फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme Court says if bulldozer justice allowed then constitutional recognition of right to property will end

SC: बुलडोजर न्याय अस्वीकार्य, संपत्ति नष्ट करने की धमकी से लोगों को नहीं दबा सकते; सुप्रीम कोर्ट के तेवर सख्त

Sun, 10 Nov 2024 01:20 AM IST
दीपक कुमार शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Sun, 10 Nov 2024 01:20 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बुलडोजर न्याय की अनुमति दी जाती है तो संपत्ति के अधिकार की सांविधानिक मान्यता समाप्त हो जाएगी। अगर किसी विभाग या अधिकारी को मनमानी और गैरकानूनी व्यवहार की अनुमति दी जाती है तो इस बात का खतरा है कि प्रतिशोध में लोगों की संपत्तियों को ध्वस्त कर दिया जाएगा।

विज्ञापन
Supreme Court says if bulldozer justice allowed then constitutional recognition of right to property will end
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

 सुप्रीम कोर्ट ने बुलडोजर के जरिये न्याय की प्रवृत्ति की कड़ी निंदा की है। शीर्ष अदालत ने कहा कि नागरिकों की संपत्तियों को नष्ट करने की धमकी देकर उनकी आवाज को दबाया नहीं जा सकता और 'बुलडोजर न्याय' कानून के शासन के तहत अस्वीकार्य है। अदालत ने कहा कि बुलडोजर न्याय न केवल कानून के शासन के विरुद्ध है, बल्कि यह मौलिक अधिकारों का भी उल्लंघन करता है। सरकार को किसी भी व्यक्ति की संपत्ति ध्वस्त करने से पहले कानूनी प्रक्रिया का पालन करना चाहिए और उन्हें सुनवाई का अवसर देना चाहिए। अगर बुलडोजर न्याय की अनुमति दी जाती है तो संपत्ति के अधिकार की सांविधानिक मान्यता समाप्त हो जाएगी। अगर किसी विभाग या अधिकारी को मनमानी और गैरकानूनी व्यवहार की अनुमति दी जाती है तो इस बात का खतरा है कि प्रतिशोध में लोगों की संपत्तियों को ध्वस्त कर दिया जाएगा।

विज्ञापन


भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्र की पीठ ने अपने हालिया फैसला में यह बात कही। पीठ की तरफ से फैसला लिखते हुए सीजेआई ने कहा, कानून के शासन के तहत बुलडोजर न्याय बिल्कुल अस्वीकार्य है। अगर इसकी अनुमति दी जाती है तो संविधान के अनुच्छेद 300ए के तहत मिले संपत्ति के अधिकार की सांविधानिक मान्यता समाप्त हो जाएगी। यह निर्णय 2019 में उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले में एक पत्रकार के घर को अवैध रूप से ध्वस्त करने से संबंधित एक मामले में पारित किया गया।
विज्ञापन


शीर्ष अदालत ने पाया कि घर को उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना ध्वस्त किया गया था, जिसके बाद राज्य को याचिकाकर्ता को 25 लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा देने का निर्देश दिया। राज्य को इसके अलावा जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक जांच शुरू करने का निर्देश दिया गया था। पीठ ने कहा है, नागरिकों की आवाज को उनकी संपत्तियों और घरों को नष्ट करने की धमकी देकर नहीं दबाया जा सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


उचित प्रक्रिया का पालन करना होगा
पीठ ने कहा, अतिक्रमण या अवैध निर्माण को हटाने के लिए भी राज्य को कानून की उचित प्रक्रिया का पालन करना होगा। उपरोक्त मामले में राज्य सरकार राजमार्ग की मूल चौड़ाई स्थापित करने के लिए कोई दस्तावेज दिखाने में विफल रही, जिसे राष्ट्रीय राजमार्ग 730 के रूप में अधिसूचित किया गया हो। संबंधित विभाग ऐसा कोई साक्ष्य भी प्रस्तुत करने में विफल रहा जिससे यह साबित होता हो कि याचिकाकर्ता के घर के मामले में अतिक्रमण को चिह्नित करने के लिए कोई जांच या सीमांकन किया गया था।

अवैध निर्माण हटाने के लिए पर्याप्त प्रावधान
शीर्ष अदालत ने कहा कि किसी भी व्यक्ति के पास जो अंतिम सुरक्षा होती है, वह उसका घर है। कानून निस्संदेह सार्वजनिक संपत्ति पर अवैध कब्जे और अतिक्रमण को उचित नहीं ठहराता। नगरपालिका कानून और नगर नियोजन कानून में अवैध अतिक्रमण से निपटने के लिए पर्याप्त प्रावधान हैं। अदालत ने भी कुछ न्यूनतम सीमाएं भी निर्धारित की हैं, जिन्हें कार्रवाई से पहले पूरा किया जाना चाहिए।


अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हो
पीठ ने कहा कि राज्य के अधिकारी जो इस तरह की गैरकानूनी कार्रवाई करते हैं या उसे मंजूरी देते हैं, उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए। कानून का उल्लंघन करने पर उन्हें आपराधिक दंड मिलना चाहिए। सार्वजनिक अधिकारियों के लिए सार्वजनिक जवाबदेही आदर्श होनी चाहिए। सार्वजनिक या निजी संपत्ति के संबंध में कोई भी कार्रवाई कानून की उचित प्रक्रिया द्वारा समर्थित होनी चाहिए।


संबंधित वीडियो
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed