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संसद हंगामा: अपनी कहो सरकार की मत सुनो की विपक्ष ने बनाई रणनीति
हिमांशु मिश्र/ नई दिल्ली
Updated Thu, 24 Nov 2016 11:04 PM IST
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सरकार ने गुरूवार को सर्वदलीय बैठक तो विपक्ष को सियासी जाल में उलझाने के लिए बुलाई थी, मगर विपक्ष के जवाबी चाल में खुद उलझ कर रह गई। सरकार की रणनीति भांप विपक्ष ने न सिर्फ बैठक का बहिष्कार किया, बल्कि अपनी सुनाओ और सरकार की मत सुनो की रणनीति बना कर सरकार की घेरेबंदी कर दी। यही कारण है कि राज्यसभा में बहुमत के दम पर विपक्ष ने गुरूवार को तो सरकार को नोट बंदी पर जम कर खरी खरी सुनाई, मगर हंगामे का सहारा ले कर प्रधानमंत्री को जवाबी पलटवार का मौका नहीं दिया।
चूंकि लोकसभा में विपक्ष अल्पमत है। ऐसे में सरकार पलटवार के लिए इस सदन का इस्तेमाल न कर सके। इससे बचने के लिए विपक्ष ने लोकसभा की कार्यवाही ही नहीं चलने दी। अब सोमवार को विपक्ष का नोट बंदी के फैसले के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन की योजना है। ऐसे में शीत सत्र में इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच चल रही रस्साकसी जारी रहने के आसार हैं।
दरअसल विपक्ष पर चर्चा से भागने का आरोप चस्पा करने के लिए सरकार ने बुधवार शाम अचानक सर्वदलीय बैठक बुलाने की घोषणा कर दी थी। सरकार की रणनीति थी कि वह विपक्ष के सामने राज्यसभा में चर्चा के दौरान पीएम के हस्तक्षेप करने का प्रस्ताव देगा। प्रस्ताव स्वीकार न करने पर विपक्ष पर चर्चा से भागने का आरोप चस्पा हो जाएगा। मगर विपक्षी दलों ने सरकार की सियासी चाल को भांपते हुए एकजुट हो कर बैठक के बहिष्कार की घोषणा कर दी।
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करीब एक दर्जन विपक्षी दलों के नेताओं की बैठक में ही योजना बनी कि राज्यसभा में जारी चर्चा को आगे बढ़ाने पर सहमति तो दी जाए, मगर इस दौरान इसका ध्यान रखा जाए कि सरकार को बोलने का मौका ना मिले। इसी बैठक में लोकसभा की कार्यवाही पूर्व की तरह ही ठप करने की योजना बनी।
अभी नहीं बदलेंगे हालात
नोट बंदी पर जारी सियासी रस्साकसी फिलहाल जारी रहेगी। चूंकि विपक्ष ने राज्यसभा में नोट बंदी पर अपनी बात रख दी है। ऐसे में उसकी योजना शुक्रवार को भी कार्यवाही ठप करने की है। फिर सोमवार को चूंकि एकजुट विपक्ष का देशव्यापी विरोध प्रदर्शन है। ऐसे में इस दिन भी कार्यवाही के चलने के आसार कम हैं।
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चूंकि लोकसभा में विपक्ष अल्पमत है। ऐसे में सरकार पलटवार के लिए इस सदन का इस्तेमाल न कर सके। इससे बचने के लिए विपक्ष ने लोकसभा की कार्यवाही ही नहीं चलने दी। अब सोमवार को विपक्ष का नोट बंदी के फैसले के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन की योजना है। ऐसे में शीत सत्र में इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच चल रही रस्साकसी जारी रहने के आसार हैं।
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दरअसल विपक्ष पर चर्चा से भागने का आरोप चस्पा करने के लिए सरकार ने बुधवार शाम अचानक सर्वदलीय बैठक बुलाने की घोषणा कर दी थी। सरकार की रणनीति थी कि वह विपक्ष के सामने राज्यसभा में चर्चा के दौरान पीएम के हस्तक्षेप करने का प्रस्ताव देगा। प्रस्ताव स्वीकार न करने पर विपक्ष पर चर्चा से भागने का आरोप चस्पा हो जाएगा। मगर विपक्षी दलों ने सरकार की सियासी चाल को भांपते हुए एकजुट हो कर बैठक के बहिष्कार की घोषणा कर दी।
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करीब एक दर्जन विपक्षी दलों के नेताओं की बैठक में ही योजना बनी कि राज्यसभा में जारी चर्चा को आगे बढ़ाने पर सहमति तो दी जाए, मगर इस दौरान इसका ध्यान रखा जाए कि सरकार को बोलने का मौका ना मिले। इसी बैठक में लोकसभा की कार्यवाही पूर्व की तरह ही ठप करने की योजना बनी।
अभी नहीं बदलेंगे हालात
नोट बंदी पर जारी सियासी रस्साकसी फिलहाल जारी रहेगी। चूंकि विपक्ष ने राज्यसभा में नोट बंदी पर अपनी बात रख दी है। ऐसे में उसकी योजना शुक्रवार को भी कार्यवाही ठप करने की है। फिर सोमवार को चूंकि एकजुट विपक्ष का देशव्यापी विरोध प्रदर्शन है। ऐसे में इस दिन भी कार्यवाही के चलने के आसार कम हैं।