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सीट का समीकरण: सपा के 20 साल पुराने दबदबे में भाजपा की सेंध; 2017 और 2022 में लगातार खिला कमल, ऐसा रहा इतिहास
Mon, 07 Sep 2026 09:19 PM IST
अमन तिवारी
इलेक्शन डेस्क, नोएडा
इलेक्शन डेस्क, नोएडा
Published by: अमन तिवारी
Updated Mon, 07 Sep 2026 09:19 PM IST
सार
मैनपुरी की भोगांव विधानसभा सीट 1957 में अस्तित्व में आई। 1993 से 2012 तक सपा ये सपा का मजबूत गढ़ रही। हालांकि साल 2017 और 2022 में भाजपा ने लगातार यहां से जीत दर्ज की। आइए इस सीट के पूरे सियासी गणित को समझते हैं...
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भोगांव सीट का समीकरण
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
उत्तर प्रदेश में अगले साल यानी 2027 में विधानसभा के चुनाव होने हैं। इन चुनावों को लेकर अभी से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पक्ष और विपक्ष दोनों मतदाताओं को लुभाने में लग गए हैं। राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। इसी चुनावी सरगर्मी के बीच, हम आपको उत्तर प्रदेश की हर विधानसभा सीट के इतिहास, सामाजिक ताने-बाने और उसके राजनीतिक परिदृश्य के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। इसी कड़ी में आज चर्चा मैनपुरी जिले की भोगांव विधानसभा सीट की। आइए, जानते हैं इस सीट का पूरा सियासी गणित और इसका अब तक का इतिहास क्या रहा है।
पहले जानते हैं भोगांव विधानसभा सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं, जिनमें कुल 403 विधानसभा सीटें हैं। इन्हीं में से एक जिला मैनपुरी है। मैनपुरी जिले में कुल चार विधानसभा सीटें हैं। इनमें- मैनपुरी, भोगांव, किशनी और करहल शामिल हैं। 'सीट का समीकरण' की आज की कड़ी में हम मैनपुरी जिले की भोगांव विधानसभा सीट की बात करेंगे। मैनपुरी जिले की भोगांव विधानसभा सीट पहली बार वर्ष 1957 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी और यहां पहला विधानसभा चुनाव 1957 में हुआ था। यहां के पहले विधायक गणेश चंद्र बने थे। उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़कर जीत हासिल की थी।
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पहले जानते हैं भोगांव विधानसभा सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं, जिनमें कुल 403 विधानसभा सीटें हैं। इन्हीं में से एक जिला मैनपुरी है। मैनपुरी जिले में कुल चार विधानसभा सीटें हैं। इनमें- मैनपुरी, भोगांव, किशनी और करहल शामिल हैं। 'सीट का समीकरण' की आज की कड़ी में हम मैनपुरी जिले की भोगांव विधानसभा सीट की बात करेंगे। मैनपुरी जिले की भोगांव विधानसभा सीट पहली बार वर्ष 1957 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी और यहां पहला विधानसभा चुनाव 1957 में हुआ था। यहां के पहले विधायक गणेश चंद्र बने थे। उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़कर जीत हासिल की थी।
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भोगांव विधानसभा सीट का जातीय समीकरण
भोगांव विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में सबसे बड़ी और निर्णायक आबादी लोधी समाज की है, जिसकी हिस्सेदारी लगभग 20% है। इसके बाद शाक्य (कुशवाहा) समाज की करीब 11%, अनुसूचित जाति (दलित) समुदाय की लगभग 11% तथा यादव मतदाताओं की करीब 9% हिस्सेदारी है, जो चुनाव में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वहीं क्षत्रिय (ठाकुर) समाज की हिस्सेदारी करीब 9%, ब्राह्मण समुदाय के लगभग 6%, अल्पसंख्यक (मुस्लिम) समाज के करीब 5% मतदाता मौजूद हैं। बाकी बचे मतदाता अन्य अति पिछड़े और सवर्ण समुदायों से आते हैं।
भोगांव विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
कांग्रेस के दबदबे से हुई शुरुआत
भोगांव विधानसभा सीट के पहले यानी की 1957 के चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के गणेश चंद्र विजयी हुए। उन्होंने निर्दलीय (IND) उम्मीदवार सूबेदार सिंह को 3,884 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में गणेश चंद्र को 8,925 वोट मिले, जबकि सूबेदार सिंह को 5,041 वोट मिले।
भोगांव विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में सबसे बड़ी और निर्णायक आबादी लोधी समाज की है, जिसकी हिस्सेदारी लगभग 20% है। इसके बाद शाक्य (कुशवाहा) समाज की करीब 11%, अनुसूचित जाति (दलित) समुदाय की लगभग 11% तथा यादव मतदाताओं की करीब 9% हिस्सेदारी है, जो चुनाव में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वहीं क्षत्रिय (ठाकुर) समाज की हिस्सेदारी करीब 9%, ब्राह्मण समुदाय के लगभग 6%, अल्पसंख्यक (मुस्लिम) समाज के करीब 5% मतदाता मौजूद हैं। बाकी बचे मतदाता अन्य अति पिछड़े और सवर्ण समुदायों से आते हैं।
भोगांव विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
कांग्रेस के दबदबे से हुई शुरुआत
भोगांव विधानसभा सीट के पहले यानी की 1957 के चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के गणेश चंद्र विजयी हुए। उन्होंने निर्दलीय (IND) उम्मीदवार सूबेदार सिंह को 3,884 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में गणेश चंद्र को 8,925 वोट मिले, जबकि सूबेदार सिंह को 5,041 वोट मिले।
इन चेहरों को मिली एक से ज्यादा बार जीत
- फोटो : अमर उजाला
कांग्रेस ने दोहराई जीत
1962 के चुनाव में भोगांव विधानसभा सीट से कांग्रेस के सूबेदार सिंह विजयी हुए। उन्होंने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के जगदीश नारायण को 1,003 वोटों के अंतर से हराया।
1967 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने जीता चुनाव
इस विधानसभा चुनाव में भोगांव विधानसभा सीट पर पहली बार भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने जीत दर्ज की। चुनाव में जगदीश नारायण त्रिपाठी विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के सूबेदार सिंह को 3,732 वोटों के अंतर से हराया।
भारतीय क्रांति दल ने पहली बार जीती सीट
1969 के चुनाव में भोगांव विधानसभा सीट पर पहली बार भारतीय क्रांति दल (BKD) ने जीत दर्ज की। चुनाव में सूबेदार सिंह विजयी हुए। उन्होंने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के जगदीश नारायण त्रिपाठी को 7,441 वोटों के अंतर से हराया।
1974: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने भोगांव में की वापसी
इस चुनाव में भोगांव विधानसभा सीट पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने वापसी की। चुनाव में जगदीश नारायण त्रिपाठी विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनसंघ (BJS) के हरि राम शाक्य को 2,755 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में जगदीश नारायण त्रिपाठी को 22,283 वोट मिले, जबकि हरि राम शाक्य को 19,528 वोट मिले।
1962 के चुनाव में भोगांव विधानसभा सीट से कांग्रेस के सूबेदार सिंह विजयी हुए। उन्होंने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के जगदीश नारायण को 1,003 वोटों के अंतर से हराया।
1967 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने जीता चुनाव
इस विधानसभा चुनाव में भोगांव विधानसभा सीट पर पहली बार भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने जीत दर्ज की। चुनाव में जगदीश नारायण त्रिपाठी विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के सूबेदार सिंह को 3,732 वोटों के अंतर से हराया।
भारतीय क्रांति दल ने पहली बार जीती सीट
1969 के चुनाव में भोगांव विधानसभा सीट पर पहली बार भारतीय क्रांति दल (BKD) ने जीत दर्ज की। चुनाव में सूबेदार सिंह विजयी हुए। उन्होंने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के जगदीश नारायण त्रिपाठी को 7,441 वोटों के अंतर से हराया।
1974: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने भोगांव में की वापसी
इस चुनाव में भोगांव विधानसभा सीट पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने वापसी की। चुनाव में जगदीश नारायण त्रिपाठी विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनसंघ (BJS) के हरि राम शाक्य को 2,755 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में जगदीश नारायण त्रिपाठी को 22,283 वोट मिले, जबकि हरि राम शाक्य को 19,528 वोट मिले।
आपातकाल का समय
1974 के चुनावों के बाद देश में आपातकाल लगा दिया गया, जो 21 महीनों तक चला। मार्च 1977 में आपातकाल हटा और आम चुनाव हुए। इन चुनावों में कांग्रेस की हार हुई और मोरारजी देसाई के नेतृत्व में पहली गैर-कांग्रेसी 'जनता पार्टी' की सरकार बनी। इसके बाद जनता पार्टी की नई केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि कांग्रेस पार्टी देश की जनता का विश्वास खो चुकी है। इस आधार पर केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश सहित कांग्रेस शासित 9 राज्यों की विधानसभाओं को समय से पहले भंग कर दिया और राष्ट्रपति शासन लगा दिया। इसके बाद राज्य में 1977 में दोबारा चुनाव हुए, जिसमें जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला और राम नरेश यादव उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने। हालांकि यह सरकार भी ज्यादा दिनों तक सत्ता में नहीं रह सकी।
1977: जनता पार्टी ने मारी बाजी
इस चुनाव में मैनपुरी जिले की भोगांव विधानसभा सीट पर पहली बार जनता पार्टी (JNP) की एंट्री हुई। चुनाव में हरि राम शाक्य विजयी हुए। उन्होंने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के जगदीश नारायण को 21,002 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में हरि राम शाक्य को 30,587 वोट मिले, जबकि जगदीश नारायण को 9,585 वोट मिले।
हालांकि उत्तर प्रदेश में 1977 के बाद 1980 में फिर से विधानसभा चुनाव हुए, क्योंकि केंद्र में जनता पार्टी की सरकार 1980 आते-आते अंदरूनी कलह के कारण बिखर गई। पार्टी के विघटन के बाद जनवरी 1980 में लोकसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में इंदिरा गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस ने प्रचंड बहुमत के साथ केंद्र की सत्ता में जोरदार वापसी की। सत्ता में आते ही इंदिरा सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में जनता पार्टी को राज्यों में बुरी तरह हार मिली है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकारों ने जनता का विश्वास खो दिया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को फिर भंग कर दिया गया।
विधानसभा भंग होने के बाद उत्तर प्रदेश में मई 1980 में दोबारा चुनाव कराए गए। इस चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारी बहुमत हासिल किया और विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी.पी. सिंह) उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने।
1974 के चुनावों के बाद देश में आपातकाल लगा दिया गया, जो 21 महीनों तक चला। मार्च 1977 में आपातकाल हटा और आम चुनाव हुए। इन चुनावों में कांग्रेस की हार हुई और मोरारजी देसाई के नेतृत्व में पहली गैर-कांग्रेसी 'जनता पार्टी' की सरकार बनी। इसके बाद जनता पार्टी की नई केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि कांग्रेस पार्टी देश की जनता का विश्वास खो चुकी है। इस आधार पर केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश सहित कांग्रेस शासित 9 राज्यों की विधानसभाओं को समय से पहले भंग कर दिया और राष्ट्रपति शासन लगा दिया। इसके बाद राज्य में 1977 में दोबारा चुनाव हुए, जिसमें जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला और राम नरेश यादव उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने। हालांकि यह सरकार भी ज्यादा दिनों तक सत्ता में नहीं रह सकी।
1977: जनता पार्टी ने मारी बाजी
इस चुनाव में मैनपुरी जिले की भोगांव विधानसभा सीट पर पहली बार जनता पार्टी (JNP) की एंट्री हुई। चुनाव में हरि राम शाक्य विजयी हुए। उन्होंने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के जगदीश नारायण को 21,002 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में हरि राम शाक्य को 30,587 वोट मिले, जबकि जगदीश नारायण को 9,585 वोट मिले।
हालांकि उत्तर प्रदेश में 1977 के बाद 1980 में फिर से विधानसभा चुनाव हुए, क्योंकि केंद्र में जनता पार्टी की सरकार 1980 आते-आते अंदरूनी कलह के कारण बिखर गई। पार्टी के विघटन के बाद जनवरी 1980 में लोकसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में इंदिरा गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस ने प्रचंड बहुमत के साथ केंद्र की सत्ता में जोरदार वापसी की। सत्ता में आते ही इंदिरा सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में जनता पार्टी को राज्यों में बुरी तरह हार मिली है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकारों ने जनता का विश्वास खो दिया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को फिर भंग कर दिया गया।
विधानसभा भंग होने के बाद उत्तर प्रदेश में मई 1980 में दोबारा चुनाव कराए गए। इस चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारी बहुमत हासिल किया और विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी.पी. सिंह) उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने।
इन पार्टियों को मिली एक से ज्यादा बार जीत
- फोटो : अमर उजाला
1980 के विधानसभा चुनाव में भोगांव विधानसभा सीट पर इंडियन नेशनल कांग्रेस (U) के प्रत्याशी सूबेदार सिंह (पुत्र चिरौंजी) विजयी हुए थे। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी इंडियन नेशनल कांग्रेस (I) के प्रत्याशी सूबेदार सिंह (पुत्र परमसुख) को 8,122 वोटों के अंतर से हराया था। चुनाव में सूबेदार सिंह को 20,308 वोट मिले जबकि कांग्रेस (I) के सूबेदार सिंह को 12,186 वोट मिले।
भोगांव में कांग्रेस ने की वापसी
वहीं 1985 के विधानसभा चुनाव में मैनपुरी जिले की भोगांव विधानसभा सीट पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के शिव बचन सिंह विजयी हुए। उन्होंने इंडियन कांग्रेस (जे) (ICJ) के सूबेदार सिंह को 9,735 वोटों के अंतर से हराया।
पहली बार जीती भाजपा
1989 के विधानसभा चुनाव में भोगांव विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार शिवराज सिंह चौहान ने जीत हासिल की थी। उन्होंने प्रतिद्वंद्वी निर्दलीय उम्मीदवार सूबेदार सिंह को 2,710 वोटों के अंतर से हराया था।
1989 के बाद राजनीतिक अस्थिरता के कारण राज्य में 1991, 1993 और 1996 में चुनाव हुए। इन चुनावों में भोगांव विधानसभा सीट का समीकरण भी बदलता रहा।
1991 के विधानसभा चुनाव में मैनपुरी जिले की भोगांव विधानसभा सीट पर जनता पार्टी (JP) के राम औतार शाक्य विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के शिवराज सिंह चौहान को 1,250 वोटों के अंतर से हराया।
वहीं 1985 के विधानसभा चुनाव में मैनपुरी जिले की भोगांव विधानसभा सीट पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के शिव बचन सिंह विजयी हुए। उन्होंने इंडियन कांग्रेस (जे) (ICJ) के सूबेदार सिंह को 9,735 वोटों के अंतर से हराया।
पहली बार जीती भाजपा
1989 के विधानसभा चुनाव में भोगांव विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार शिवराज सिंह चौहान ने जीत हासिल की थी। उन्होंने प्रतिद्वंद्वी निर्दलीय उम्मीदवार सूबेदार सिंह को 2,710 वोटों के अंतर से हराया था।
1989 के बाद राजनीतिक अस्थिरता के कारण राज्य में 1991, 1993 और 1996 में चुनाव हुए। इन चुनावों में भोगांव विधानसभा सीट का समीकरण भी बदलता रहा।
1991 के विधानसभा चुनाव में मैनपुरी जिले की भोगांव विधानसभा सीट पर जनता पार्टी (JP) के राम औतार शाक्य विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के शिवराज सिंह चौहान को 1,250 वोटों के अंतर से हराया।
1993 में जीती सपा
इस विधानसभा चुनाव में भोगांव विधानसभा सीट पर पहली बार समाजवादी पार्टी के उपदेश सिंह चौहान विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के राम नरेश अग्निहोत्री को 18,557 वोटों के अंतर से हराया।
1996: सपा ने दोहराई जीत
इस विधानसभा चुनाव में भोगांव विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के राम औतार शाक्य विजयी हुए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के शिवराज सिंह को 2,506 वोटों के अंतर से हराया।
2002: सपा ने लगाई जीत की हैट्रिक
इस चुनाव में सपा ने अपनी पकड़ और मजबूत की। चुनाव में सपा के आलोक कुमार ने बसपा के शिवराज सिंह उर्फ पी.टी.आई. को 14,194 वोटों से हराया। चुनाव में उन्हें 51,920 वोट मिले, जबकि बसपा उम्मीदवार को 37,726 वोट हासिल हुए।
2007 में भी आलोक कुमार ने जीत का सिलसिला जारी रखा। उन्होंने बसपा के बिजेंद्र सिंह उर्फ भल्लू चौहान को 5,117 वोटों से हराया। इसके बाद 2012 में उनकी जीत का अंतर और बढ़ा। इस चुनाव में आलोक कुमार को 70,298 वोट मिले और उन्होंने बसपा के आशीष सिंह उर्फ राहुल राठौर को 30,676 वोटों से हराया।
इस विधानसभा चुनाव में भोगांव विधानसभा सीट पर पहली बार समाजवादी पार्टी के उपदेश सिंह चौहान विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के राम नरेश अग्निहोत्री को 18,557 वोटों के अंतर से हराया।
1996: सपा ने दोहराई जीत
इस विधानसभा चुनाव में भोगांव विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के राम औतार शाक्य विजयी हुए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के शिवराज सिंह को 2,506 वोटों के अंतर से हराया।
2002: सपा ने लगाई जीत की हैट्रिक
इस चुनाव में सपा ने अपनी पकड़ और मजबूत की। चुनाव में सपा के आलोक कुमार ने बसपा के शिवराज सिंह उर्फ पी.टी.आई. को 14,194 वोटों से हराया। चुनाव में उन्हें 51,920 वोट मिले, जबकि बसपा उम्मीदवार को 37,726 वोट हासिल हुए।
2007 में भी आलोक कुमार ने जीत का सिलसिला जारी रखा। उन्होंने बसपा के बिजेंद्र सिंह उर्फ भल्लू चौहान को 5,117 वोटों से हराया। इसके बाद 2012 में उनकी जीत का अंतर और बढ़ा। इस चुनाव में आलोक कुमार को 70,298 वोट मिले और उन्होंने बसपा के आशीष सिंह उर्फ राहुल राठौर को 30,676 वोटों से हराया।
2022 का नतीजा
- फोटो : अमर उजाला
2017: भाजपा ने बदला समीकरण
इस विधानसभा चुनाव में भोगांव सीट पर भाजपा का बोलबाला रहा, क्योंकि राज्य के चुनावी नतीजों में भाजपा ने बहुमत के साथ सरकार बनाई थी। इसका असर मैनपुरी जिले की भोगांव विधानसभा सीट पर भी पड़ा। चुनाव में भोगांव विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राम नरेश अग्निहोत्री विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) के आलोक कुमार को 20,297 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में राम नरेश अग्निहोत्री को 92,697 वोट मिले, जबकि आलोक कुमार को 72,400 वोट मिले। जबकि बसपा के प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह चुनाव में 25,872 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
2022 में भाजपा ने बचाई सीट
2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने भोगांव सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा। चुनाव में राम नरेश अग्निहोत्री ने सपा के आलोक कुमार शाक्य को 4,767 वोटों के अंतर से हराया। इस बार मुकाबला 2017 की तुलना में काफी करीबी रहा। अग्निहोत्री को 97,208 वोट मिले, जबकि आलोक कुमार शाक्य को 92,441 वोट हासिल हुए। इस तरह 2017 और 2022 में लगातार दो जीत के साथ भाजपा ने भोगांव में अपनी स्थिति मजबूत की है, जबकि सपा भी लगातार मजबूत चुनौती देती रही है।
इस विधानसभा चुनाव में भोगांव सीट पर भाजपा का बोलबाला रहा, क्योंकि राज्य के चुनावी नतीजों में भाजपा ने बहुमत के साथ सरकार बनाई थी। इसका असर मैनपुरी जिले की भोगांव विधानसभा सीट पर भी पड़ा। चुनाव में भोगांव विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राम नरेश अग्निहोत्री विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) के आलोक कुमार को 20,297 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में राम नरेश अग्निहोत्री को 92,697 वोट मिले, जबकि आलोक कुमार को 72,400 वोट मिले। जबकि बसपा के प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह चुनाव में 25,872 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
2022 में भाजपा ने बचाई सीट
2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने भोगांव सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा। चुनाव में राम नरेश अग्निहोत्री ने सपा के आलोक कुमार शाक्य को 4,767 वोटों के अंतर से हराया। इस बार मुकाबला 2017 की तुलना में काफी करीबी रहा। अग्निहोत्री को 97,208 वोट मिले, जबकि आलोक कुमार शाक्य को 92,441 वोट हासिल हुए। इस तरह 2017 और 2022 में लगातार दो जीत के साथ भाजपा ने भोगांव में अपनी स्थिति मजबूत की है, जबकि सपा भी लगातार मजबूत चुनौती देती रही है।