जानें क्या है जीएसपी कार्यक्रम, अमेरिका के कदम का भारत पर क्या होगा असर
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ये फैसला लिया है कि वह भारत का नाम उन देशों की सूची से बाहर कर देंगे, जो सामान्य कर-मुक्त प्रावधानों (जीएसपी) कार्यक्रम का लाभ उठा रहे हैं। यह लाभ उन उत्पादों पर उठाया जाता है जिनका निर्यात अमेरिका को किया जाता है। अमेरिका के कानून के अनुसार ये बदलाव अधिसूचना जारी होने के दो महीने बाद से लागू हो जाएगा।
ट्रंप प्रशासन के इस फैसले पर वाणिज्यिक सचिव अनूप वाधवान का कहना है कि जीएसपी के लाभ अपेक्षाकृत कम थे। भारत सरकार को हमारे विकास और लोक कल्याणकारी हितों के प्रति सचेत रहना होगा। हमारी कोशिश है कि जनकल्याण से समझौता किए बिना चिकित्सा उपकरणों की सस्ती कीमतों को संतुलित बनाकर रखा जाए। हमारे अमेरिका से बहुत गहरे रिश्ते हैं।
उन्होंने कहा, 'जीएसपी के लाभार्थी की उपाधि वापस लेने से भारत के अमेरिका में निर्यात पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं पड़ेगा। भारत जीएसपी के तहत कच्चे माल और ऐसे सामान का निर्यात करता है जो अमेरिका के लिए लाभकारी है। व्यापार से संबंधी सभी मुद्दों पर बातचीत की जा रही है। हम चिकित्सा उपकरणों की सामर्थ्य से कोई समझौता नहीं करेंगे।'
वाधवान ने कहा, 'अमेरिका 60 दिनों के अंदर जीएसपी को खत्म कर देगा। अमेरिका के साथ हमारे रिश्ते मजबूत बने रहेंगे और हम उससे बातचीत करेंगे। हमारा आंकलन है कि इससे अमेरिका के 40 हजार करोड़ रुपये के निर्यात पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं पड़ेगा।'
क्या है जीएसपी कार्यक्रम
जाएसपी सूची में शामिल देशों के हजारों उत्पादों को अमेरिका में कर-मुक्त छूट की अनुमति देकर आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए लाया गया था। ट्रंप का कहना है कि उन्होंने ये फैसला इसलिए लिया है क्योंकि उन्हें भारत से ये आश्वासन नहीं मिल पाया है कि वह अपने बाजार में अमेरिकी उत्पादों को बराबर की छूट देगा। उनका कहना है कि भारत में पाबंदियों की वजह से उसे व्यापारिक नुकसान हो रहा है। भारत जीएसपी के मापदंड पूरे करने में नाकाम रहा है। बीते साल अमेरिका ने अप्रैल में जीएसपी के लिए तय शर्तों की समीक्षा शुरू की थी।