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Vantara: कोल्हापुर से जामनगर पहुंची हथिनी महादेवी पर एनजीओ ने दी सफाई, कहा- कोर्ट के आदेश पर की गई शिफ्टिंग

Mon, 04 Aug 2025 11:31 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शुभम कुमार Updated Mon, 04 Aug 2025 11:31 PM IST
सार

कोल्हापुर के जैन मठ से जमनगर भेजी गई हथिनी महादेवी को लेकर उठे विवाद पर हथिनी को वंतारा भेजने वाली एनजीओ ने अपनी सफाई दी है। एनजीओ ने बताया कि यह ट्रांसफर कोर्ट के आदेश पर हुआ। एनजीओ का कहना है कि महादेवी गंभीर बीमारियों और मानसिक तनाव से जूझ रही थीं। 

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Vantara did not initiate relocation of elephant from Kolhapur to Jamnagar News In Hindi
वनातारा में मौजूद हाथी - फोटो : ANI

विस्तार

महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले के नंदनी गांव में स्थित एक जैन मठ में तीन दशक से रह रही हथिनी महादेवी को हाल ही में गुजरात के जामनगर के वन्यजीव पुनर्वास केंद्र वंतारा में स्थानांतरित किया गया। इस पर जब लोगों की नाराजगी सामने आई और कोल्हापुर में विरोध मार्च निकाला गया, तब हथिनी को वंतारा भेजने वाली संस्था ने इस पूरे मामले पर सफाई दी। एनजीओ ने एक बयान में कहा है कि वंतारा ने महादेवी को अपने केंद्र में लाने की कोई पहल नहीं की थी। वे केवल कोर्ट द्वारा नियुक्त रिसीविंग सेंटर हैं, यानी कोर्ट ने उन्हें सिर्फ यह जिम्मेदारी दी कि वह हाथी को संभालें। एनजीओ ने कहा कि पूरी प्रक्रिया अदालत और सरकारी अधिकारियों की निगरानी में की गई है।

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कोर्ट ने क्यों दिया था आदेश?
बता दें कि बॉम्बे हाई कोर्ट ने बीते 16 जुलाई 2025 को आदेश दिया था कि महादेवी को उनके खराब स्वास्थ्य और मानसिक तनाव को देखते हुए वंतारा में शिफ्ट किया जाए। यह मामला एक एनजीओ द्वारा महाराष्ट्र वन विभाग और सुप्रीम कोर्ट की हाई पावर्ड कमेटी (एचपीसी) के सामने उठाया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने 25 जुलाई को हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा और अब मामला 11 अगस्त को अनुपालन रिपोर्ट के लिए सूचीबद्ध है।
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महादेवी की तबीयत बेहद खराब
वंतारा के मुताबिक, जब महादेवी उनके पास पहुंची, तब वो कई गंभीर बीमारियों से जूझ रही थीं, जैसे पैरों में फंगल संक्रमण (फुट रॉट), गठिया (आर्थराइटिस), नाखूनों की अत्यधिक वृद्धि और मानसिक तनाव से जुड़ा लगातार सिर हिलाना। ये लक्षण अकेलेपन और लंबे समय तक बंधन में रहने के कारण हुए।


अब मिल रही है देखभाल और आजादी
संस्था के अनुसार, महादेवी को अब चेन से मुक्त कर दिया गया है, टूटी हुई हड्डी और नाखून का इलाज किया जा रहा है, और उन्हें स्वस्थ भोजन, खुला स्थान और मानसिक सहारा दिया जा रहा है, ताकि वो धीरे-धीरे शारीरिक और मानसिक रूप से ठीक हो सकें।

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स्थानीय लोगों में नाराजगी
गौरतलब है कि महादेवी को कोल्हापुर से हटाने को लेकर स्थानीय लोगों ने विरोध मार्च भी निकाला, क्योंकि वे इस हथिनी को भावनात्मक रूप से जुड़ा मानते हैं। वंतारा ने इस भावनात्मक जुड़ाव का सम्मान करते हुए कहा कि संस्था ने सिर्फ अदालत के आदेश का पालन किया है।

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