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Law: 'न्याय कुछ चुनिंदा लोगों का विशेषाधिकार नहीं, बल्कि सभी का अधिकार', बोले उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन

Sun, 29 Mar 2026 09:18 PM IST
Devesh Tripathi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Devesh Tripathi Updated Sun, 29 Mar 2026 09:18 PM IST
सार

उपराष्ट्रपति ने न्याय प्रणाली को आम लोगों के लिए सरल, सुलभ और किफायती बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने तकनीक के इस्तेमाल से कानूनी सेवाओं को व्यापक स्तर तक पहुंचाने की बात कही और बताया कि शुरुआती स्तर पर कानूनी सलाह से विवादों को जल्दी सुलझाया जा सकता है।

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उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन - फोटो : ANI

विस्तार

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने रविवार को देश के सभी नागरिकों के लिए सुलभ, किफायती और समय पर न्याय की आवश्यकता पर जोर दिया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि न्याय सभी का अधिकार है, न कि कुछ चुनिंदा लोगों का विशेषाधिकार। उन्होंने कानून मंत्रालय की टेली-लॉ पहल के तहत समावेशी, प्रौद्योगिकी-संचालित न्याय तक पहुंच का भी आह्वान किया।
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टेली-लॉ पहल और कानूनी सुधारों पर जोर
उपराष्ट्रपति ने दिल्ली में एक राष्ट्रीय परामर्श में भाग लेते हुए हालिया कानूनी सुधारों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नए आपराधिक कानूनों में परिवर्तन, प्रक्रियाओं को सरल बनाकर और दक्षता में सुधार करके एक अधिक नागरिक-केंद्रित न्याय प्रणाली की दिशा में एक ऐतिहासिक बदलाव का प्रतीक है। 
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उन्होंने शासन में प्रौद्योगिकी की परिवर्तनकारी भूमिका को रेखांकित किया, जिसमें प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) और टेलीमेडिसिन जैसी पहलों का उल्लेख किया। उन्होंने टेली-लॉ पहल को कानूनी सेवाओं को लोकतांत्रिक बनाने के लिए एक शक्तिशाली उपकरण बताया।
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पूर्व-मुकदमा कानूनी सलाह का बताया महत्व
उपराष्ट्रपति ने इस बात पर प्रकाश डाला कि मुकदमेबाजी से पहले कानूनी सलाह विवादों को शीघ्र हल करने, अनावश्यक मुकदमेबाजी को कम करने और अदालतों के बोझ को कम करने में मदद कर सकती है। उन्होंने भाषाई समावेशिता के महत्व पर भी जोर दिया और कहा कि संविधान को कई क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध कराने के प्रयासों को रेखांकित किया। उन्होंने समझ और भागीदारी बढ़ाने के लिए स्थानीय भाषाओं में कानूनी परामर्श प्रदान करने का भी आह्वान किया।


आखिरी शख्स तक कानूनी सेवाओं की पहुंच
उपराष्ट्रपति ने विशेष रूप से महिलाओं, ग्रामीण और हाशिए पर पड़े समुदायों के लिए, समाज के आखिरी शख्स तक कानूनी सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए केंद्रित प्रयासों का आग्रह किया। उन्होंने न्याय तक पहुंच का विस्तार करने में जमीनी स्तर पर योगदान देने के लिए पैरा-लीगल स्वयंसेवकों, कॉमन सर्विस सेंटरों, पैनल वकीलों और अन्य हितधारकों की सराहना की।

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