फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Western Ghats forests are shrinking due to urbanization, SOFR report shocked everyone; 58.22 sq km of forest

चिंताजनक: शहरीकरण से सिकुड़ रहे पश्चिमी घाट के वन, एसओएफआर की रिपोर्ट ने चाैंकाया; 58.22 वर्ग किमी जंगल गायब

Mon, 23 Dec 2024 06:09 AM IST
शुभम कुमार अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क Published by: शुभम कुमार Updated Mon, 23 Dec 2024 06:09 AM IST
सार

स्टेट ऑफ फारेस्ट रिपोर्ट (एसओएफआर) के अनुसार पिछले 10 वर्षों के दौरान पश्चिमी घाट से 58.22 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले जंगल गायब हो चुके हैं। पहाड़ी और ऊंचाई वाले क्षेत्र में भी वनों का क्षेत्रफल घटा है। यह पहला मौका है, जब केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय  ने पश्चिमी घाट क्षेत्र में मौजूद जंगलों पर ध्यान केंद्रित किया है।

विज्ञापन
Western Ghats forests are shrinking due to urbanization, SOFR report shocked everyone; 58.22 sq km of forest
जंगल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वन्य जीवन का मुख्य आश्रय स्थल पश्चिमी घाट के घने जंगल बढ़ते शहरीकरण का शिकार हो रहे हैं। यहां देश की 30 फीसदी से ज्यादा वन्य प्रजातियां पाई जाती हैं। ये जंगल वायुमंडलीय कार्बन डाइऑक्साइड को सोखने में अहम भूमिका निभाते हैं और पश्चिमी घाट की पहाड़ियां भारतीय मानसून के मौसम पैटर्न को प्रभावित करती हैं। लेकिन अब इनका दायरा सिकुड़ता जा रहा है।
विज्ञापन


स्टेट ऑफ फारेस्ट की रिपोर्ट
स्टेट ऑफ फारेस्ट रिपोर्ट (एसओएफआर) के अनुसार पिछले 10 वर्षों के दौरान पश्चिमी घाट से 58.22 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले जंगल गायब हो चुके हैं। पहाड़ी और ऊंचाई वाले क्षेत्र में भी वनों का क्षेत्रफल घटा है। यह पहला मौका है, जब केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय  ने पश्चिमी घाट क्षेत्र में मौजूद जंगलों पर ध्यान केंद्रित किया है। पश्चिमी घाट छह राज्यों को कवर करता है, जिनमें गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल और गोवा शामिल हैं।
विज्ञापन


पश्चिमी घाट पारिस्थितिकी संवेदनशील क्षेत्र यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल होने के साथ-साथ दुनिया में जैव विविधता का एक प्रमुख हॉटस्पॉट भी है। यहां के जंगलों में आबनूस, जारूल, बांस, बेंत, सिनकोना और रबड़ जैसे पेड़ पाए जाते हैं।पर्यावरण मंत्रालय के मुताबिक यह करीब 60,285.61 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसलिए नष्ट हो रहे हैं जंगल
पश्चिमी घाट के आस-पास शहरीकरण बढ़ रहा है। कृषि विस्तार के साथ सड़क और रेलवे निर्माण के लिए भी जंगलों को काटा जा रहा है। वहीं, आग लगने के कारण वनों को नुकसान पहुंच रहा है। प्रदूषणकारी उद्योगों, खदानों, और जंगल से सटे क्षेत्रों में बढ़ रहे अवैध निर्माण से भी पश्चिमी घाट को नुकसान पहुंच रहा है।


नीलगिरी के जंगलों को सबसे ज्यादा नुकसान
रिपोर्ट के अनुसार तमिलनाडु के नीलगिरी के जंगलों में सबसे अधिक गिरावट देखी गई है। यहां 2013 से 123.44 वर्ग किमी क्षेत्र में फैले जंगल खत्म हो चुके हैं। पुणे में भी 664.9 वर्ग किमी जंगल खत्म हो चुके हैं। इस रिपोर्ट में पहाड़ी क्षेत्रों में फैले जंगलों को हो रहे नुकसान का भी उल्लेख किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed