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बंगाल में 'दादा' राज: ममता को दो बार हराने वाले शुभेंदु अधिकारी संभालेंगे सत्ता, ऐसे बढ़ा राजनीतिक कद
सार
जिस पश्चिम बंगाल में भाजपा की नींव जनसंघ के रूप में पड़ी, उस राज्य में 75 वर्षों बाद पहली बार भाजपा सरकार शपथ लेगी। ममता बनर्जी के तीखे विरोध से भाजपा का चेहरा बने शुभेंदु अधिकारी पार्टी के पहले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे।
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अमित शाह और शुभेंदु अधिकारी
- फोटो : ANI
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विस्तार
पश्चिम बंगाल की राजनीति में बीते कुछ वर्षों में इतनी तेजी से शुभेंदु अधिकारी का कद बढ़ा कि वह भाजपा के सबसे प्रमुख चेहरा बन गए और अब राज्य के मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। 15 साल तक मुख्यमंत्री रहीं ममता बनर्जी को पहले 2021 में नंदीग्राम और फिर 2026 में भवानीपुर में पराजित करने वाले शुभेंदु ने सत्ता संभालने से पहले मैं नहीं, हम से सामूहिक नेतृत्व के आधार पर सरकार चलाने पर जोर दिया है। कोलकाता के न्यू टाउन स्थित विश्व बांग्ला कन्वेंशन सेंटर में भाजपा विधायक दल की बैठक के बाद शुभेंदु ने साफ संकेत दिया कि उनकी सरकार सामूहिक नेतृत्व और संगठन आधारित राजनीति के मॉडल पर आगे बढ़ेगी।
करीब पांच साल पहले तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामने वाले शुभेंदु बंगाल के प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता शिशिर अधिकारी पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद रह चुके हैं। उनके भाई दिव्येंदु अधिकारी और सैमेंदु अधिकारी भी पश्चिम बंगाल के सक्रिय राजनेता और बीजेपी नेता रहे हैं। कांग्रेस से राजनीतिक सफर की शुरुआत करने वाले शुभेंदु 1998 से 2020 तक तृणमूल के साथ रहे। ममता सरकार में परिवहन और सिंचाई मंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभाई। दिसंबर, 2020 में वह भाजपा में शामिल हो गए। वह 2009 से 2014 तक तमलुक निर्वाचन क्षेत्र से सांसद भी रह चुके हैं। रवींद्र भारती यूनिवर्सिटी से मास्टर्स की डिग्री हासिल करने वाले शुभेंदु ने शादी नहीं की है।
यह भी पढ़ें: Tamil Nadu: तमिलनाडु में सियासी खींचतान जारी, वीसीके ने समर्थन देने के लिए मांगा उप-मुख्यमंत्री का पद
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नंदीग्राम आंदोलन से उभरे
वाममोर्चा सरकार ने जब 2007 और 2008 के दौरान नंदीग्राम में इंडोनेशिया के सलीम ग्रुप के विशेष आर्थिक जोन परियोजना के लिए जबरन जमीन का अधिग्रहण शुरू किया, तो विरोध में लोग सड़कों पर उतर आए। इसका नेतृत्व शुभेंदु ने किया। वह इस आंदोलन का चेहरा बनकर उभरे। यह वह समय था जब वामपंथी सरकार का विरोध करने से लोग डरते थे। प्रदर्शन के दौरान 14 मार्च, 2007 को पुलिस फायरिंग हुई, जिसमें 14 लोग मारे गए थे। यह घटना बंगाल की राजनीति में अहम मोड़ साबित हुई, जिसने 34 साल के वाम शासन को खत्म किया।
भ्रष्टाचार, संदेशखाली और आरजी कर मामले की जांच के लिए बनेगा आयोग
मुख्यमंत्री पद की शपथ से पहले ही शुभेंदु ने कई बड़े संकेत दिए। उन्होंने कहा कि बंगाल में संस्थागत भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में आयोग गठित किया जाएगा। सरकारी धन के कथित दुरुपयोग के मामलों में भी कार्रवाई का आश्वासन दिया गया। संदेशखाली प्रकरण और आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल मामले की जांच के लिए भी आयोग बनाया जाएगा।
शुभेंदु बोले-चरैवेति हमारा मंत्र होगा इससे तय होगी सरकार की दिशा
शुभेंदु ने कहा कि स्वामी विवेकानंद का विचार चरैवेति यानी आगे बढ़ते रहो, केवल शब्द नहीं, बल्कि जीवन और शासन के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत है। सरकार इसी सोच के साथ काम करेगी। इसमें रुकावट नहीं, बल्कि निरंतर प्रगति प्राथमिक लक्ष्य होगा। सरकार का फोकस विकास कार्यों की गति बढ़ाने, प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाने और योजनाओं को समयबद्ध तरीके से लागू करने पर रहेगा। शुभेंदु ने कहा कि राज्य में लंबे समय से जो प्रशासनिक जड़ता और देरी की शिकायतें रही हैं, उन्हें दूर करने के लिए तेज निर्णय प्रणाली की जरूरत है। हमारा प्रयास होगा कि केंद्र और राज्य के बीच समन्वय बनाकर योजनाएं जमीन पर तेजी से उतारी जाएं।
लाल मैदान से केसरिया शपथ तक...ब्रिगेड परेड ग्राउंड में बंगाल की राजनीति का नया मोड़
कोलकाता का ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड पहली बार भाजपा सरकार के शपथ ग्रहण का साक्षी बनने जा रहा है। 75 वर्षों में इस मैदान ने सत्ता के उत्थान और पतन को देखा है। इस ग्राउंड ने सिर्फ बंगाल की नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति के कई बड़े चेहरों को भी देखा है। 1955 में सोवियत संघ के नेता निकिता ख्रुश्चेव और निकोलाई बुलगानिन की ऐतिहासिक सभा ने इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान दी। बांग्लादेश के गठन के बाद शेख मुजीबुर रहमान के साथ इंदिरा गांधी की सभा भी यहीं हुई। 1977 के बाद यह मैदान वाम मोर्चा की ताकत का सबसे बड़ा प्रतीक बन गया। लाल झंडों से भरा यह मैदान राजनीति का केंद्र बन गया था। 2011 के बाद यह तृणमूल की रैलियों का मंच बना।
झालमुड़ी और बंगाली व्यंजनों के दिखेंगे रंग
रवींद्र जयंती के अवसर पर शपथ समारोह में बंगाल की परंपरा और संस्कृति के रंग दिखेंगे। रवींद्र संगीत की विशेष प्रस्तुति होगी। कई नेता बंगाली धोती में नजर आ सकते हैं। मेहमानों के लिए झालमुड़ी, सीताभोग व मिहिदाना व्यंजन रहेंगे।
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करीब पांच साल पहले तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामने वाले शुभेंदु बंगाल के प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता शिशिर अधिकारी पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद रह चुके हैं। उनके भाई दिव्येंदु अधिकारी और सैमेंदु अधिकारी भी पश्चिम बंगाल के सक्रिय राजनेता और बीजेपी नेता रहे हैं। कांग्रेस से राजनीतिक सफर की शुरुआत करने वाले शुभेंदु 1998 से 2020 तक तृणमूल के साथ रहे। ममता सरकार में परिवहन और सिंचाई मंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभाई। दिसंबर, 2020 में वह भाजपा में शामिल हो गए। वह 2009 से 2014 तक तमलुक निर्वाचन क्षेत्र से सांसद भी रह चुके हैं। रवींद्र भारती यूनिवर्सिटी से मास्टर्स की डिग्री हासिल करने वाले शुभेंदु ने शादी नहीं की है।
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नंदीग्राम आंदोलन से उभरे
वाममोर्चा सरकार ने जब 2007 और 2008 के दौरान नंदीग्राम में इंडोनेशिया के सलीम ग्रुप के विशेष आर्थिक जोन परियोजना के लिए जबरन जमीन का अधिग्रहण शुरू किया, तो विरोध में लोग सड़कों पर उतर आए। इसका नेतृत्व शुभेंदु ने किया। वह इस आंदोलन का चेहरा बनकर उभरे। यह वह समय था जब वामपंथी सरकार का विरोध करने से लोग डरते थे। प्रदर्शन के दौरान 14 मार्च, 2007 को पुलिस फायरिंग हुई, जिसमें 14 लोग मारे गए थे। यह घटना बंगाल की राजनीति में अहम मोड़ साबित हुई, जिसने 34 साल के वाम शासन को खत्म किया।
भ्रष्टाचार, संदेशखाली और आरजी कर मामले की जांच के लिए बनेगा आयोग
मुख्यमंत्री पद की शपथ से पहले ही शुभेंदु ने कई बड़े संकेत दिए। उन्होंने कहा कि बंगाल में संस्थागत भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में आयोग गठित किया जाएगा। सरकारी धन के कथित दुरुपयोग के मामलों में भी कार्रवाई का आश्वासन दिया गया। संदेशखाली प्रकरण और आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल मामले की जांच के लिए भी आयोग बनाया जाएगा।
शुभेंदु बोले-चरैवेति हमारा मंत्र होगा इससे तय होगी सरकार की दिशा
शुभेंदु ने कहा कि स्वामी विवेकानंद का विचार चरैवेति यानी आगे बढ़ते रहो, केवल शब्द नहीं, बल्कि जीवन और शासन के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत है। सरकार इसी सोच के साथ काम करेगी। इसमें रुकावट नहीं, बल्कि निरंतर प्रगति प्राथमिक लक्ष्य होगा। सरकार का फोकस विकास कार्यों की गति बढ़ाने, प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाने और योजनाओं को समयबद्ध तरीके से लागू करने पर रहेगा। शुभेंदु ने कहा कि राज्य में लंबे समय से जो प्रशासनिक जड़ता और देरी की शिकायतें रही हैं, उन्हें दूर करने के लिए तेज निर्णय प्रणाली की जरूरत है। हमारा प्रयास होगा कि केंद्र और राज्य के बीच समन्वय बनाकर योजनाएं जमीन पर तेजी से उतारी जाएं।
लाल मैदान से केसरिया शपथ तक...ब्रिगेड परेड ग्राउंड में बंगाल की राजनीति का नया मोड़
कोलकाता का ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड पहली बार भाजपा सरकार के शपथ ग्रहण का साक्षी बनने जा रहा है। 75 वर्षों में इस मैदान ने सत्ता के उत्थान और पतन को देखा है। इस ग्राउंड ने सिर्फ बंगाल की नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति के कई बड़े चेहरों को भी देखा है। 1955 में सोवियत संघ के नेता निकिता ख्रुश्चेव और निकोलाई बुलगानिन की ऐतिहासिक सभा ने इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान दी। बांग्लादेश के गठन के बाद शेख मुजीबुर रहमान के साथ इंदिरा गांधी की सभा भी यहीं हुई। 1977 के बाद यह मैदान वाम मोर्चा की ताकत का सबसे बड़ा प्रतीक बन गया। लाल झंडों से भरा यह मैदान राजनीति का केंद्र बन गया था। 2011 के बाद यह तृणमूल की रैलियों का मंच बना।
झालमुड़ी और बंगाली व्यंजनों के दिखेंगे रंग
रवींद्र जयंती के अवसर पर शपथ समारोह में बंगाल की परंपरा और संस्कृति के रंग दिखेंगे। रवींद्र संगीत की विशेष प्रस्तुति होगी। कई नेता बंगाली धोती में नजर आ सकते हैं। मेहमानों के लिए झालमुड़ी, सीताभोग व मिहिदाना व्यंजन रहेंगे।
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