Weather Update : 12 राज्यों में पांच दिन भारी बारिश का अलर्ट, यूपी-मप्र में बिजली गिरने से नौ की मौत
इस बीच, देश के विभिन्न हिस्सों में बृहस्पतिवार को मानसून एकदम आफत बनकर बरसा। भारी बारिश के कारण हिमाचल प्रदेश के कई जिलों में नदी-नाले उफान पर हैं। वहीं, यूपी और मध्य प्रदेश में बिजली गिरने की अलग-अलग घटनाओं में नौ लोग मारे गए हैं।
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मौसम विभाग ने गुजरात, राजस्थान, उत्तराखंड, ओडिशा समेत 12 राज्यों में अगले पांच दिनों तक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इस बीच, देश के विभिन्न हिस्सों में बृहस्पतिवार को मानसून एकदम आफत बनकर बरसा। भारी बारिश के कारण हिमाचल प्रदेश के कई जिलों में नदी-नाले उफान पर हैं। वहीं, यूपी और मध्य प्रदेश में बिजली गिरने की अलग-अलग घटनाओं में नौ लोग मारे गए हैं।
मौसम विभाग की तरफ से जारी पूर्वानुमान के मुताबिक, देश का अधिकांश पूर्वी और पूर्वोत्तर क्षेत्र अगले पांच दिनों तक भारी से बेहद भारी बारिश का सामना करेगा। इसमें बंगाल, सिक्किम, असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मणिपुर, ओडिशा और बिहार के क्षेत्र शामिल हैं। पश्चिमी और उत्तर पश्चिमी राज्यों गुजरात, उत्तराखंड और राजस्थान के कुछ इलाकों में भी पांच दिन भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।
हिमाचल में यलो अलर्ट के बीच कई इलाकों में बारिश हुई। भारी बारिश के धर्मपुर-गढ़खल-कसौली सड़क टूट गई है। वहीं, मलबा गिरने से कालका-शिमला एनएच भी बाधित रहा। भारी बारिश से प्रदेश के कई जिलों में नदी-नाले उफान पर हैं। इसी कारण कुल्लू में रिवर राफ्टिंग और पैराग्लाइडिंग रोकनी पड़ी। उधर, मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में बृहस्पतिवार को भारी बारिश के बीच बिजली से तीन लोगों की मौत हो गई। इसी तरह, टीकमगढ़ जिले में बिजली गिरने की घटना में दो लोगों की मौत हो गई। यूपी के बंदायूं में बिजली गिरने से चार लोगों की मौत हो गई।
लुधियाना में 50 साल का रिकॉर्ड टूटा
पंजाब में मानसून के जोरदार रफ्तार पकड़ने के साथ पिछले 24 घंटों में 12 जिलों में जोरदार बारिश हुई। इस दौरान लुधियाना में 50 साल का रिकॉर्ड टूट गया। यहां 5 जुलाई को 82.6 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई। इससे पहले 1972 में पांच जुलाई को 57.5 एमएम बारिश हुई थी।
गोवा में महिला की जान गई
गोवा में भारी बारिश के कारण निचले इलाके के कई घरों में पानी भर गया। इसी बीच, 56 वर्षीय एक महिला की बाढ़ के पानी में बह जाने के कारण मौत हो गई। उधर, केरल में भारी बारिश के कारण कई दिनों से जनजीवन बाधित बना हुआ है।
कुछ हिस्सों में बादल फटने की आशंका
मानसून कम दबाव प्रणाली (एलपीएस) के साथ पश्चिमी विक्षोभ की परस्पर दुर्लभ क्रिया के कारण 8 जुलाई से उत्तर पश्चिम भारत के बड़े क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा हो सकती है और संभवतः बादल फट सकते हैं। अचानक बाढ़ और भूस्खलन भी हो सकता है। पश्चिमी विक्षोभ वायुमंडल की ऊपरी परतों में एक अतिरिक्त उष्णकटिबंधीय तूफान है।
यह उपोष्णकटिबंधीय जेट स्ट्रीम, तेजी से बहने वाली हवाओं का एक बैंड जो पृथ्वी की ओर आता है। इस बार इसकी जद में देश के उत्तर पश्चिम क्षेत्र का बड़ा हिस्सा आ सकता है। दूसरी ओर, निम्न दबाव प्रणाली, कम वायुमंडलीय दबाव का एक क्षेत्र है जो आम तौर पर समुद्र व महासागरों के ऊपर बनता है और वर्षा का कारण बनता है।
डब्ल्यूडी का संकेत
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने अफगानिस्तान और पाकिस्तान पर एक डब्ल्यूडी की उपस्थिति का संकेत दिया। एक कम दबाव प्रणाली है, जो मानसून वर्षा को बढ़ाती है, बंगाल की खाड़ी में बन रही है।
- आईएमडी ने अगले पांच दिनों में उत्तराखंड और पूर्वी राजस्थान में भारी बारिश की चेतावनी दी है, लेकिन इसका असर अधिक व्यापक हो सकता है।
- मानसून गर्त, जो एलपीएस के प्रसार का मार्ग प्रदान करता है वर्तमान में अपनी सामान्य स्थिति के दक्षिण में है। इसलिए यह एलपीएस भारत के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों की ओर जाने की संभावना है। मानसूनी गर्त का अभिप्राय अंतर उष्णकटिबंधीय क्षेत्र से है जो गंगा के मैदानों में होता है।
अब तक का सबसे गर्म रहा इस बार का जून का महीना
इस साल का जून महीना मानव इतिहास का सबसे गर्म जून साबित हुआ। कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस के मुताबिक इस साल जून के महीने का तापमान 1991-2020 के औसत से 0.5 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा, जो कि इससे पहले 2019 का जून महीना सबसे गर्म था।