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Mahadevi Elephant: कोल्हापुर की 'महादेवी' हथिनी को वनतारा से वापस लाने की मांग तेज, लोगों ने किया मौन मार्च

Sun, 03 Aug 2025 03:45 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: हिमांशु चंदेल Updated Sun, 03 Aug 2025 03:45 PM IST
सार

कोल्हापुर में हजारों लोगों ने हथिनी महादेवी को वनतारा से वापस लाने की मांग को लेकर मौन मार्च किया। महादेवी को बॉम्बे हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जामनगर भेजा गया था। जनता, स्थानीय नेता और सांसद इसके विरोध में हैं। 

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Mahadevi Elephant Demand to bring back from Vantara intensifies people held silent march mp mla meet ministers
वनातारा में मौजूद हाथी। - फोटो : ANI

विस्तार

कोल्हापुर में एक अनोखा और भावुक दृश्य देखने को मिला। 36 वर्षीय हथिनी 'महादेवी' को गुजरात के वनतारा सेंटर से वापस लाने के लिए हजारों लोग हाथों में तख्तियां लिए सड़कों पर उतरे। मांग को लेकर हजारों लोगों ने मौन मार्च किया। यह मार्च पूर्व सांसद राजू शेट्टी के नेतृत्व में नंदनी से शुरू होकर जिलाधिकारी कार्यालय तक पहुंचा, जहां प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया।
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दरअसल, महादेवी को हाल ही में बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के बाद वनतारा वाइल्डलाइफ रेस्क्यू और रिहैबिलिटेशन सेंटर भेजा गया। अदालत का यह फैसला एनजीओ की उस शिकायत के बाद आया, जिसमें दावा किया गया कि महादेवी मानसिक और शारीरिक रूप से बेहद कष्ट में है। सुप्रीम कोर्ट ने भी हाई कोर्ट के इस फैसले को 25 जुलाई को बरकरार रखा। महादेवी को 1992 में कर्नाटक से लाकर कोल्हापुर के श्री जिनसेन भट्टारक जैन मठ में रखा गया था।
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सांसद और विधायक भी कूदे मैदान में
महादेवी की विदाई के बाद से ही कोल्हापुर में भारी जनभावना उमड़ी है। भाजपा सांसद धनंजय महाडिक और शिवसेना के सांसद धैर्यशील माने केंद्र सरकार से अपील कर रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर महादेवी को वापस लाने की अनुमति ली जाए। महाडिक ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव से भी इस सिलसिले में मुलाकात की और ज्ञापन सौंपा। स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने भी वनतारा अधिकारियों के साथ बैठक कर हथिनी को वापस लाने के प्रयासों की जानकारी दी।
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कोर्ट का आदेश था, सरकार का कोई दखल नहीं- फडणवीस
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस मामले को लेकर कहा कि सरकार पर लगे आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि हाथी के तबादले पर सरकार ने कोई निर्णय नहीं लिया। यह मामला बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका के जरिए पहुंचा था, जिसमें हाई पावर्ड कमेटी बनाई गई थी। फडणवीस के अनुसार, कमेटी ने रिपोर्ट दी कि राज्य में कोई हाथी अभ्यारण्य नहीं है। इसके आधार पर हाईकोर्ट ने हाथी को वंतारा भेजने का आदेश दिया, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा। उन्होंने कहा कि सरकार की इसमें कोई भूमिका नहीं है, लेकिन श्रद्धालुओं की भावना को समझते हुए इस मुद्दे पर मंगलवार को विधायकों के साथ बैठक बुलाई गई है।



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महादेवी की हालत पर वनतारा का दावा
महादेवी के बारे में कहा गया है कि वह पैरों में सड़न (फुट रॉट), गठिया और मानसिक तनाव जैसे गंभीर समस्याओं से जूझ रही थी। अकेलेपन के चलते उसके व्यवहार में भी लगातार सिर हिलाने जैसे लक्षण दिख रहे थे। वनतारा ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट में लिखा कि वे महादेवी की देखभाल बेहद सहानुभूति और समझ के साथ कर रहे हैं, और उसे वहां धीरे-धीरे नई जिंदगी में ढालने की कोशिश हो रही है।


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सड़कों से सोशल मीडिया तक जनता का विरोध
कोल्हापुर की जनता सिर्फ सड़कों पर ही नहीं, मोबाइल नेटवर्क और सोशल मीडिया पर भी विरोध कर रही है। स्थानीय नेताओं के मुताबिक, बड़ी संख्या में लोग अपनी जियो मोबाइल सेवा को बंद करवा रहे हैं, क्योंकि वनतारा रिलायंस समूह की परियोजना है। कांग्रेस के विधान पार्षद सतेज पाटिल ने बताया कि दो लाख से अधिक लोग महादेवी को वापस लाने के लिए फॉर्म भर चुके हैं, जिन्हें राष्ट्रपति कार्यालय को भेजा जाएगा।

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क्या है वनतारा?
वनतारा सेंटर जामनगर में करीब 3,000 एकड़ में फैला हुआ है और इसे रिलायंस ने विकसित किया है। यहां जानवरों को हाइड्रोथेरेपी, विशेषज्ञ पशुचिकित्सकों की निगरानी और सामाजिक वातावरण मिलता है। हालांकि, कोल्हापुर की जनता यह मानने को तैयार नहीं कि महादेवी के लिए यह स्थान उसके मठ से बेहतर है। यह मामला अब कानूनी आदेश और जनभावनाओं के बीच संतुलन की चुनौती बन चुका है।


 
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