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मंदिर प्रशासकों का सरकार से सवाल: अगर पिज्जा हट और शराब की दुकानें खुल सकती हैं तो मंदिर क्यों नहीं?

Tue, 06 Jul 2021 01:04 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 06 Jul 2021 01:04 PM IST
सार

बिड़ला मंदिर के प्रशासक विनोद कुमार मिश्रा ने कहा कि कोरोना काल ने समाज के मस्तिष्क पर गहरा नकारात्मक प्रभाव डाला है। लोगों में चिंता और अवसाद की घटनाएं बढ़ रही हैं। मंदिरों के दर्शन करने और पूजा-पाठ करने से लोगों में सकारात्मकता का संचार होता है...

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The temple administrators asked delhi government why delhi temples are being closed in unlock but pizza hut, markets, malls, gyms and liquor shops are opened
झंडेवालान मंदिर में पूजा करते श्रद्धालु - फोटो : ANI (File)

विस्तार

दिल्ली सरकार ने कोरोना नियमों में ढील देते हुए बाजार, मॉल्स और रेस्टोरेंट्स को खोलने की अनुमति दे दी है। जिम, स्पा सेंटर से लेकर शराब की दुकानों तक को खोलने की अनुमति मिल चुकी है। बाजारों में भारी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं और खरीदारी कर रहे हैं। लेकिन इसके बाद भी अभी तक मंदिरों में भक्तों के प्रवेश की अनुमति नहीं है। मंदिर प्रशासकों का सवाल है कि अगर पिज्जा हट, बाजार, मॉल्स, जिम और शराब की दुकानें तक खोली जा सकती हैं, तो केवल मंदिरों पर ही प्रतिबंध क्यों लगाया जा रहा है?

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झंडेवालान देवी मंदिर के मुख्य प्रशासक नंदकुमार सेठी ने अमर उजाला को बताया कि एक हफ्ते पूर्व कई मंदिरों के प्रमुखों ने दिल्ली सरकार से अनुरोध किया था कि मंदिरों को भी नियमों का पालन करते हुए खोलने की अनुमति दी जानी चाहिए। लेकिन सरकार ने उनके अनुरोध पर कोई विचार नहीं किया है। इस बीच मंदिरों के सामने उनका संचालन करना भी भारी पड़ रहा है क्योंकि मंदिर पिछले डेढ़ वर्ष से लगातार बंद ही चल रहे हैं।

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अकेले झंडेवालान मंदिर का प्रति माह का संचालन खर्च लगभग पांच लाख रुपये आता है। मंदिर में 100 से ज्यादा कर्मचारी हैं जो साफ-सफाई, सुरक्षा, लिपिकीय और अन्य कार्यों में लगे हैं। मंदिर की एक गौशाला है जिसमें लगभग 300 गायों की देखरेख की जा रही है। इसके अलावा मंदिर संस्थान कई सामाजिक कल्याण केंद्र, जैसे गरीब महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई सिखाना इत्यादि चलाता है। मंदिर संचालन के साथ-साथ इसके बिजली-पानी के बिल सहित तमाम खर्च होते हैं। लेकिन लगातार मंदिर के बंद रहने से उसके सामने आर्थिक संकट पैदा हो गया है।

नंद कुमार सेठी ने कहा कि अगर बाजारों को नियमों के साथ खोलने की अनुमति दी जा सकती है तो मंदिरों को यही अनुमति क्यों नहीं मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बीच में कुछ समय के लिए भक्तों के प्रवेश को अनुमति मिली थी, तब सभी भक्तों को सैनिटाइज करना, उनके शरीर का तापमान चेक करना और शारीरिक दूरी के नियमों का पालन करते हुए दर्शन कराया जा रहा था। भक्तों को फूल-माला या प्रसाद चढ़ाने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई थी, ताकि कोई संक्रमण न हो सके। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार पूरे नियमों का पालन करते हुए अब मंदिरों को खोलने की अनुमति मिलनी चाहिए।

बिड़ला मंदिर के प्रशासक विनोद कुमार मिश्रा ने कहा कि कोरोना काल ने समाज के मस्तिष्क पर गहरा नकारात्मक प्रभाव डाला है। लोगों में चिंता और अवसाद की घटनाएं बढ़ रही हैं। मंदिरों के दर्शन करने और पूजा-पाठ करने से लोगों में सकारात्मकता का संचार होता है। ऐसे में सरकार को मंदिरों के सकारात्मक पक्ष को देखते हुए अब इन्हें खोलने की अनुमति देनी चाहिए।

दिल्ली के कई बड़े मंदिरों के प्रशासकों की 29 जून को बिड़ला मंदिर में एक बैठक भी हुई थी। इस बैठक में बिड़ला मंदिर के प्रशासक विनोद कुमार मिश्रा, झंडेवालान मंदिर के प्रशासक नंदकुमार सेठी, कालकाजी मंदिर सुरेंद्रनाथ अवधूत सहित अनेक मंदिरों के प्रशासनिक अधिकारी और धार्मिक संत शामिल हुए थे। बैठक में शामिल सभी मंदिरों के अधिकारियों ने सरकार से अनुरोध किया था कि अब मंदिरों को खोलने की अनुमति जानी चाहिए।

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