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बंगाल: मोहम्मद अजमल सिद्दीकी ने टीएमसी से दिया इस्तीफा, बोले-अभिषेक बनर्जी के साथ काम करना मुश्किल
Sat, 06 Jun 2026 06:57 PM IST
निर्मल कांत
आईएएनएस, नई दिल्ली।
आईएएनएस, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Sat, 06 Jun 2026 06:57 PM IST
सार
पश्चिम बंगाल में टीएमसी के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के राज्य सचिव मोहम्मद अजमल सिद्दीकी ने पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी में कामकाज के माहौल से वह असंतुष्ट हैं और अब आगे जुड़ाव जारी रखना संभव नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अभिषेक बनर्जी के साथ काम करना उनके लिए मुश्किल हो गया है। पढ़िए रिपोर्ट-
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मोहम्मद अजमल सिद्दीकी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एक्स/वीडियो ग्रैब
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विस्तार
पश्चिम बंगाल में टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। शनिवार को मोहम्मद अजमल सिद्दीकी ने राज्य सचिव (अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ) समेत पार्टी के सभी पदों और अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (एआईटीसी) की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।
टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी को लिखे पत्र में मोहम्मद अजमल सिद्दीकी ने लिखा कि पूरे सम्मान के साथ मैं राज्य सचिव (अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ) और एआईटीसी में मुझे सौंपी गई सभी दूसरी जिम्मेदारियों से, साथ ही पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से तुरंत इस्तीफा देता हूं।
उन्होंने आगे लिखा, यह फैसला हल्के में नहीं लिया गया है। मैंने अपना समय, ऊर्जा और प्रतिबद्धता पार्टी को दी है और हमेशा संगठन और उसके कार्यकर्ताओं के हित में काम किया है। आपके नेतृत्व में काम करना और पार्टी के विकास व लोगों तक पहुंच में योगदान देना मेरे लिए सम्मान की बात है। लेकिन काफी सोचने-विचारने के बाद मैं इस नतीजे पर पहुंचा हूं कि मैं अब पार्टी के साथ अपना जुड़ाव जारी रखने की हालत में नहीं हूं। हालांकि, मेरे इस फैसले में निजी वजहें शामिल हैं। लेकिन मुझे पार्टी के मौजूदा माहौल और कामकाज से अपनी गहरी नाराजगी भी जाहिर करनी होगी।
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'समर्पित कार्यकर्ताओं को किया जा रहा नजरअंदाज'
सिद्दीकी ने लिखा, पिछले कुछ वर्षों से कई मेहनती और समर्पित कार्यकर्ताओं को लगा है कि उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है, किनारे कर दिया गया है और उन्हें वह सम्मान नहीं मिल रहा है जिसके वे हकदार हैं। जो लोकतांत्रिक भावना कभी बातचीत और मिलकर फैसले लेने को बढ़ावा देती थी, वह अब काफी कमजोर हो गई है। जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं की वास्तविक चिंताएं अक्सर अनसुनी रह जाती हैं, जिससे पार्टी के पक्के सदस्यों में निराशा बढ़ रही है।
ये भी पढ़ें: बंगाल: 'अफवाहें फैलाई जा रहीं', गांगुली ने ममता के कहने पर यूसुफ पठान को संदेश भेजने के दावों का किया खंडन
'अभिषेक बनर्जी के साथ काम करना मुश्किल'
उन्होंने लिखा, मुझे खास तौर पर अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व और काम करने के तरीके के तहत काम करना मुश्किल लगा है। मेरे अनुभव में पार्टी के मामलों और कार्यकर्ताओं के साथ बातचीत को लेकर उनके नजरिये ने ऐसा माहौल बना दिया है, जहां लंबे समय से काम कर रहे और वफादार सदस्य खुद को कमतर और हाशिए पर महसूस करते हैं।
'मुश्किल हो रहा जिम्मेदारियों को निभाना'
उन्होंने लिखा कि पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ सही सलाह-मशविरा न होने से मेरे जैसे लोगों के लिए अपनी जिम्मेदारियों को अच्छे से निभाना मुश्किल होता जा रहा है। राज्य सचिव (अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ) के तौर पर मुझे जो भरोसा और जिम्मेदारियां दी गईं, उसके लिए मैं आपका शुक्रगुजार हूं। हालांकि, इन वजहों से मैं आपसे गुजारिश करता हूं कि राज्य सचिव (अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ) समेत बाकी सभी पदों और एआईटीसी की प्राथमिक सदस्यता से मेरा इस्तीफा तुरंत स्वीकार करें। मैं आपको और पार्टी को भविष्य में सफलता की शुभकामनाएं देता हूं।
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टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी को लिखे पत्र में मोहम्मद अजमल सिद्दीकी ने लिखा कि पूरे सम्मान के साथ मैं राज्य सचिव (अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ) और एआईटीसी में मुझे सौंपी गई सभी दूसरी जिम्मेदारियों से, साथ ही पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से तुरंत इस्तीफा देता हूं।
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उन्होंने आगे लिखा, यह फैसला हल्के में नहीं लिया गया है। मैंने अपना समय, ऊर्जा और प्रतिबद्धता पार्टी को दी है और हमेशा संगठन और उसके कार्यकर्ताओं के हित में काम किया है। आपके नेतृत्व में काम करना और पार्टी के विकास व लोगों तक पहुंच में योगदान देना मेरे लिए सम्मान की बात है। लेकिन काफी सोचने-विचारने के बाद मैं इस नतीजे पर पहुंचा हूं कि मैं अब पार्टी के साथ अपना जुड़ाव जारी रखने की हालत में नहीं हूं। हालांकि, मेरे इस फैसले में निजी वजहें शामिल हैं। लेकिन मुझे पार्टी के मौजूदा माहौल और कामकाज से अपनी गहरी नाराजगी भी जाहिर करनी होगी।
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'समर्पित कार्यकर्ताओं को किया जा रहा नजरअंदाज'
सिद्दीकी ने लिखा, पिछले कुछ वर्षों से कई मेहनती और समर्पित कार्यकर्ताओं को लगा है कि उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है, किनारे कर दिया गया है और उन्हें वह सम्मान नहीं मिल रहा है जिसके वे हकदार हैं। जो लोकतांत्रिक भावना कभी बातचीत और मिलकर फैसले लेने को बढ़ावा देती थी, वह अब काफी कमजोर हो गई है। जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं की वास्तविक चिंताएं अक्सर अनसुनी रह जाती हैं, जिससे पार्टी के पक्के सदस्यों में निराशा बढ़ रही है।
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'अभिषेक बनर्जी के साथ काम करना मुश्किल'
उन्होंने लिखा, मुझे खास तौर पर अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व और काम करने के तरीके के तहत काम करना मुश्किल लगा है। मेरे अनुभव में पार्टी के मामलों और कार्यकर्ताओं के साथ बातचीत को लेकर उनके नजरिये ने ऐसा माहौल बना दिया है, जहां लंबे समय से काम कर रहे और वफादार सदस्य खुद को कमतर और हाशिए पर महसूस करते हैं।
'मुश्किल हो रहा जिम्मेदारियों को निभाना'
उन्होंने लिखा कि पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ सही सलाह-मशविरा न होने से मेरे जैसे लोगों के लिए अपनी जिम्मेदारियों को अच्छे से निभाना मुश्किल होता जा रहा है। राज्य सचिव (अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ) के तौर पर मुझे जो भरोसा और जिम्मेदारियां दी गईं, उसके लिए मैं आपका शुक्रगुजार हूं। हालांकि, इन वजहों से मैं आपसे गुजारिश करता हूं कि राज्य सचिव (अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ) समेत बाकी सभी पदों और एआईटीसी की प्राथमिक सदस्यता से मेरा इस्तीफा तुरंत स्वीकार करें। मैं आपको और पार्टी को भविष्य में सफलता की शुभकामनाएं देता हूं।