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अनदेखी ने बना दी मौत की गौशाला, 3 दिन में 20 मौत!
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Thu, 10 Aug 2017 02:05 PM IST
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ट्रक में मृत गाएं
- फोटो : अमर उजाला
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गौशाला में गायों की देखभाल की जाती है, उनकी सेवा की जाती है, लेकिन यहां मामला उल्टा दिख रहा है। पिछले तीन दिन में करीब 20 गायों की मौत हो चुकी है।
दरअसल, कोटा में नगर निगम की गौशालाएं गायों के लिए मौत की गौशाला बनती जा रही हैं। पिछले 3 दिन की बारिश ने नगर निगम की व्यवस्थाओं की पोल खोल कर रख दी है। गंदगी और फिसलन से बंदा गौशाला में 3 दिन में 20 से ज्यादा गायों की मौत हो चुकी है। साथ ही, कई गाय और उनके बछड़े मरणासन्न अवस्था में है।
किशोरपुरा काइन हाउस में भी क्षमता से अधिक गौवंश होने के कारण स्थिति बिगड़ रही है। वहीं बंदा गौशाला में गायों के लिए शेड वाले बाडे़ की व्यवस्था है, लेकिन सांड और बछड़ों के लिए शेड कम है। ऐसे में लगातार बारिश के कारण गौवंश बीमार हो रहा है।
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दरअसल, कोटा में नगर निगम की गौशालाएं गायों के लिए मौत की गौशाला बनती जा रही हैं। पिछले 3 दिन की बारिश ने नगर निगम की व्यवस्थाओं की पोल खोल कर रख दी है। गंदगी और फिसलन से बंदा गौशाला में 3 दिन में 20 से ज्यादा गायों की मौत हो चुकी है। साथ ही, कई गाय और उनके बछड़े मरणासन्न अवस्था में है।
किशोरपुरा काइन हाउस में भी क्षमता से अधिक गौवंश होने के कारण स्थिति बिगड़ रही है। वहीं बंदा गौशाला में गायों के लिए शेड वाले बाडे़ की व्यवस्था है, लेकिन सांड और बछड़ों के लिए शेड कम है। ऐसे में लगातार बारिश के कारण गौवंश बीमार हो रहा है।
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नहीं दिया किसी ने ध्यान
गौशाला में मृत गाय
- फोटो : अमर उजाला
गोबर नहीं उठने के कारण गौशाला के फर्श पर अधिक फिसलन हो रही है। बछड़े एक बार गिरने के बाद खड़े ही नहीं हो पाते और गिरने के बाद उन्हें कोई उठाता नहीं है। बछड़े बड़े सांडों के पैर तले दब जाते हैं। ऐसे में वह जमीन पर पड़े-पड़े ही दम तोड़ देते हैं।
कोटा नगर निगम की बोर्ड मीटिंग में भी कई बार गौशाला में अव्यवस्था के चलते गायों की मौत होने का मामला उठता आया है। इसके बावजूद भी गौशाल पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। अभी वर्तमान में बंदा गौशाला और काइन हाउस में क्षमता से अधिक गौवंश है।
आंकडों की बात करें तो बंदा गौशाला की क्षमता 900 पशुओं की है, लेकिन वहां 2,000 से अधिक गौवंश है। वहीं, काइना हाउस में क्षमता 250 की है और वहां 600 गौवंश हैं।
कोटा नगर निगम की बोर्ड मीटिंग में भी कई बार गौशाला में अव्यवस्था के चलते गायों की मौत होने का मामला उठता आया है। इसके बावजूद भी गौशाल पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। अभी वर्तमान में बंदा गौशाला और काइन हाउस में क्षमता से अधिक गौवंश है।
आंकडों की बात करें तो बंदा गौशाला की क्षमता 900 पशुओं की है, लेकिन वहां 2,000 से अधिक गौवंश है। वहीं, काइना हाउस में क्षमता 250 की है और वहां 600 गौवंश हैं।
काम की धीमी गति रही कारण
क्षमता से अधिक गौ वंश
- फोटो : अमर उजाला
गौशाला के विस्तार की योजना बनाई थी उस पर काम तो शुरू हो गया, लेकिन गति इतनी धीमी है कि बारिश से पहले पूरा नहीं हो पाया। अभी भी उसे पूरा होने में करीब 6 महीने लगेंगे।
महापौर महेश विजय और गौशाला समिति अध्यक्ष पवन अग्रवाल गायों की मौत पर जांच की बात कह रहे हैं। वहीं, नेता प्रतिपक्ष अनिल सुवालका सहित कांग्रेसी पार्षदों ने जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
महापौर महेश विजय और गौशाला समिति अध्यक्ष पवन अग्रवाल गायों की मौत पर जांच की बात कह रहे हैं। वहीं, नेता प्रतिपक्ष अनिल सुवालका सहित कांग्रेसी पार्षदों ने जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।