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Supreme Court: विमल नेगी मौत मामले में CBI पर बिफरी अदालत, कहा- बिल्कुल फर्जी अफसर, सेवा में रहने योग्य नहीं

Mon, 17 Nov 2025 11:07 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: ज्योति भास्कर Updated Mon, 17 Nov 2025 11:07 PM IST
सार

हिमाचल के अधिकारी विमल नेगी की मौत मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। सीबीआई अफसरों की क्षमता पर सवाल उठाते हुए शीर्ष अदालत ने तल्ख लहजे में कहा, ये बिल्कुल फर्जी अधिकारी हैं और ये सेवा में रहने योग्य नहीं हैं। जानिए क्या है पूरा मामला

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Supreme Court slams CBI Vimal Negi death case Justice Amanullah Bench angry fake officer unfit to serve
सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने की सख्त टिप्पणी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की कड़ी आलोचना की है। हिमाचल प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड के अधिकारी विमल नेगी की मौत की जांच कर रहे उसके कुछ अधिकारियों की क्षमता पर गंभीर सवाल उठाते हुए अदालत ने कहा, ये बिल्कुल फर्जी अधिकारी हैं और सेवा में रहने के योग्य नहीं हैं। अदालत देशराज नाम के व्यक्ति की अग्रिम जमानत की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

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सीबीआई की छवि बहुत बुरी है
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने नाराजगी प्रकट करते हुए कहा, सवाल पूछने वाला जांचकर्ता कौन है? यह बचकाना है। अगर वह एक वरिष्ठ अधिकारी है, तो यह सीबीआई की बहुत बुरी छवि है। आपने उसका इस वजह से तबादला कर दिया जैसा सवाल - क्या यही सवाल आप अभियुक्त से पूछ रहे हैं? और आप उससे क्या जवाब की उम्मीद करते हैं?
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चुप रहने का सांविधानिक अधिकार...
पीठ ने कहा, यह सब छोड़िए, अगर मैं अभियुक्त से पूछूं कि आपने ऐसा किया, तो आप क्या जवाब की उम्मीद करते हैं? वह इनकार ही करेगा, है ना? लेकिन क्या यह असहयोग है? अगर वह चुप है, तो चुप रहने का अधिकार एक सांविधानिक अधिकार है। पीठ ने सीबीआई से कहा, आप इसे असहयोग बताते हैं। आखिर आपके पास ये किस तरह के अधिकारी हैं। ये तो पूरी तरह बोगस हैं और इन्हें सेवा में होना ही नहीं चाहिए।
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क्या है विमल नेगी की मौत का मामला
यह मामला हिमाचल प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड के निदेशक (इलेक्ट्रिकल) देशराज पर अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मिलकर मृतक विमल नेगी, जो एचपीपीसीएल में एक अधिकारी भी थे, को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के आरोपों से संबंधित है। परिवार के सदस्यों ने आरोप लगाया कि एचपीपीसीएल के प्रबंध निदेशक हरिकेश मीणा और देशराज समेत तीन लोगों ने नेगी पर गलत काम करने का दबाव डाला, जिसके कारण नेगी अत्यधिक तनाव में थे और उन्होंने आत्महत्या कर ली। शीर्ष अदालत ने देशराज को अग्रिम जमानत देते हुए सीबीआई के रुख पर सवाल उठाया, जिसने दावा किया कि आरोपी ने जांच में सहयोग नहीं किया और उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों से इनकार किया।

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