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बंगाल: 'अफवाहें फैलाई जा रहीं', गांगुली ने ममता के कहने पर यूसुफ पठान को संदेश भेजने के दावों का किया खंडन

Sat, 06 Jun 2026 05:41 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता। Published by: निर्मल कांत Updated Sat, 06 Jun 2026 05:41 PM IST
सार

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने उन दावों को खारिज किया, जिनमें कहा जा रहा था कि टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने उनके जरिये यूसुफ पठान को सीट छोड़ने का संदेश भेजा है। गांगुली ने इसे अफवाह बताया। पढ़िए रिपोर्ट-

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सौरव गांगुली - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने कहा कि उन पर यह आरोप लगाया गया था कि उन्होंने पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से सांसद यूसुफ पठान से संपर्क किया था और उन्हें यह संदेश दिया था कि वे अपने संवैधानिक पद से इस्तीफा दें ताकि ममता बनर्जी उस सीट से उपचुनाव लड़ सकें।
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गांगुली ने इन आरोपों को पूरी तरह गलत बताया और कहा कि यह सब अफवाहें हैं। उन्होंने मीडिया से अपील की कि वे ऐसी अफवाहों और अटकलों पर ध्यान न दें। 

दरअसल, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में अप्रत्याशित पराजय के बाद ममता बनर्जी की राष्ट्रीय राजनीति में अधिक सक्रिय भूमिका को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, यदि ममता बनर्जी भविष्य में लोकसभा का रुख करती हैं तो बहरामपुर सीट उनके लिए प्रमुख विकल्पों में से एक हो सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से बताया गया था कि इसी सिलसिले में सौरव गांगुली के माध्यम से बहरामपुर के सांसद यूसुफ पठान तक सीट छोड़ने का संदेश पहुंचाया गया है। हालांकि यूसुफ ने इस्तीफे से इनकार कर दिया है।
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बहरामपुर लोकसभा सीट को टीएमसी के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है और इसी वजह से उसका नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि फिलहाल पूरा मामला चर्चाओं और राजनीतिक कयासों के स्तर पर है। आने वाले दिनों में तृणमूल कांग्रेस की रणनीति और पार्टी के भीतर के घटनाक्रम इस चर्चा की दिशा तय करेंगे।
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आखिर बहरामपुर सीट ही क्यों
मुर्शिदाबाद जिले की बहरामपुर लोकसभा सीट मुस्लिम बाहुल माना जाता है और तृणमूल कांग्रेस के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित सीट मानी जाती है। 2024 के लोकसभा चुनाव में यूसुफ पठान ने कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी को लगभग 85 हजार मतों से हराया था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सामाजिक समीकरण, संगठनात्मक आधार और हालिया चुनावी प्रदर्शन को देखते हुए यह सीट ममता बनर्जी के लिए संभावित रूप से अनुकूल मानी जा रही है।

टीएमसी में कम की गई अभिषेक बनर्जी की ताकत
ममता बनर्जी के भीतर सुधार की दिशा में कदम उठा रही हैं। पार्टी के भीतर बगावत और अपने नेतृत्व को चुनौती मिलने के बीच उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के संगठन में बड़ा बदलाव किया है। ममता बनर्जी के भतीजे और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की ताकत अब कम कर दी गई है, जिन्हें पार्टी में सबसे ताकतवर माना जाता था। पहले जिनका फैसला लगभग अंतिम माना जाता था, अब उनके साथ दो और राष्ट्रीय महासचिव जोड़े गए हैं। सांसद डेरेक ओ'ब्रायन और डोला सेन अब अभिषेक बनर्जी के साथ काम करेंगे। इससे साफ संदेश दिया गया है कि अब किसी भी नेता पर सवाल उठाया जा सकता है।


पार्टी के अंदर जो बगावत चल रही है, उसे अभिषेक बनर्जी के खिलाफ माना जा रहा है, न कि ममता बनर्जी के खिलाफ। विधानसभा चुनाव में हार के बाद एक बैठक में ममता बनर्जी ने कथित तौर पर नेताओं से अपने भतीजे की भूमिका की तारीफ करने को कहा था। इस पर कई नेता नाराज हो गए थे, क्योंकि उन्हें लगता था कि पार्टी की कमजोरी की वजह अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली है। इसके बाद पार्टी में दरारें दिखने लगीं। 19 मई को कालीघाट में हुई एक बैठक में ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा जैसे नेताओं ने खुलकर असहमति जताई।

संगठन में बड़े फेरबदल के संकेत
धीरे-धीरे यह असहमति बड़ी बगावत में बदल गई, जिसके बाद ममता बनर्जी ने पार्टी में बड़े बदलाव करने का फैसला लिया। वरिष्ठ नेता चंद्रिमा भट्टाचार्य को राज्य अध्यक्ष बनाया गया है, जिससे संगठन में बड़े फेरबदल संकेत मिलता है। सुब्रत बक्शी राष्ट्रीय कार्यकारी समिति में उपाध्यक्ष बने रहेंगे। पार्टी की विभिन्न शाखाओं में भी नए चेहरों को जिम्मेदारी दी गई है। सजदा अहमद, ममता ठाकुर, नयना बंद्योपाध्याय और स्वाति खांडेकर को पश्चिम बंगाल तृणमूल कांग्रेस का उपाध्यक्ष बनाया गया है।
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