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Supreme Court: बांके बिहारी मंदिर में जगमोहन हॉल से दर्शन करने पर लगी रोक, सुप्रीम कोर्ट समिति का फैसला

Sat, 22 Nov 2025 01:55 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Sat, 22 Nov 2025 01:55 PM IST
सार

समिति के अध्यक्ष अशोक कुमार ने कहा कि कई गड़बड़ियां देखने के बाद, कमेटी ने संबंधित 'सेवायतों' को दर्शन करने वालों की भीड़ को मैनेज करने में हर मुमकिन मदद करने का निर्देश दिया था।

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Supreme court updates panel bans climbing stairs offering darshan at Jagmohan hall of Banke Bihari temple
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : पीटीआई

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त उच्च स्तरीय समिति ने बांके बिहारी मंदिर में सीढ़ियां चढ़ने और जगमोहन हॉल से दर्शन करने पर रोक लगाने का आदेश दिया है। मंदिर के पुजारियों द्वारा समिति के निर्देश को न मानने के बाद यह फैसला लिया गया है। जगमोहन हॉल बांके बिहारी मंदिर के गर्भ गृह और आम लोगों द्वारा भगवान के दर्शन करने वाली जगह के बीच की जगह है। 
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मंदिर के प्रबंधन के लिए सुप्रीम कोर्ट ने नियुक्त की थी 12 सदस्यीय समिति
स्थानीय परंपराओं के अनुसार, श्रद्धालु आम तौर पर इस स्थान में नहीं घुस सकते और सिर्फ मंदिर के पुजारी ही यहां विशेष पूजा करा सकते हैं। हालांकि शनिवार को इस स्थान पर किसी की भी एंट्री को प्रतिबंधित कर दिया गया है। यह आदेश सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित उच्च स्तरीय 12 सदस्यीय समिति ने जारी किया है, जिसकी अध्यक्षता इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व जज अशोक कुमार कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने यह समिति मंदिर के रोजाना के कामकाज का प्रबंधन करने के लिए गठित की थी। 
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समिति ने क्यों लगाई रोक?
एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि शनिवार से जगमोहन एरिया के ऊपरी बाएं और दाएं हिस्से में किसी भी विजीटर की एंट्री पर रोक रहेगी। इससे पहले, कुमार ने कमेटी के एक सदस्य और पूर्व जिला जज मुकेश कुमार के साथ मंदिर परिसर का साइट इंस्पेक्शन किया। कुमार ने कहा कि कई गड़बड़ियां देखने के बाद, कमेटी ने संबंधित 'सेवायतों' को दर्शन करने वालों की भीड़ को मैनेज करने में हर मुमकिन मदद करने का निर्देश दिया था। हालांकि, उन्होंने कहा कि उनसे कोई अच्छा सहयोग नहीं मिला। कुमार ने यह भी कहा कि भक्त जगमोहन इलाके के दोनों तरफ सीढ़ियां चढ़कर दर्शन करने की कोशिश कर रहे थे। भीड़ में छोटे बच्चे भी शामिल रहते हैं।
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उन्होंने कहा कि इससे न सिर्फ 'ठाकुरजी' की इज्जत पर असर पड़ा, बल्कि भीड़भाड़ वाले इलाके में कोई अनहोनी होने की भी पूरी आशंका थी। कुमार ने मंदिर के कार्यकारी प्रबंधक को आदेश का सख्ती से पालन करने और जगमोहन से चंदन कोठरी तक जाने वाले रास्ते/दरवाजे को बंद करने का निर्देश दिया है।

देश में पर्यावरण कार्यकर्ता जिंदा रहने के लिए कर रहे हैं संघर्ष- पूर्व SC जज ओका
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस अभय एस ओका ने शनिवार को कहा कि देश में पर्यावरण कार्यकर्ता आम जनता से सपोर्ट की कमी के कारण जिंदा रहने और अपनी कोशिशों को जारी रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। बीएमएल मुंजाल यूनिवर्सिटी के एक कार्यक्रम में बोलते हुए, पूर्व जज ने बताया कि आम नागरिक मानवाधिकार कार्यकर्ता के साथ एकजुटता में खड़े नहीं होते हैं।

पूर्व जज ने कहा, 'हालात देखिए, कुछ ही लोग हैं जो पर्यावरण से जुड़ा मुद्दा उठाते हैं। मैंने बार-बार कहा है कि हमारा समाज पर्यावरण के लिए लड़ने वालों के साथ अच्छा बर्ताव नहीं करता है। उन्हें सपोर्ट नहीं मिलता है।' निचली अदालतों की भूमिका पर जोर देते हुए, जज ने सेशन और मजिस्ट्रेट लेवल पर नागरिकों को न्याय मिलने के महत्व पर जोर दिया।

उन्होंने कहा, 'जब किसी आरोपी को न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाता है, तो उसकी भूमिका होती है; उसे यह देखना होता है कि क्या संवैधानिक आदेश का पालन किया गया है, क्या पुलिस कस्टडी में लिए जाने के बाद उसके साथ बुरा बर्ताव किया गया है, क्या उसे गिरफ्तारी के आधार बताए गए हैं।' पूर्व जज ने आगे कहा, 'अगर मजिस्ट्रेट को लगता है कि कोर्ट के सामने पेश किए गए आरोपी को गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लिया गया है, तो उन्हें या तो उस व्यक्ति को रिहा कर देना चाहिए या उसे बेल दे देनी चाहिए।'
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