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चिंताजनक: यूरोप-मध्य एशिया में गर्मी की चपेट में नौ करोड़ बच्चे, बढ़ता तापमान सालाना 377 बच्चों की ले रहा जान

Sat, 27 Jul 2024 05:12 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Sat, 27 Jul 2024 05:12 AM IST
सार

यूनिसेफ की इस नई रिपोर्ट के अनुसार क्षेत्र में गर्मी का कहर सालाना 377 बच्चों की जान ले रहा है। इस रिपोर्ट का आधार यूरोप और मध्य एशिया के 23 देशों से जुड़े आंकड़ों के विश्लेषण पर आधारित है।

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UNICEF report nine crore children in Europe and Central Asia grip of heat
गर्मी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यूरोप और मध्य एशिया में 9.2 करोड़ बच्चे लू और गर्म हवाओं की चपेट में हैं। यह संख्या इस क्षेत्र के बच्चों की आबादी के हिसाब से आधे से भी ज्यादा है। यूनिसेफ की इस नई रिपोर्ट के अनुसार क्षेत्र में गर्मी का कहर सालाना 377 बच्चों की जान ले रहा है। इस रिपोर्ट का आधार यूरोप और मध्य एशिया के 23 देशों से जुड़े आंकड़ों के विश्लेषण पर आधारित है।

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‘बीट द हीट : चाइल्ड हेल्थ एमिड हीटवेव्स इन यूरोप एंड सेंट्रल एशिया’ नामक इस रिपोर्ट के अनुसार मरने वालों में से आधे बच्चे अपना पहला जन्मदिवस भी नहीं मना पाए। इनकी मौत की वजह भीषण गर्मी और उससे जुड़ी बीमारियां थीं। इनमें से ज्यादातर मौतें गर्मियों के दौरान हुईं। यह वह क्षेत्र है जहां तापमान दुनिया के अन्य हिस्सों की तुलना में कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है।
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बच्चों में जन्म से पहले ही गंभीर प्रभाव
यूनिसेफ के अनुसार गर्मी के संपर्क में आने से बच्चों में जन्म से पहले ही गंभीर प्रभाव पड़ रहे हैं। इसमें समय से पहले जन्म, जन्म के समय कम वजन, मृत बच्चों का जन्म या जन्मजात विसंगतियां होती हैं। इतना ही नहीं गर्मी की वजह से होने वाला तनाव सीधे तौर पर मृत्यु की वजह बन रहा है। इसकी वजह से शिशु का विकास प्रभावित हो रहा है और उनमें अनेक बीमारियां घर कर रही हैं।
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थोड़ी सी गर्मी भी बच्चों के लिए जानलेवा
यूनिसेफ की क्षेत्रीय निदेशक रेजिना डी डोमिनिकिस का कहना है कि बढ़ता तापमान विशेष रूप से छोटी उम्र के बच्चों में स्वास्थ्य सम्बन्धी गंभीर समस्याएं पैदा कर रहा है। थोड़े समय के लिए भी भीषण गर्मी का संपर्क बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। इसलिए संबंधित क्षेत्र की सरकारों को इस दिशा में तेजी से कदम उठाने चाहिए।

यूरोपीय बच्चे भी आ रहे गर्मी की चपेट में
रिपोर्ट के अनुसार बढ़ती गर्मी का कहर अब भारत जैसे देशों तक ही सीमित नहीं है। यूरोप में भी यह बड़े पैमाने पर बच्चों को प्रभावित कर रहा है। ऐसे में यूनिसेफ ने यूरोप और मध्य एशियाई देशों के साथ यूरोपीय देशों से गर्मी से बचाव की कार्य योजनाओं और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश का आग्रह किया है, ताकि गर्मी का शिकार बच्चों को पर्याप्त सहायता दी जा सके।

  • 2024 में बढ़ता तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। इस साल के सारे महीने जलवायु इतिहास के अब तक के सबसे गर्म महीने रहे हैं।

वहीं लगातार 13 महीनों में से कोई भी महीना ऐसा नहीं रहा जब बढ़ते तापमान ने रिकॉर्ड न बनाया हो। यूनिसेफ का कहना है कि इन हालातों को देखते हुए गर्मी प्रभावित देशों को पहले से  ही सतर्क हो जाना चाहिए। इसके साथ ही यूनिसेफ ने गर्मी से बचाव के लिए चेतावनी प्रणाली, खेल के मैदानों को ठंडा रखने की व्यवस्था करने और पेयजल में निवेश करने का भी आह्वान किया है। इन उपायों में विशेष रूप से गर्मी के प्रभावों को कम करने के लिए रणनीतियां तैयार करना शामिल है।

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