फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   We are not afraid of false threats: On Bilawal Bhutto statement on Indus Water Treaty Minister CR Patil

Indus Water Treaty: 'हम झूठी धमकियों से नहीं डरते',  बिलावल भुट्टो के बड़बोलेपन पर मंत्री सीआर पाटिल का जवाब

Thu, 26 Jun 2025 02:15 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Thu, 26 Jun 2025 02:15 PM IST
सार

बिलावल भुट्टो ने बड़बोलापन दिखाते हुए संसद में दिए भाषण में सिंधु जल समझौते को निलंबित करने के भारत के फैसले को खारिज कर दिया था। उन्होंने पाकिस्तान के हिस्से का पानी हर हाल में लेने की धमकी दी थी।

विज्ञापन
We are not afraid of false threats: On Bilawal Bhutto statement on Indus Water Treaty Minister CR Patil
CR Patil - फोटो : ANI

विस्तार

सिंधु जल संधि पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने कहा, 'यह फैसला भारत सरकार और प्रधानमंत्री का है। संधि स्थगित होने के बारे में कोई अपडेट नहीं है। जो भी फैसला लिया जाएगा, उससे देश को ही फायदा होगा। संधि पर बिलावल भुट्टो के कथित बयान पर पाटिल ने कहा, 'पानी कहीं नहीं जाएगा, वह जो कहते हैं, वह उनका अपना सवाल है। हम झूठी धमकियों से नहीं डरते।

विज्ञापन


इससे पहले पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी ने बेफिजूल बयान देते हुए कहा था कि यदि भारत सिंधु जल संधि के तहत इस्लामाबाद को पानी का उचित हिस्सा देने से इनकार करता है, तो उनका देश युद्ध की ओर बढ़ेगा। दरअसल, पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले के तुरंत बाद भारत ने 1960 के समझौते को स्थगित कर दिया था। इस हमले में 26 लोग मारे गए थे। गृह मंत्री अमित शाह ने पिछले हफ्ते इस ऐतिहासिक समझौते को कभी बहाल न करने की घोषणा की थी।
विज्ञापन


कब और किसके बीच हुई थी संधि
  • भारत और पाकिस्तान के बीच में सिंधु जल संधि पर 19 सितंबर 1960 को कराची में हस्ताक्षर हुए थे। समझौता सिंधु नदी और इसकी सहायक नदियों के पानी के इस्तेमाल को लेकर हुआ था। 
  • विज्ञापन
    विज्ञापन
  • विश्व बैंक की तरफ से पहल के बाद समझौते करने के लिए भारत-पाकिस्तान के बीच अलग-अलग स्तर पर 9 साल तक बात चली थी। भारत की तरफ से प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान की तरफ से राष्ट्रपति मोहम्मद अयूब खान ने संधि पर हस्ताक्षर किए थे।
क्या है सिंधु जल समझौता?
सिंधु जल समझौता, 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हस्ताक्षरित एक जल-बंटवारा समझौता था। इसमें विश्व बैंक ने मध्यस्थता की थी। इस समझौते का उद्देश्य सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के पानी के उपयोग को लेकर दोनों देशों के बीच विवादों को रोकना था। इस संधि के तहत, हिमालय के सिंधु नदी बेसिन की छह नदियों को दो भागों में बांटा गया था। पूर्वी नदियों ब्यास, रावी और सतलुज का पानी भारत को मिलता था, जबकि पश्चिमी नदियों सिंधु, झेलम और चिनाब का कंट्रोल पाकिस्तान के पास आया था।


अब भारत सिंधु नदी पर बांध बनाकर पानी रोकने के लिए स्वतंत्र
भारत सरकार ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को स्थगित करने का जो फैसला किया था, उससे पाकिस्तान की आर्थिक कमर टूट गई है। दरअसल, समझौता स्थगित होने का यह अर्थ नहीं है कि पाकिस्तान को तत्काल सिंधु नदी का पानी नहीं मिल रहा है, बल्कि इसके तहत भारत पर से अब यह बाध्यता खत्म हो जाएगी कि वह पाकिस्तान को सिंधु के पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करे। भारत भविष्य में सिंधु नदी पर बांध बनाकर पानी रोकने के लिए स्वतंत्र होगा। ऐसा हुआ तो पाकिस्तान के लिए सही मायनों में संकट पैदा होगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed