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Hindi News ›   India News ›   Uddhav Thackeray demands reservation for Marathas and OBCs during special session of Parliament

Politics: उद्धव ने संसद के विशेष सत्र के दौरान मराठा-OBC को आरक्षण देने की मांग की, कांग्रेस ने भी किया समर्थन

Sat, 02 Sep 2023 07:29 PM IST
देव कश्यप पीटीआई, मुंबई।
पीटीआई, मुंबई। Published by: देव कश्यप Updated Sat, 02 Sep 2023 07:29 PM IST
सार

पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा, मैंने संसद का विशेष सत्र बुलाने के सरकार के फैसले की निंदा की थी। लेकिन मैं इसका स्वागत करता हूं, लेकिन पहले इस विशेष सत्र में मराठा, धनगर (गडरिया समुदाय) और ओबीसी को आरक्षण दीजिए।

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Uddhav Thackeray demands reservation for Marathas and OBCs during special session of Parliament
उद्धव ठाकरे। - फोटो : ANI (फाइल फोटो)

विस्तार

शिवसेना (यूबीटी) अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने शनिवार को मांग की कि केंद्र सरकार संसद के आगामी विशेष सत्र में मराठा और अन्य पिछड़ा वर्गों (ओबीसी) को आरक्षण देने के लिए विधेयक पारित करे।ठाकरे की यह मांग मराठा आरक्षण को लेकर महाराष्ट्र के जालना में चल रहे प्रदर्शन के शुक्रवार को हिंसक हो जाने के एक दिन बाद आई है। शिवसेना (यूबीटी) कार्यकर्ताओं को यहां संबोधित करते हुए ठाकरे ने महाराष्ट्र के जालना में शुक्रवार शाम को मराठा आरक्षण की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किए जाने को ‘सरकार की क्रूरता’ करार देते हुए उसकी आलोचना की।।

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उन्होंने सवाल किया, किसी के निर्देश के बिना पुलिस कैसे ऐसा व्यवहार कर सकती है? उन्होंने कहा कि वह प्रदर्शनकारियों से मिलने के लिए जालना जाएंगे। पुलिस ने शुक्रवार को औरंगाबाद से लगभग 75 किलोमीटर दूर अंबाद तहसील में धुले-सोलापुर रोड पर अंतरवाली सारथी गांव में हिंसक भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया था और आंसू गैस के गोले छोड़े थे। अधिकारियों ने बताया कि मनोज जारांगे के नेतृत्व में प्रदर्शनकारी मंगलवार से ही गांव में मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की मांग को लेकर भूख हड़ताल कर रहे थे। उन्होंने बताया कि स्थिति तब बिगड़ी जब डॉक्टरों की सलाह पर पुलिस ने जारांगे को अस्पताल में भर्ती कराने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने अस्पताल ले जाने से मना कर दिया।
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राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (संशोधन) अधिनियम-2023 का जिक्र करते हुए ठाकरे ने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के खिलाफ फैसला दिया, तो उसने संसद में एक कानून पारित कर दिया। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, मैंने संसद का विशेष सत्र बुलाने के सरकार के फैसले की निंदा की थी। लेकिन अब मैं इसका स्वागत करूंगा, लेकिन पहले इस विशेष सत्र में मराठा, धनगर (गड़रिया समुदाय) और ओबीसी को आरक्षण दीजिए।
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उन्होंने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और अजीत पवार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार में से किसी के पास जालना में आंदोलनकारियों से मिलने का समय नहीं है।ठाकरे ने केंद्र को हिंदू विरोधी करार दिया क्योंकि उनके मुताबिक केंद्र ने 18 से 22 सितंबर को गणेश उत्सव के दौरान संसद का सत्र बुलाया है। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि जो लोग परिवार व्यवस्था में विश्वास नहीं रखते उन्हें दूसरों के परिवार के बारे में बात नहीं करनी चाहिए।

ठाकरे ने कहा, परिवार व्यवस्था हिंदू परंपरा है। पहले अपने परिवार को संभालें और फिर दूसरों के परिवारों के बारे में बात करें। शुक्रवार को मुंबई में 'इंडिया' गुट की तीसरी बैठक की समाप्ति के बाद ठाकरे ने कहा था कि विपक्षी गठबंधन "मित्र परिवारवाद" से लड़ेगा और उसे हराएगा।

वडेट्टीवार ने मराठा आरक्षण के मुद्दे पर महाराष्ट्र विधानमंडल का विशेष सत्र बुलाने की मांग की

महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता विजय वडेट्टीवार ने शनिवार को कहा कि राज्य विधानमंडल का एक विशेष सत्र बुलाया जाना चाहिए और उसमें एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से मराठा समुदाय के लोगों को आरक्षण प्रदान करने के लिए कदम उठाने का अनुरोध किया जाना चाहिए। कांग्रेस नेता ने लातूर जिले में मराठा आरक्षण के लिए प्रदर्शन के दौरान हिंसा में पुलिसकर्मियों सहित कई लोगों के घायल होने के एक दिन बाद यहां संवाददाता सम्मेलन किया।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को आर्थिक रूप से कमजोर (ईडब्ल्यूएस) तबके के लोगों की ही तरह मराठा समुदाय को भी आरक्षण देना चाहिए या कुल आरक्षण की सीमा मौजूदा 50 प्रतिशत से ऊपर बढ़ानी चाहिए। कांग्रेस नेता ने कहा कि अगर केंद्र सरकार बिना किसी मांग के ईडब्ल्यूएस को 10 प्रतिशत आरक्षण दे सकती है, तो सड़कों पर उतरे मराठा समुदाय के लोगों को आरक्षण क्यों नहीं दे सकती।

उन्होंने कहा कि मराठा आरक्षण की मांग को इस महीने होने वाले विशेष सत्र के दौरान संसद के समक्ष रखा जाना चाहिए और केंद्र इसके लिए जरूरी एक विधेयक पेश कर सकता है। उच्चतम न्यायालय ने महाराष्ट्र सरकार द्वारा राजनीतिक रूप से प्रभावशाली मराठा समुदाय को प्रदान किए गए आरक्षण को मई 2021 में रद्द कर दिया था।

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