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अयोध्या केसः स्वामी बोले- पूजा करने जाना है.. SC ने कहा बाद में आइए

Fri, 31 Mar 2017 02:11 PM IST
amarujala.com-presented by: रोहित मिश्र
amarujala.com-presented by: रोहित मिश्र Updated Fri, 31 Mar 2017 02:11 PM IST
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supreme court rejects swami pil on ayodhya ram mandir case
फाइल फोटो
अयोध्या मामले में सुब्रहमण्यम स्वामी की जल्द सुनवाई की मांग करने वाली याचिका को कोर्ट ने खारिज तो किया ही, स्वामी से एक के बाद एक कई सवाल भी पूछे। 
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इस याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उनसे पूछा कि जब आप इस मामले में पक्षकार भी नहीं है, ऐसे में आप जल्द सुनवाई की मांग क्यों करना चाहते हैं। आप इसमें जबरन पक्ष क्यों बन रहे हैं जबकि ये प्रॉपर्टी का भी मामला है। 
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अपने जवाब में स्वामी ने कहा कि मैं इस मामले में पक्षकार नहीं हूं। ना ही मैं किसी तरह की संपत्ति का क्लेम कर रहा हूं। मैं बस एक धार्मिक आदमी की तरह इस मंदिर में पूजा करना चाहता हूं।
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मामला कोर्ट में अटका रहने की वजह से मैं पूजा से वंचित रह जा रहा है। स्वामी ने यहां भी कहा कि आप जिसको इच्छा हो यह संपत्ति दे दीजिए, मुझे मंदिर-मस्जिद की जायजाद से कोई वास्ता नहीं है। 
स्वामी के इस जवाब पर पलटवार करते हुए कोर्ट ने कहा कि हम आपकी भावनाओं को समझते हैं लेकिन हमारे पास इस मामले की त्वरित सुनवाई के लिए अभी वक्त नहीं है। 

स्वामी ने कोर्ट से अपील करते हुए कहा कि कृपया कोर्ट इस मामले में पुनः जल्द सुनवाई का रास्ता खोलकर रखे। ताकि वह पुनः जल्द सुनवाई के लिए याचिका फिर से डाल सकें। कोर्ट ने कहा कि आप भविष्य में पुनः याचिका डाल सकते हैं लेकिन अभी कोर्ट के पास इस मामले की सुनवाई करने का समय नहीं है। 

इसके पहले क्या-क्या हुआ था? 

सुप्रीम कोर्ट से अयोध्या विवाद का समाधान बातचीत से करने की सलाह के बाद श्रीराम जन्मभूमि के पक्षकार व अखिल भारतीय श्रीपंच रामानंदीय निर्वाणी अनी अखाड़ा हनुमानगढ़ी के श्रीमहंत धर्मदास सुप्रीम कोर्ट के समक्ष राम मंदिर विवाद के हल के लिए अपना नया फार्मूला पेश करने के लिए दिल्ली रवाना हो गए।

अमर उजाला से बातचीत में महंत धर्मदास ने बताया कि भाजपा के वरिष्ठ नेता सुब्रहमण्यम स्वामी की याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट 31 मार्च की तिथि तय की है। वह भी इस दिन सुप्रीम कोर्ट में पेश होकर अपनी ओर से सुलह के लिए अर्जी देंगे।


महंत धर्मदास ने कहा राम जन्मभूमि का मसले पर कोर्ट को यह भी ध्यान रखना चाहिए की मुख्य बिंदु पर ही विचार हो, किसी भावना से ऑर्डर नहीं किया जा सकता। 10 हजार पेज की फाइल रखने से काम नहीं चलेगा, बीच का रास्ता निकालना पड़ेगा। 
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