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SC Updates: हिमाचल सरकार के 45 मामले वाली याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार सुप्रीम कोर्ट, जारी किया नोटिस

Sat, 07 Feb 2026 01:34 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शुभम कुमार Updated Sat, 07 Feb 2026 01:34 PM IST
सार

हिमाचल प्रदेश में विधायकों और सांसदों से जुड़े 45 आपराधिक मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम कदम उठाया है। कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की याचिका पर नोटिस जारी किया है। ये मामले कोरोना काल की रैलियों से जुड़े हैं। अगली सुनवाई 16 मार्च को होगी।

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Supreme Court Updates ready to hear the petition filed by the Himachal Pradesh government News In Hindi
सुप्रीम कोर्ट (फाइल तस्वीर) - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश सरकार की उस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दे दी है, जिसमें राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के एक आदेश को चुनौती दी है। यह आदेश विधायकों और सांसदों से जुड़े 45 आपराधिक मामलों को वापस लेने से रोकने से जुड़ा है। इन मामलों में वे केस भी शामिल हैं, जो कोरोना काल के दौरान रैलियां करने पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ पिछली भाजपा सरकार के समय दर्ज किए गए थे। मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी कर दिया है और अगली सुनवाई की तारीख 16 मार्च तय की है।

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बता दें कि हिमाचल हाईकोर्ट ने 26 अप्रैल 2024 को फैसला सुनाते हुए कहा था कि राज्य सरकार 65 मामलों में से केवल 15 मामलों को ही वापस ले सकती है। बाकी मामलों को वापस लेने की अनुमति नहीं दी गई थी। हाई कोर्ट ने यह भी बताया कि जिन 65 मामलों को वापस लेने की सिफारिश की गई थी, उनमें से 5 मामलों का निपटारा पहले ही हो चुका है, जिनमें मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से जुड़ा एक मामला भी शामिल है।
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राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में क्या कहा?

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील वी गिरि ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि सभी मामलों को जनहित में वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि यह फैसला पब्लिक प्रॉसिक्यूटर, जिला वकीलों, जिलाधीश और पुलिस अधिकारियों से सलाह लेकर किया गया है।

कौन-कौन से मामले वापस लेने से रोका गया?
हाई कोर्ट ने IPC की धाराओं 269 (बीमारी फैलने का खतरा), 353 (सरकारी कर्मचारी पर हमला), 504 (जानबूझकर अपमान), 506 (धमकी), और राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम व आपदा प्रबंधन कानून से जुड़े मामलों को वापस लेने से मना किया था।

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कानूनी वजह क्या बताई गई?

हाई कोर्ट ने कहा कि भले ही CrPC की धारा 321 के तहत पहले अनुमति जरूरी नहीं थी, लेकिन 2020 में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद अब विधायकों और सांसदों से जुड़े मामलों में कोर्ट की अनुमति जरूरी है।सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि केस वापस लेने का फैसला राजनीतिक वजहों से नहीं, बल्कि सच्चे जनहित में और ईमानदारी से होना चाहिए। 

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