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Karnataka: 'सेमीकंडक्टर क्षेत्र में प्रगति कर रहा देश, तैयार किया जा रहा पारिस्थितिकी तंत्र', वैष्णव का बयान
Sat, 07 Feb 2026 04:00 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू।
Published by: निर्मल कांत
Updated Sat, 07 Feb 2026 04:00 PM IST
सार
Karnataka: केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि भारत में सेमीकंडक्टर के डिजाइन से लेकर उत्पादन तक की प्रक्रिया के लिए भारत में एक पारिस्थितिकी तंत्र तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि देश की तकनीकी क्षमता मजबूत हुई है। सेमीकंडक्टर मिशन 20 को लेकर मंत्री ने क्या कहा, पढ़िए रिपोर्ट-
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केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव
- फोटो : एक्स/एएनआई/वीडियो ग्रैब
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विस्तार
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत सेमीकंडक्टर क्षेत्र में बड़ी प्रगति कर रहा है। देश में पूरा सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकीतंत्र (इकोसिस्टम) तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा, मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि आज क्वालकॉम (अमेरिकी बहुराष्ट्रीय सेमीकंडक्टर और दूरसंचार उपकरण कंपनी) में दो नैनोमीटर वेफर और दो नैनोमीटर चिप पेश की गई है। इससे पहले एएमडी भी ऐसा कर चुकी है।
'कंपनियां भारत में कर रही उत्पाद का डिजाइन'
वैष्णव ने कहा, अब कंपनियां भारत में पूरा एंड-टू-एंड उत्पाद खुद डिजाइन कर रही हैं। पहले ज्यादातर काम सहायक का होता था। अब पूरी प्रक्रिया भारत में हो रही है, इसमें ग्राहक की जरूरत तय करने से लेकर चिप की अंतिम जांच शामिल है। यह हमारे देश और उद्योग के लिए बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने क्वालकॉम की पूरी टीम को बधाई दी।
सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 को लेकर वैष्णव ने क्या कहा?
ये भी पढ़ें: हिमाचल सरकार के 45 मामले वाली याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार सुप्रीम कोर्ट, जारी किया नोटिस
सिलिकॉन वेफर को लेकर क्या बताया?
सिलिकॉन की पतली चकती (वेफर) दिखाते हुए मंत्री ने कहा, यह वह वेफर है, जिसमें हर हिसके हर हिस्से में 20 से 30 अरब ट्रांजिस्टर होते हैं। हर छोटा चौकोर हिस्सा एक अलग इकाई होता है। इसी घनत्व से चिप का डिजाइन किया जाता है। यह मूल रूप से एक एकल (सिंगल) चिप है, जिसमें जीपीयू (ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट) और सीपीयू (सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट) दोनो हैं। इससे जो अंतिम उत्पाद बनता है, वह इस तरह का एक मॉड्यूल होता है, जिससे एक व्यक्ति का डेस्कटॉप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) वाला कंप्यूटर बन जाता है। यह कैमरा, राउटर और मशीनों में भी लगाया जासकता है। कार, ट्रेन और हवाई जहाज में भी इसका इस्तेमाल हो सकता है।
सेमीकंडक्टर मिशन 1.0 को लेकर मंत्री ने क्या कहा?
उन्होंने बताया कि सेमीकॉन मिशन 1.0 के तहत प्रतिभाओं को तैयार किया गया है। दस साल में 85 हजार लोगों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य था। चार साल में 67 हजार इंजीनियर तैयार हो चुके हैं। यह पढ़ाई अब 315 कॉलेज और विश्वविद्यालयों में हो रही है। छात्र खुद चिप डिजाइन कर रहे हैं। अंतिम उत्पाद की जांच भी की जा रही है। दुनिया के बहुत कम देशों में ऐसी व्यवस्था है।
उन्होंने कहा कि दावोस में उद्योग जगत की हस्तियों ने इस मॉडल की सराहना की। उनका मानना है कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में प्रतिभाओं की बड़ी कमी है। इस कमी को भारत की प्रतिभाएं पूरा करेंगी। हालिया बजट में सूचना प्रौद्योगिकी सेवा क्षेत्र को आसान बनाया गया है। कानूनी प्रक्रियाओं को सरल किया गया है। अब उद्योग भारत में बड़े स्तर पर आना चाहता है। आने वाले समय में और तेज प्रगति होगी।
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'कंपनियां भारत में कर रही उत्पाद का डिजाइन'
वैष्णव ने कहा, अब कंपनियां भारत में पूरा एंड-टू-एंड उत्पाद खुद डिजाइन कर रही हैं। पहले ज्यादातर काम सहायक का होता था। अब पूरी प्रक्रिया भारत में हो रही है, इसमें ग्राहक की जरूरत तय करने से लेकर चिप की अंतिम जांच शामिल है। यह हमारे देश और उद्योग के लिए बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने क्वालकॉम की पूरी टीम को बधाई दी।
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सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 को लेकर वैष्णव ने क्या कहा?
- केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि जल्द ही सेमीकॉन मिशन 2.0 शुरू किया जाएगा। इसकी घोषणा बजट में की गई थी।
- उन्होंने कहा, हम सबसे पहले डिजाइन को प्राथमिकता देंगे। उसके बाद उपकरण और सामग्री पर काम करेंगे।
- मंत्री ने कहा कि प्रतिभाओं को अगले स्तर पर ले जाना हमारा अगला लक्ष्य होगा, जहां एक छात्र पूरे प्रणाली को डिजाइन करने की गहरी क्षमता विकसित कर सके।
- उन्होंने बताया कि अधिक फैक्ट्रियां और पैकेजिंग इकाइयां लाना भी काम का हिस्सा होगा।
- उन्होंने बताया कि अभी भारत 28 नैनोमीटर तकनीक पर है। सेमीकॉन मिशन 2.0 के अगले संस्करण के हिस्से में सात नैनोमीटर तक पहुंचने का लक्ष्य है। इसे हम अगले कुछ महीनों में अंतिम रूप दे पाएंगे। यह यात्रा का एक और शानदार अध्याय होगा।
- वैष्णव ने कहा कि यह एक लंबी, कई दशकों की यात्रा है। प्रधानमंत्री ने कहा है कि देश के लिए 20 साल का रोडमैप तैयार किया जाना चाहिए, ताकि इस उद्योग में देश लंबे समय तक विकास करता रहे।
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सिलिकॉन वेफर को लेकर क्या बताया?
सिलिकॉन की पतली चकती (वेफर) दिखाते हुए मंत्री ने कहा, यह वह वेफर है, जिसमें हर हिसके हर हिस्से में 20 से 30 अरब ट्रांजिस्टर होते हैं। हर छोटा चौकोर हिस्सा एक अलग इकाई होता है। इसी घनत्व से चिप का डिजाइन किया जाता है। यह मूल रूप से एक एकल (सिंगल) चिप है, जिसमें जीपीयू (ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट) और सीपीयू (सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट) दोनो हैं। इससे जो अंतिम उत्पाद बनता है, वह इस तरह का एक मॉड्यूल होता है, जिससे एक व्यक्ति का डेस्कटॉप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) वाला कंप्यूटर बन जाता है। यह कैमरा, राउटर और मशीनों में भी लगाया जासकता है। कार, ट्रेन और हवाई जहाज में भी इसका इस्तेमाल हो सकता है।
सेमीकंडक्टर मिशन 1.0 को लेकर मंत्री ने क्या कहा?
उन्होंने बताया कि सेमीकॉन मिशन 1.0 के तहत प्रतिभाओं को तैयार किया गया है। दस साल में 85 हजार लोगों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य था। चार साल में 67 हजार इंजीनियर तैयार हो चुके हैं। यह पढ़ाई अब 315 कॉलेज और विश्वविद्यालयों में हो रही है। छात्र खुद चिप डिजाइन कर रहे हैं। अंतिम उत्पाद की जांच भी की जा रही है। दुनिया के बहुत कम देशों में ऐसी व्यवस्था है।
उन्होंने कहा कि दावोस में उद्योग जगत की हस्तियों ने इस मॉडल की सराहना की। उनका मानना है कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में प्रतिभाओं की बड़ी कमी है। इस कमी को भारत की प्रतिभाएं पूरा करेंगी। हालिया बजट में सूचना प्रौद्योगिकी सेवा क्षेत्र को आसान बनाया गया है। कानूनी प्रक्रियाओं को सरल किया गया है। अब उद्योग भारत में बड़े स्तर पर आना चाहता है। आने वाले समय में और तेज प्रगति होगी।
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