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SC: सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय सेना की लिंग भेद नीति को किया रद्द, सामान्य मेरिट सूची बनाने का दिया आदेश

Mon, 11 Aug 2025 10:58 PM IST
राहुल कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Mon, 11 Aug 2025 10:58 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने सेना की जज एडवोकेट जनरल (जेएजी) शाखा में महिलाओं की संख्या सीमित करने वाली नीति को रद्द कर दिया। कोर्ट ने योग्यता के आधार पर भर्ती करने का आदेश दिया।

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Supreme Court strikes down gender-based cap in Army's JAG recruitment, orders common merit list
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने सेना की जज एडवोकेट जनरल (जेएजी) शाखा में महिलाओं की संख्या सीमित करने वाली नीति को रद्द कर दिया। कोर्ट ने योग्यता के आधार पर भर्ती करने का आदेश दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि लैंगिक तटस्थता का सही अर्थ यह है कि सभी योग्य उम्मीदवारों का चयन किया जाना चाहिए, चाहे वे किसी भी लिंग के हों।

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जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन ने की पीठ ने कहा कि एक बार सेना ने सेना अधिनियम, 1950 की धारा 12 के तहत महिलाओं को किसी शाखा में शामिल होने की अनुमति दे दी, तो वह कार्यकारी नीति के माध्यम से उनकी संख्या पर अतिरिक्त प्रतिबंध नहीं लगा सकती। अगर जेएजी प्रवेश परीक्षा में महिला उम्मीदवार पुरुषों से ज्यादा मेधावी हैं, तो योग्यता के आधार पर उन्हें मौका दिया जाना चाहिए। बेहतर प्रदर्शन के बावजूद उन्हें 50 प्रतिशत सीटों तक सीमित रखने का प्रावधान समानता के अधिकार का उल्लंघन है। यह भर्ती की आड़ में पुरुष उम्मीदवारों के लिए आरक्षण प्रदान करती है।
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पीठ ने कहा कि वर्तमान मामले में याचिकाकर्ता ने प्रतिवादी संख्या 3 (पुरुष अधिकारी) के 433 अंकों के मुकाबले 447 अंक प्राप्त किए हैं। लिहाजा, भारत सरकार और सेना को निर्देश दिया जाता है कि वे याचिकाकर्ता संख्या 1 को भारतीय सेना के जेएजी विभाग में कमीशन के लिए अगले उपलब्ध प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में शामिल करें। न्यायालय ने भारत सरकार और भारतीय सेना को निर्देश दिया है कि वह आगे से जेएजी में भर्ती इस प्रकार करें कि किसी भी लिंग के लिए सीटों का विभाजन न हो। यदि सभी महिला उम्मीदवार योग्य हो तो उन सभी का चयन किया जाना चाहिए।
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परीक्षा की योग्यता सूची जारी करें
यह भी कहा कि जेएजी में एक सामान्य योग्यता सूची (कॉमन मेरिट लिस्ट) प्रकाशित की जाएगी जिसमें सभी उम्मीदवारों के अंक सार्वजनिक किए जाएंगे। पीठ ने कहा कि भले ही जेएजी प्रक्रिया के तहत पुरुष और महिलाएं अलग-अलग पदों के लिए आवेदन करते हैं, फिर भी चयन मानदंड और परीक्षण के मापदंड समान हैं। पीठ ने कहा कि लैंगिक तटस्थता और 2023 की नीति का सही अर्थ यह है कि भारत सरकार सबसे योग्य उम्मीदवारों की भर्ती करेगा, लिंग भेद के बिना सभी उम्मीदवारों को, क्योंकि इस शाखा की प्राथमिक भूमिका कानूनी सलाह देना है। महिलाओं को उनके पिछले नामांकन न होने की भरपाई के लिए भारत सरकार महिला उम्मीदवारों को कम से कम 50 फीसदी रिक्तियां आवंटित करेगा।

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