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पश्चिम बंगाल : एसएचआरसी अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर राज्यपाल धनखड़ ने ममता सरकार के अड़ियल रुख पर जताई चिंता
Mon, 20 Dec 2021 04:37 AM IST
Kuldeep Singh
एजेंसी, कोलकाता
एजेंसी, कोलकाता
Published by: Kuldeep Singh
Updated Mon, 20 Dec 2021 04:37 AM IST
सार
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने राज्य मानवाधिकार आयोग (एसएचआरसी) के अध्यक्ष की नियुक्ति पर ट्वीट कर कहा, इस बात को जरूर संज्ञान में लिया जाए कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का निष्कर्ष है कि राज्य में ‘कानून का राज नहीं, बल्कि शासक का कानून’ है। इसलिए स्थिति को संभालने की कोशिश की जाए।
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पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़
- फोटो : एएनआई
विस्तार
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने राज्य मानवाधिकार आयोग (एसएचआरसी) के अध्यक्ष की नियुक्ति पर ममता बनर्जी सरकार के अड़ियल रुख को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने सरकार से वह समय-सीमा बताने को कहा है जिसके तहत आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए सिफारिश की जाएगी।
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राज्य में ‘कानून का राज नहीं, बल्कि शासक का कानून’ है : राज्यपाल
राज्यपाल ने ट्वीट किया, इस बात को जरूर संज्ञान में लिया जाए कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का निष्कर्ष है कि राज्य में ‘कानून का राज नहीं, बल्कि शासक का कानून’ है। इसलिए स्थिति को संभालने की कोशिश की जाए। राज्य में चुनाव बाद हिंसा पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा नियुक्त तथ्यान्वेषी समिति ने जुलाई में कहा था कि पश्चिम बंगाल में स्थिति ‘कानून के राज के बजाय शासक के कानून का परिचायक’ है।
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सरकार को भेजे पत्र में राज्यपाल ने कहा कि मानवाधिकार सुरक्षा अधिनियम, 1993 के तहत राज्य आयोग में एक अध्यक्ष होगा जो किसी हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश या न्यायाधीश रहा हो तथा एक सदस्य हाईकोर्ट का पूर्व न्यायाधीश या राज्य में जिला न्यायाधीश रहा हो तथा एक अन्य सदस्य ऐसा व्यक्ति हो, जिसे मानवाधिकार से जुड़े मामलों का ज्ञान हो। धनखड़ ने कहा कि इन सभी तीनों सदस्यों में अध्यक्ष समेत दो सदस्य न्यायपालिका या न्यायिक पृष्ठभूमि से हों।
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उन्होंने कहा, स्थिति जो सामने आई है, वह यह है कि वर्तमान अध्यक्ष 20 दिसंबर, 2021 को अपना पद छोड़ेंगे तथा उसके बाद आयोग में एकमात्र सदस्य श्री नपराजित रह जाएंगे। उसके बाद आयोग में न्यायपालिका या न्यायिक पृष्ठभूमि का कोई भी सदस्य नहीं होगा।