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SC: कोयला वसूली घोटाले में पूर्व सीएम की उप-सचिव रहीं सौम्या की राहत बढ़ी; संभल मामले में 'सुप्रीम' सुनवाई कल

Thu, 28 Nov 2024 01:23 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Thu, 28 Nov 2024 01:23 PM IST
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supreme court news updates interim bail extend of ex-Chhattisgarh CM deputy secretary in coal levy scam
Supreme Court - फोटो : PTI
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उप सचिव सौम्या चौरसिया की अंतरिम जमानत बढ़ा दी। सौम्या चौरसिया कथित कोयला वसूली घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 25 सितंबर को इस मामले में सौम्या चौरसिया को अंतरिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि वह एक साल और नौ महीने से अधिक समय तक हिरासत में रह चुकी हैं और अभी तक उन पर आरोप भी तय नहीं हुए हैं। 
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गुरुवार को सौम्या चौरसिया की अंतरिम जमानत मामले पर कोर्ट ने फिर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान पीठ ने मामले की मौजूदा स्थिति के बारे में पूछा तो सौम्या चौरसिया के वकील सिद्धार्थ दवे ने कहा कि अभी तक मुकदमा शुरू भी नहीं हुआ है, जिसके बाद न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने अंतरिम जमानत अवधि बढ़ाने का आदेश दिया। अब सुप्रीम कोर्ट जनवरी के अंतिम सप्ताह में इस मामले पर फिर सुनवाई करेगा। 
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छत्तीसगढ़ कैडर की सिविल सेवक चौरसिया पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यालय में उप सचिव और विशेष कार्य अधिकारी (ओएसडी) थीं। बघेल सरकार में सौम्या चौरसिया काफी ताकतवर अधिकारी थीं और सचिवालय में उनका अच्छा खासा दबदबा था। ईडी की जांच में खुलासा हुआ था कि वरिष्ठ नौकरशाहों, व्यापारियों, राजनेताओं और बिचौलियों से जुड़े एक कार्टेल द्वारा छत्तीसगढ़ में परिवहन किए गए प्रत्येक टन कोयले पर 25 रुपये की अवैध वसूली की जा रही थी। यह घोटाला कुल 540 करोड़ रुपये की जबरन वसूली का बताया जा रहा है। इस मामले में आयकर विभाग ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज कराया था। इसी मामले में सौम्या चौरसिया को आरोपी बनाया गया है। 
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संभल मस्जिद सर्वेक्षण का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, शुक्रवार को सुनवाई
उच्चतम न्यायालय उत्तर प्रदेश के संभल में मुगलकालीन मस्जिद का सर्वेक्षण कराने संबंधी एक जिला अदालत के 19 नवंबर के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करेगा। उच्चतम न्यायालय की वेबसाइट पर 29 नवंबर की अपलोड की गई वाद सूची के अनुसार, प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ शाही जामा मस्जिद, संभल की प्रबंधन समिति द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करने वाली है। याचिका में सिविल जज द्वारा पारित 19 नवंबर के आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया है।

महिलाओं के लिए तैयार एकीकृत सहायता प्रणाली देश में लागू करने की याचिका न्यायोचित नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (नालसा) द्वारा महिलाओं के लिए तैयार की गई एकीकृत सहायता प्रणाली को पूरे देश में लागू करने की याचिका न्यायोचित नहीं है। यह प्रणाली हिंसा से पीड़िता महिलाओं के लिए न्याय तक आसान पहुंच प्रदान करती है। जस्टिस सूर्यकांत और उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने कहा कि इस मुद्दे पर प्रशासनिक स्तर पर नालसा विचार कर सकता है और यह कानूनी मामले के तहत नहीं आता। पीठ ने वरिष्ठ वकील कोलिन गोंसाल्विस से कहा, यह मामला न्यायोचित नहीं है। एक याचिका में महिलाओं के लिए नालसा की सहायता प्रणाली को देशभर में लागू करने की मांग की गई थी। 
 

कॉलेजियम ने सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में नियुक्ति के लिए जस्टिस मनमोहन के नाम की सिफारिश की
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने सुप्रीम कोर्ट के जज रूप में नियुक्ति के लिए दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मननोहन के नाम की सिफारिश सरकार से की है। शीर्ष कोर्ट के सूत्रों के मुताबिक, सीजेआई संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम के पांच सदस्यीय पैनल ने हाल ही में बैठक कर जस्टिस मनमोहन को सुप्रीम कोर्ट में जज बनाने के लिए सिफारिश की।

संभल हिंसा की सीबीआई जांच की मांग वाली जनहित याचिका दायर
उत्तर प्रदेश में हाल ही में संभल में हुई हिंसा की सीबीआई जांच की मांग करते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई है। आनंद प्रकाश तिवारी नाम के व्यक्ति द्वारा अधिवक्ता इमरान उल्लाह और विनीत विक्रम के जरिए दायर इस याचिका में जामा मस्जिद के निकट 24 नवंबर को हुई इस घटना में मुरादाबाद परिक्षेत्र के मंडलायुक्त, संभल के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक और अन्य अधिकारियों की भूमिका की जांच उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक विशेष जांच दल से कराए जाने की भी प्रार्थना की गई है।

याचिका में प्रशासनिक लापरवाही और इस हिंसा में स्थानीय अधिकारियों की भूमिका का आरोप लगाया गया है। साथ ही भविष्य में धार्मिक स्मारक या स्थल के सर्वेक्षण में सहयोग के लिए जिले के अधिकारियों की भूमिका और जिम्मेदारियों के संबंध में आवश्यक दिशा निर्देश बनाने की भी मांग की गई है। उल्लेखनीय है कि 24 नवंबर को एक अधिवक्ता आयुक्त की अगुवाई में टीम द्वारा मुगलकालीन जामा मस्जिद के सर्वेक्षण के बाद संभल में हिंसा भड़क गई थी। यह सर्वेक्षण एक स्थानीय अदालत के आदेश पर किया गया था।

पराली जालने वालों पर कार्रवाई में देरी कर रहीं पंजाब और हरियाणा की सरकारें: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने आज कहा कि पंजाब और हरियाणा सरकारें पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ कार्रवाई करने में काफी देरी कर रही हैं। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि इस समस्या का दीर्घकालिक समाधान निकालने के लिए एक मजबूत तंत्र विकसित करने की जरूरत है। जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए एक व्यवस्था बनाई जानी चाहिए कि चौबीस घंटे आंकड़े उपलब्ध रहे। पीठ ने कहा, हम सभी पक्षों को विस्तार से सुनने का प्रस्ताव रखते हैं। यह समस्या देरी से बीज बोने के कारण हो रही है। हम इस मुद्दे को जड़ तक जाना चाहते हैं और दिशा-निर्देश जारी करना चाहते हैं। हर साल यह समस्या नहीं उठनी चाहिए। उपलब्ध आंकड़ों से यह कहा जा सकता है कि दोनों राज्य किसानों के खिलाफ कार्रवाई में बहुत धीमे हैं। 
  

दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस मनमोहन को सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में पदोन्नत करने की सिफारिश
भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना के नेतृत्व वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस मनमोहन को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत करने की सिफारिश की है। एक बयान में कॉलेजियम ने कहा है कि जस्टिस मनमोहन दिल्ली हाईकोर्ट में सबसे वरिष्ठ होने के अलावा हाईकोर्ट के न्यायाधीशों की संयुक्त अखिल भारतीय वरिष्ठता में क्रम संख्या दो पर हैं। जस्टिस मनमोहन को चुनते समय कॉलेजियम ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली हाईकोर्ट का केवल एक ही प्रतिनिधित्व है। सीजेआई खन्ना दिल्ली हाईकोर्ट से थे। 28 नवंबर को हुई बैठक में सर्वसम्मति से जस्टिस मनमोहन का नाम चुना गया। कॉलेजियम में सीजेआई खन्ना के अलावा सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठतम जज शामिल थे।  

29 सितंबर से हैं मुख्य न्यायाधीश : 13 मार्च, 2008 को जस्टिस मनमोहन को दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था। 29 सितंबर, 2024 से वह हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्य कर रहे हैं। वह पूर्व केंद्रीय मंत्री और जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल रहे जगमोहन के बेटे हैं। 17 दिसंबर, 1962 को दिल्ली में जन्मे जस्टिस मनमोहन ने 1987 में कैंपस लॉ सेंटर, दिल्ली विश्वविद्यालय से एलएलबी पूरा किया और उसी वर्ष वकालत के पेशे से जुड़ गए।
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