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Hindi News ›   India News ›   West Bengal : CM Mamata Banerjee to use Shaheed Diwas address for national outreach, TMC to enter national politics on July 21

बंगाल: आज राज्य के बाहर शहीद दिवस मनाएगी टीएमसी, जानें 21 जुलाई 1993 को ममता के आंदोलन में आखिर क्या हुआ था?

Wed, 21 Jul 2021 08:59 AM IST
दीप्ति मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: दीप्ति मिश्रा Updated Wed, 21 Jul 2021 08:59 AM IST
सार

टीएमसी के गठन के बाद से हर साल 21 जुलाई को शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है, लेकिन कोरोना के चलते पिछले साल तृणमूल ने शहीद दिवस को सांकेतिक तौर पर मनाया गया था। इसे पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ी जीत के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की राष्ट्रीय राजनीति में अपनी जमीन तैयार करने की कोशिश मानी जा रही है।

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West Bengal :  CM Mamata Banerjee to use Shaheed Diwas address for national outreach, TMC to enter national politics on July 21
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी - फोटो : ANI

विस्तार

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस बुधवार यानी आज राष्ट्रीय स्तर पर शहीद दिवस मनाएगी। टीएमसी के गठन के बाद से हर साल 21 जुलाई को शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है, लेकिन कोरोना के चलते पिछले साल तृणमूल ने शहीद दिवस को सांकेतिक तौर पर मनाया गया था। इसे पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ी जीत के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की राष्ट्रीय राजनीति में अपनी जमीन तैयार करने की कोशिश मानी जा रही है। आइए बताते हैं कि ममता के लिए 21 जुलाई का इतना महत्व क्यों हैं? आखिर 21 जुलाई 1993 को ऐसा क्या हुआ था, जो अब तक नहीं भूल पाईं ममता बनर्जी...

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28 साल पहले 21 जुलाई को क्या हुआ था?
वर्ष 1993 में ममता बनर्जी तब पश्चिम बंगाल में युवा कांग्रेस की अध्यक्ष थीं। ममता बनर्जी ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए सचित्र वोटर कार्ड की मांग की। अपनी मांग को लेकर राज्य की तत्कालीन वाममोर्चा सरकार के मुख्य सचिवालय से कांग्रेस की ओर से एक आम अभियान का आह्वान किया गया। ममता के नेतृत्व में 21 जुलाई को युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता आंदोलन में शामिल हुए, लेकिन तृणमूल का आरोप है कि उस वक्त उनके जुलूस पर पुलिस की ओर से गोलियां चलाई गईं, जिसमें 13 लोगों की जान चली गई थी।
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इसके बाद बंगाल की राजनीति में उथल-पुथल मच गई थी। इसके बाद में ममता बनर्जी ने कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस पार्टी (टीएमसी) का गठन किया। तृणमूल कांग्रेस पार्टी के जन्म के बाद भी पार्टी 21 जुलाई के दिन को नहीं भूली। तृणमूल हर साल इस दिन को शहीद दिवस के रूप में मनाती रही है। पिछले साल कोरोना की वजह से इसे सांकेतिक मनाया गया था। 

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ममता के भाषण का होगा स्थानीय भाषाओं में प्रसारण

इस बार शहीद दिवस पर ममता बनर्जी राष्ट्रीय राजनीति में उतरने की तैयार कर रही हैं। इसी अकांक्षा को लेकर वह अपना पहल कदम कोलकाता में बुधवार को शहीद दिवस के कार्यक्रम में भाषण देकर बढ़ाएंगी। उनके इस भाषण को देश के सभी प्रदेशों की स्थानीय भाषा में अनुवाद कर राजधानियों और बड़े-बड़े शहरों में टीवी स्क्रीन लगाकर प्रसारित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ममता इस कार्यक्रम में अपना भाषण तो बांग्ला में ही देंगी, लेकिन उसे अलग-अलग राज्यों जैसे केरल में मलयालम, आंध्र व तेंलगाना में तेलुगू तो ओडिशा में उड़िया और हिंदी पट्टी के सभी प्रदेशों में वह हिंदी भाषा में सुनाया जाएगा। ममता का मानना है कि यदि उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में उतरना है तो पूरे देश की जनता से उन्हीं की भाषा में बात करनी होगी।

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