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पश्चिम बंगाल: क्या दुर्गा पूजा के बाद बढ़ेगा बस किराया, कितना इजाफा चाहते हैं संचालक; सरकार ने क्या कहा?
Mon, 14 Sep 2026 11:46 PM IST
निर्मल कांत
पीटीआई, कोलकाता।
पीटीआई, कोलकाता।
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 14 Sep 2026 11:46 PM IST
सार
पश्चिम बंगाल में निजी बसों का किराया बढ़ाने की तैयारी है। दुर्गा पूजा के बाद सरकार फैसला ले सकती है, लेकिन क्या यात्रियों पर बढ़ेगा बोझ? बस मालिक कितना किराया बढ़ाने की मांग कर रहे हैं? पढ़िए रिपोर्ट
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पश्चिम बंगाल में निजी बस सेवा
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई (फाइल)
विस्तार
पश्चिम बंगाल में निजी बसों का किराया काफी समय से बढ़ाया नहीं गया है। अब राज्य सरकार किराया बढ़ाने पर विचार कर सकती है। राज्य के परिवहन मंत्री अर्जुन सिंह ने सोमवार को कहा कि दुर्गा पूजा के बाद किराया बढ़ाने पर फैसला लिया जा सकता है। मंत्री ने निजी बस संचालकों के संगठनों के साथ बैठक की। उन्होंने यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा, मेरी राय में बस किराया काफी समय से बढ़ाया जाना बाकी है। दुर्गा पूजा के बाद इस पर फैसला होगा। मंत्री ने कहा कि किराया बढ़ने के बाद बस संचालकों को यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देनी होंगी। सड़कों पर बसों का संचालन बेहतर होना चाहिए। इसमें एसी बसें भी शामिल हैं।
बैठक में किन लोगों से बात हुई?
अर्जुन सिंह ने परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक परिवहन विभाग के मैदान स्थित अस्थायी कार्यालय में हुई। इसमें निजी बस संचालकों के कई संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इनमें बस सिंडिकेट की संयुक्त परिषद, शहर उपनगरीय सेवा और पश्चिम बंगाल बस एवं मिनीबस मालिक संघ के प्रतिनिधि शामिल थे।
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सरकारी बसों का किराया पहले क्यों नहीं बढ़ा?
मंत्री ने कहा कि राज्य की सरकारी परिवहन बसों को भारी नुकसान हो रहा है। ऐसे में उनका किराया पहले ही बढ़ जाना चाहिए था।
बस मालिकों ने क्या मांग रखी?
पश्चिम बंगाल बस एवं मिनीबस मालिक संघ के प्रतिनिधि पीएन बोस ने बताया कि बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा हुई। इनमें बसों पर लगाए जाने वाले जुर्माने का मुद्दा भी शामिल था। सड़क टोल के किराये में अंतर की बात भी उठी। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल और देश के दूसरे हिस्सों में सड़क टोल की दरें अलग हैं। बोस के मुताबिक, मंत्री ने इन सभी मुद्दों पर ध्यान देने का भरोसा दिया।
क्या बस मालिकों को राहत मिलेगी?
बैठक में बस संचालकों के लिए एक बार की राहत पैकेज पर भी चर्चा हुई। हालांकि, सरकार ने तुरंत कोई पक्का आश्वासन नहीं दिया।
अभी बस का किराया कितना है?
अभी सरकार के तय किराये के अनुसार पहले चरण का बस किराया सात रुपये है। लेकिन निजी बस संचालक गुपचुप तरीके से 10 रुपये ले रहे हैं।
बस मालिक कितना किराया चाहते हैं?
बोस ने कहा कि किराये में बदलाव अब बहुत जरूरी है। मौजूदा किराया पिछले आठ साल से नहीं बदला है। उनका कहना है कि अब इस किराये में बस चलाना आर्थिक रूप से संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि 2018 के किराये पर 2026 में बस चलाना मुश्किल है। पहले चरण के लिए बस मालिक अब 20 रुपये किराया मांग रहे हैं। उनका कहना है कि इससे बस चलाने में हो रहे नुकसान की भरपाई हो सकेगी।
बस चलाना महंगा क्यों हो गया?
निजी बस मालिकों के अनुसार डीजल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा है। बसों के रखरखाव का खर्च भी लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में मौजूदा किराये पर बस चलाना उनके लिए मुश्किल हो गया है। बोस ने कहा कि सरकार को वाहन से जुड़े पुराने जुर्मानों को एक बार माफ कर देना चाहिए। उनके अनुसार इससे बस संचालकों को कुछ राहत मिल सकती है।
ये भी पढ़ें: तेलंगाना: थाने के अंदर केटीआर के करीबियों पर हमले का आरोप, बीआरएस ने कांग्रेस पर साधा निशाना; जांच की मांग तेज
क्या यात्रियों की संख्या भी घटी है?
बोस ने कहा कि निजी बसों के कारोबार पर कई तरह का दबाव है। डीजल महंगा हो गया है। यात्रियों की संख्या भी कम हुई है। सरकारी बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा शुरू होने के बाद निजी बसों पर इसका असर पड़ा है। ऐसे हालात में कई निजी बस संचालक अपने मार्ग में बदलाव कर रहे हैं। कुछ जगहों पर बिना आधिकारिक मंजूरी के किराया भी बदला जा रहा है।
कोलकाता में अभी कितनी बसें चल रही हैं?
अभी कोलकाता की सड़कों पर करीब 3,500 बसें चल रही हैं। कोरोना से पहले यह संख्या करीब 6,000 थी। यानी कोरोना से पहले चलने वाली बसों की संख्या के मुकाबले अब करीब 2,500 बसें कम चल रही हैं।
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उन्होंने कहा, मेरी राय में बस किराया काफी समय से बढ़ाया जाना बाकी है। दुर्गा पूजा के बाद इस पर फैसला होगा। मंत्री ने कहा कि किराया बढ़ने के बाद बस संचालकों को यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देनी होंगी। सड़कों पर बसों का संचालन बेहतर होना चाहिए। इसमें एसी बसें भी शामिल हैं।
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बैठक में किन लोगों से बात हुई?
अर्जुन सिंह ने परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक परिवहन विभाग के मैदान स्थित अस्थायी कार्यालय में हुई। इसमें निजी बस संचालकों के कई संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इनमें बस सिंडिकेट की संयुक्त परिषद, शहर उपनगरीय सेवा और पश्चिम बंगाल बस एवं मिनीबस मालिक संघ के प्रतिनिधि शामिल थे।
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सरकारी बसों का किराया पहले क्यों नहीं बढ़ा?
मंत्री ने कहा कि राज्य की सरकारी परिवहन बसों को भारी नुकसान हो रहा है। ऐसे में उनका किराया पहले ही बढ़ जाना चाहिए था।
बस मालिकों ने क्या मांग रखी?
पश्चिम बंगाल बस एवं मिनीबस मालिक संघ के प्रतिनिधि पीएन बोस ने बताया कि बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा हुई। इनमें बसों पर लगाए जाने वाले जुर्माने का मुद्दा भी शामिल था। सड़क टोल के किराये में अंतर की बात भी उठी। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल और देश के दूसरे हिस्सों में सड़क टोल की दरें अलग हैं। बोस के मुताबिक, मंत्री ने इन सभी मुद्दों पर ध्यान देने का भरोसा दिया।
क्या बस मालिकों को राहत मिलेगी?
बैठक में बस संचालकों के लिए एक बार की राहत पैकेज पर भी चर्चा हुई। हालांकि, सरकार ने तुरंत कोई पक्का आश्वासन नहीं दिया।
अभी बस का किराया कितना है?
अभी सरकार के तय किराये के अनुसार पहले चरण का बस किराया सात रुपये है। लेकिन निजी बस संचालक गुपचुप तरीके से 10 रुपये ले रहे हैं।
बस मालिक कितना किराया चाहते हैं?
बोस ने कहा कि किराये में बदलाव अब बहुत जरूरी है। मौजूदा किराया पिछले आठ साल से नहीं बदला है। उनका कहना है कि अब इस किराये में बस चलाना आर्थिक रूप से संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि 2018 के किराये पर 2026 में बस चलाना मुश्किल है। पहले चरण के लिए बस मालिक अब 20 रुपये किराया मांग रहे हैं। उनका कहना है कि इससे बस चलाने में हो रहे नुकसान की भरपाई हो सकेगी।
बस चलाना महंगा क्यों हो गया?
निजी बस मालिकों के अनुसार डीजल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा है। बसों के रखरखाव का खर्च भी लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में मौजूदा किराये पर बस चलाना उनके लिए मुश्किल हो गया है। बोस ने कहा कि सरकार को वाहन से जुड़े पुराने जुर्मानों को एक बार माफ कर देना चाहिए। उनके अनुसार इससे बस संचालकों को कुछ राहत मिल सकती है।
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क्या यात्रियों की संख्या भी घटी है?
बोस ने कहा कि निजी बसों के कारोबार पर कई तरह का दबाव है। डीजल महंगा हो गया है। यात्रियों की संख्या भी कम हुई है। सरकारी बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा शुरू होने के बाद निजी बसों पर इसका असर पड़ा है। ऐसे हालात में कई निजी बस संचालक अपने मार्ग में बदलाव कर रहे हैं। कुछ जगहों पर बिना आधिकारिक मंजूरी के किराया भी बदला जा रहा है।
कोलकाता में अभी कितनी बसें चल रही हैं?
अभी कोलकाता की सड़कों पर करीब 3,500 बसें चल रही हैं। कोरोना से पहले यह संख्या करीब 6,000 थी। यानी कोरोना से पहले चलने वाली बसों की संख्या के मुकाबले अब करीब 2,500 बसें कम चल रही हैं।