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तमिनलाडु: 15 वर्षीय बालिका के साथ पिता-दादा ने किया दुष्कर्म, कोर्ट ने दिया गर्भपात का आदेश

Thu, 23 Jul 2020 02:23 PM IST
अनवर अंसारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई Published by: अनवर अंसारी Updated Thu, 23 Jul 2020 02:23 PM IST
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Tamil Nadu: 15-year-old girl misdeed by father and grandfather, High court directs abortion
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Shutterstock

तमिनलाडु के तंजावुर में हैवानियत का एक ऐसा रूप सामने आया है, जिसे जानकर किसी की भी रूह कांप जाएगी। दरअसल, यहां एक 15 वर्षीय बालिका के साथ उसके पिता और दादा ने दुष्कर्म किया, जिससे वह गर्भवती हो गई। वहीं, जब यह मामला मद्रास हाईकोर्ट में पहुंचा तो अदालत ने बालिका के स्वास्थ्य को देखते हुए गर्भकाल की अवधि 25 हफ्ते होने के बाद भी उसे गर्भपात की अनुमति दी। 

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मंगलवार को मद्रास हाईकोर्ट में बालिका को गर्भपात की अनुमति देने को लेकर सुनवाई चल रही थी। इस दौरान अदालत ने, बालिका के स्वास्थ्य और उसकी भलाई को ध्यान में रखते हुए गर्भकाल की अवधि 25 सप्ताह होने के बाद भी उसे गर्भपात की अनुमति प्रदान की।  
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दरअसल, इस संबंध में बालिका की मामी ने याचिका दायर की थी, इसमें कहा गया था कि बालिका के स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए उसे गर्भपात की अनुमति दी जाए। याचिकाकर्ता के अनुसार, बालिका की मां की मौत के बाद, पिता और दादा ने उसके साथ दुष्कर्म किया। उन्होंने बताया कि इस संबंध में पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। 
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न्यायमूर्ति आर पोंगियप्पन ने कहा कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट के प्रावधान से पता चलता है कि गर्भावस्था की अवधि 20 सप्ताह से अधिक होने पर गर्भपात की अनुमति नहीं दी जाती है। न्यायाधीश ने कहा कि हालांकि अधिनियम की धारा 5 में कुछ मामलों को इससे छूट दी गई है। 


न्यायाधीश ने कहा कि इस अदालत के पहले के निर्देश के अनुसार, तंजावुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल के डीन को यह पता लगाने के लिए एक चिकित्सा समिति का गठन करने को कहा गया था कि क्या 20 हफ्ते के बाद गर्भपात कराया जा सकता है और अगर गर्भावस्था जारी रहती है तो लड़की के स्वास्थ्य को क्या नुकसान होगा।

न्यायाधीश ने कहा कि समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि गर्भावस्था की गर्भकालीन अवधि 25 सप्ताह है और पीड़िता के सामाजिक और मनोवैज्ञानिक सामाजिक पहलुओं को ध्यान में रखकर गर्भपात पर विचार किया जा सकता है। इसे संज्ञान में लेते हुए, न्यायाधीश ने बालिका को गर्भपात की अनुमति प्रदान कर दी। 

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