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कैमैक्स स्ट्रीट पर हंगामा: अभिषेक के दफ्तर से उतारा तृणमूल का बोर्ड, गार्ड्स और पुलिस भिड़े, क्या है मामला?
Thu, 27 Aug 2026 06:52 PM IST
राकेश कुमार
आईएएनएस, कोलकाता।
आईएएनएस, कोलकाता।
Published by: राकेश कुमार
Updated Thu, 27 Aug 2026 06:52 PM IST
सार
अभिषेक बनर्जी के पार्टी कार्यालय का बिलबोर्ड हटाने पहुंची नगर निगम की टीम के बाद कैमैक्स स्ट्रीट पर विवाद बढ़ गया। आदेश की वैधता पर सवाल से लेकर चुनिंदा कार्रवाई के आरोप तक, अब यह मामला हाईकोर्ट पहुंचने की बात तक आ गया है।
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अभिषेक बनर्जी, टीएमसी सांसद
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
कोलकाता के कैमैक्स स्ट्रीट स्थित तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी के कार्यालय पर गुरुवार को कार्रवाई हुई। कोलकाता नगर निगम और कोलकाता पुलिस की संयुक्त टीम कार्यालय पहुंची। इमारत के ऊपर लगे तृणमूल कांग्रेस के बिलबोर्ड को हटाने की कार्रवाई की गई। नगर निगम का कहना था कि यह बोर्ड अनधिकृत था। अधिकारियों के अनुसार, नगर निगम के नियमों के तहत इसे हटाया गया। कार्रवाई के दौरान इमारत के बाहर भारी पुलिस बल तैनात रहा। कुछ तृणमूल कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में भी लिया।
रोकने की कोशिश में हुई झड़प
नगर निगम की टीम जब पुलिस के साथ कार्यालय पहुंची तो अभिषेक बनर्जी के निजी सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें परिसर में प्रवेश करने से रोकने की कोशिश की। इस दौरान तृणमूल समर्थकों और निजी सुरक्षाकर्मियों की पुलिस तथा नगर निगम अधिकारियों से झड़प हो गई। यह सब राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन की मौजूदगी में हुआ। तृणमूल का आरोप था कि नगर निगम अधिकारी बोर्ड हटाने की अनुमति देने वाला सही आदेश नहीं दिखा सके। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारी जबरन परिसर में घुसे।
मामले से जुड़ी खास बातें
अभिषेक ने कार्रवाई को बताया गुंडागर्दी
अभिषेक बनर्जी भी मौके पर पहुंचे और उनकी नगर निगम अधिकारियों से बहस हुई। उन्होंने नगर निगम और पुलिस की कार्रवाई को गुंडागर्दी बताया। उन्होंने कहा कि निजी संपत्ति में इस तरह प्रवेश करना अवैध है। अभिषेक बनर्जी ने कहा कि अधिकारी बोर्ड हटाने की अनुमति देने वाला सही आदेश नहीं दिखा सके। उनके मुताबिक, अधिकारी उस शिकायत का ब्योरा भी पेश नहीं कर पाए, जिसके आधार पर नगर निगम कार्रवाई कर रहा था।
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सत्ता के दुरुपयोग का आरोप
अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ व्यवस्था प्रशासनिक शक्तियों का इस्तेमाल विपक्षी पार्टी के खिलाफ कर रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर तृणमूल कांग्रेस को खत्म नहीं कर सकते। उन्होंने आरोप लगाया कि सार्वजनिक गतिविधियों की अनुमति न देकर और पार्टी के बैंक खाते फ्रीज करके तृणमूल कांग्रेस का गला घोंटने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, विरोध के बावजूद नगर निगम अधिकारी आखिरकार छत तक पहुंचे और बोर्ड को हटा दिया।
यह भी पढ़ें: मराठी सीखने की मोहलत: ऑटो और टैक्सी चालकों को मिलेगा एक साल, फडणवीस सरकार ने क्यों लिया फैसला?
अभिषेक बनर्जी ने और क्या-क्या कहा?
अभिषेक ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस को जबरन खत्म करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी नेताओं, कार्यालयों और बिलबोर्डों को निशाना बनाया जा रहा है। अभिषेक ने कहा कि पार्टी का चुनाव चिह्न घास-फूल है और घास जितनी काटी जाएगी, उतनी ही बढ़ेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके कार्यालय का बिलबोर्ड चुनिंदा तरीके से निशाने पर लिया गया। नगर निगम और पुलिस ने सांसद व उनके सहयोगियों पर अधिकारियों को काम करने से रोकने का आरोप लगाया।
क्या हाईकोर्ट जाएंगे अभिषेक बनर्जी?
अभिषेक बनर्जी ने यह भी कहा कि कैमैक्स स्ट्रीट इलाके में दूसरे कार्यालयों और दुकानों के कई बिलबोर्ड लगे हैं, लेकिन कार्रवाई सिर्फ उनके पार्टी कार्यालय के बिलबोर्ड पर की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस कदम के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया जाएगा। साथ ही कहा कि भारतीय संविधान से ऊपर कोई नहीं है।
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रोकने की कोशिश में हुई झड़प
नगर निगम की टीम जब पुलिस के साथ कार्यालय पहुंची तो अभिषेक बनर्जी के निजी सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें परिसर में प्रवेश करने से रोकने की कोशिश की। इस दौरान तृणमूल समर्थकों और निजी सुरक्षाकर्मियों की पुलिस तथा नगर निगम अधिकारियों से झड़प हो गई। यह सब राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन की मौजूदगी में हुआ। तृणमूल का आरोप था कि नगर निगम अधिकारी बोर्ड हटाने की अनुमति देने वाला सही आदेश नहीं दिखा सके। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारी जबरन परिसर में घुसे।
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मामले से जुड़ी खास बातें
- कोलकाता पुलिस ने कार्रवाई के दौरान कुछ तृणमूल कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया।
- अभिषेक बनर्जी ने कार्रवाई को मनमाना और पार्टी को निशाना बनाने वाला बताया।
- उन्होंने पास की इमारतों पर लगे अन्य निजी बोर्डों पर कार्रवाई न होने पर सवाल उठाया।
- तृणमूल का आरोप है कि अधिकारी शिकायत का ब्योरा भी नहीं दिखा सके।
- विरोध के बावजूद नगर निगम अधिकारी छत पर पहुंचे और बोर्ड को हटा दिया।
अभिषेक ने कार्रवाई को बताया गुंडागर्दी
अभिषेक बनर्जी भी मौके पर पहुंचे और उनकी नगर निगम अधिकारियों से बहस हुई। उन्होंने नगर निगम और पुलिस की कार्रवाई को गुंडागर्दी बताया। उन्होंने कहा कि निजी संपत्ति में इस तरह प्रवेश करना अवैध है। अभिषेक बनर्जी ने कहा कि अधिकारी बोर्ड हटाने की अनुमति देने वाला सही आदेश नहीं दिखा सके। उनके मुताबिक, अधिकारी उस शिकायत का ब्योरा भी पेश नहीं कर पाए, जिसके आधार पर नगर निगम कार्रवाई कर रहा था।
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सत्ता के दुरुपयोग का आरोप
अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ व्यवस्था प्रशासनिक शक्तियों का इस्तेमाल विपक्षी पार्टी के खिलाफ कर रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर तृणमूल कांग्रेस को खत्म नहीं कर सकते। उन्होंने आरोप लगाया कि सार्वजनिक गतिविधियों की अनुमति न देकर और पार्टी के बैंक खाते फ्रीज करके तृणमूल कांग्रेस का गला घोंटने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, विरोध के बावजूद नगर निगम अधिकारी आखिरकार छत तक पहुंचे और बोर्ड को हटा दिया।
यह भी पढ़ें: मराठी सीखने की मोहलत: ऑटो और टैक्सी चालकों को मिलेगा एक साल, फडणवीस सरकार ने क्यों लिया फैसला?
अभिषेक बनर्जी ने और क्या-क्या कहा?
अभिषेक ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस को जबरन खत्म करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी नेताओं, कार्यालयों और बिलबोर्डों को निशाना बनाया जा रहा है। अभिषेक ने कहा कि पार्टी का चुनाव चिह्न घास-फूल है और घास जितनी काटी जाएगी, उतनी ही बढ़ेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके कार्यालय का बिलबोर्ड चुनिंदा तरीके से निशाने पर लिया गया। नगर निगम और पुलिस ने सांसद व उनके सहयोगियों पर अधिकारियों को काम करने से रोकने का आरोप लगाया।
क्या हाईकोर्ट जाएंगे अभिषेक बनर्जी?
अभिषेक बनर्जी ने यह भी कहा कि कैमैक्स स्ट्रीट इलाके में दूसरे कार्यालयों और दुकानों के कई बिलबोर्ड लगे हैं, लेकिन कार्रवाई सिर्फ उनके पार्टी कार्यालय के बिलबोर्ड पर की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस कदम के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया जाएगा। साथ ही कहा कि भारतीय संविधान से ऊपर कोई नहीं है।