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Supreme Court : सुप्रीम कोर्ट ने कहा- पति की मौत के बाद गोद लिया बच्चा पेंशन का हकदार नहीं

Wed, 18 Jan 2023 06:31 AM IST
Jeet Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Wed, 18 Jan 2023 06:31 AM IST
सार

शीर्ष अदालत ने कहा कि हिंदू दत्तक ग्रहण और रखरखाव कानून, 1956 की धारा आठ और 12 एक हिंदू महिला को अपने अधिकार में नाबालिग और मानसिक रूप से स्वस्थ किसी बच्चे को गोद लेने की अनुमति देती है।

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Supreme Court said Child adopted after husband death not entitled to pension
सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : ANI

विस्तार

उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को एक फैसले में कहा कि सरकारी कर्मी पति की मौत के बाद विधवा यदि किसी बच्चे को गोद लेती है तो वह संतान पारिवारिक पेंशन की हकदार नहीं होगी।

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शीर्ष अदालत ने कहा कि हिंदू दत्तक ग्रहण और रखरखाव कानून, 1956 की धारा आठ और 12 एक हिंदू महिला को अपने अधिकार में नाबालिग और मानसिक रूप से स्वस्थ किसी बच्चे को गोद लेने की अनुमति देती है। अदालत ने कहा कि कानून के प्रावधान के अनुसार, कोई विवाहित हिंदू महिला पति की सहमति के बिना बच्चा गोद नहीं ले सकती।
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न्यायमूर्ति केएम जोसेफ और न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना की पीठ ने 30 नवंबर, 2015 के बंबई उच्च न्यायालय के आदेश को बरकरार रखा। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम 54 (14) (बी) और 1972 के (सीसीएस (पेंशन) नियम के तहत गोद लिया गया बच्चा पारिवारिक पेंशन का हकदार नहीं होगा। पीठ ने कहा कि यह जरूरी है कि पारिवारिक पेंशन के लाभ का दायरा सरकारी कर्मी द्वारा अपने जीवन काल में केवल वैध रूप से गोद लिए गए बेटों और बेटियों तक सीमित हो। 
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श्रीधर चिमुरकर वर्ष 1993 में सेवानिवृत्ति हुए। वर्ष 1994 में उनकी मृत्यु हो गई। उन्होंने अपनी पत्नी माया मोटघरे को पीछे छोड़ दिया, दोनों की कोई संतान नहीं थी। माया मोटघरे ने लगभग दो साल बाद श्री राम श्रीधर चिमुरकर को अपने बेटे के रूप में अपनाया था। दोनों श्रीधर चिमुरकर के घर के एक हिस्से में रह रहे थे। इसके बाद अप्रैल, 1998 में माया मोटघरे ने एक विधुर चंद्र प्रकाश से शादी कर ली और जनकपुरी नई दिल्ली में उनके साथ रहने लगीं।


इसके बाद श्री राम श्रीधर चिमुरकर ने एक पत्र लिखकर मृतक सरकारी कर्मचारी श्रीधर चिमुरकर के परिवार को देय पारिवारिक पेंशन का दावा किया। हाईकोर्ट ने प्रतिवादियों द्वारा अपीलकर्ता के दावे को इस आधार पर खारिज कर दिया गया था कि सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के बाद एक सरकारी कर्मचारी की विधवा द्वारा गोद लिए गए बच्चे पेंशन के हकदार नहीं होंगे।

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