गया।
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न्यायाधीश केएस झवेरी, न्यायाधीश मनीष भंडारी और न्यायाधीश इन्द्रजीतसिंह की वृहदपीठ ने यह कानूनी बिन्दु दो एक के अनुपात से तय किया। वृहदपीठ के दो न्यायाधीशों ने माना कि बीस लाख रुपए से कम मुल्य वाले प्रकरणों की अपील नहीं हो सकती, लेकिन यदि विभाग चाहे तो अलग से रिट याचिका पेश कर सकता है। वहीं न्यायाधीश मनीष भंडारी ने अपना अलग आदेश देते हुए कहा कि यदि प्रकरण उच्चतम न्यायालय या हाईकोर्ट के आदेश से प्रभावित है तो परिपत्र के अपवाद के रूप में उसकी अपील की जा सकती है।
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वृहदपीठ के सामने मुद्दा था कि 2015 में सीबीडीटी ने मुकदमों में कमी के लिए परिपत्र जारी किया, जिसके तहत पन्द्रह से बीस लाख रुपए से कम मूल्य वाले प्रकरणों में अपील नहीं की जाएगी। इसी मामले में हाईकोर्ट का यह मत आ चुका था कि किसी विषय पर सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट का फैसला पहले का चुका है और कोर्ट ने लंबित अपील उस फैसले से प्रभावित है तो कोर्ट का फैसला ही प्रभावी रहेगा। इस फैसले पर विवाद उठा की जब मुकदमों को कम किया जाना है तो परिपत्र लागू होगा ह्यया अदालती फैसला? इस पर प्रकरण को तय करने के लिए खंडपीठ के समक्ष भेजा गया।
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