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UNESCO: मध्याह्न भोजन से स्कूलों में लड़कियों और वंचित वर्गों की उपस्थिति बढ़ी, 8 राज्यों में मिल रहा खाना

Mon, 21 Apr 2025 04:40 AM IST
दीपक कुमार शर्मा एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Mon, 21 Apr 2025 04:40 AM IST
सार

यूनेस्को की ग्लोबल एजुकेशन रिपोर्ट के मुताबिक, एक आकलन में पाया गया कि भारत के आठ राज्यों के 95% से अधिक ग्रामीण स्कूलों में मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। वहीं, तीन राज्यों में ऐसे स्कूलों की संख्या 50 फीसदी से कम है। राष्ट्रीय स्तर पर चलाए जा रहे इस कार्यक्रम का एक बड़ा हिस्सा जनता की तरफ से दिए जाने वाले दो फीसदी शिक्षा कर से आता है।

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UNESCO report: Midday meals in India increase school attendance of girls and underprivileged classes
मिड-डे मिल (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यूनेस्को की एक नई रिपोर्ट में जलवायु परिवर्तन, वैश्विक संघर्ष और अस्थिरता के कारण बढ़ती खाद्य सुरक्षा चुनौतियों के बीच पोषणयुक्त भोजन की उपलब्धता को शिक्षा के लिए बेहद जरूरी बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, दुनियाभर में चल रहे पांच से चार स्कूल मील कार्यक्रमों का उद्देश्य शिक्षा को बढ़ावा देने से जुड़ा है। भारत के संदर्भ में इसमें बताया गया है कि मध्यान्ह भोजन योजना से स्कूलों में लड़कियों और वंचित वर्गों की उपस्थिति पर काफी सकारात्मक असर पड़ा है।

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यूनेस्को की ग्लोबल एजुकेशन रिपोर्ट के मुताबिक, एक आकलन में पाया गया कि आठ राज्यों के 95% से अधिक ग्रामीण स्कूलों में मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। वहीं, तीन राज्यों में ऐसे स्कूलों की संख्या 50 फीसदी से कम है। राष्ट्रीय स्तर पर चलाए जा रहे इस कार्यक्रम का एक बड़ा हिस्सा जनता की तरफ से दिए जाने वाले दो फीसदी शिक्षा कर से आता है। यह रिपोर्ट लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन की अगुवाई वाले स्कूल स्वास्थ्य एवं पोषण अनुसंधान कंसोर्टियम के साथ मिलकर तैयार की गई है।
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2022 की दूसरी छमाही में केवल 18% स्कूलों ने दी रिपोर्ट
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में स्कूलों में बच्चों को सही समय पर और पोषक भोजन सुनिश्चित करने के लिए जारी इस योजना की ऑनलाइन रियल टाइम निगरानी की व्यवस्था है लेकिन दैनिक रिपोर्टिंग अब तक अपेक्षित स्तर पर नहीं पहुंच पाई है। 2022 की दूसरी छमाही में केवल 18% स्कूलों ने इस बारे में रिपोर्ट दी। रिपोर्ट यह भी बताती है कि केवल 60 प्रतिशत देशों में ही स्कूलों में भोजन और पेय पदार्थों को विनियमित करने वाले कानून और मानक लागू हैं।

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केवल 93 देशों में स्कूल भोजन और पेय पदार्थों पर कानून
रिपोर्ट के मुताबिक, 187 देशों में से केवल 93 यानी 60 फीसदी में ही स्कूल के भोजन और पेय पदार्थों पर कानून, अनिवार्य मानक या निर्देश लागू हैं। हालांकि, इन 93 देशों में से केवल 29 प्रतिशत ने स्कूलों में खाद्य और पेय पदार्थों की मार्केटिंग को प्रतिबंधित करने के उपाय किए हैं।

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