फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme Court News and updates Beant Singh Case ED Sanjay Mishra mustard crop same-sex marriages

SC: बेअंत सिंह हत्या केस के दोषी बलवंत सिंह राजोआना की मौत की सजा बदलने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, कही ये बात

Wed, 03 May 2023 10:06 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Wed, 03 May 2023 10:06 PM IST
सार

राजोआना ने 26 साल की लंबी कैद के आधार पर अपनी मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने की मांग की थी।

विज्ञापन
Supreme Court News and updates Beant Singh Case ED Sanjay Mishra  mustard crop same-sex marriages
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के मुख्यमंत्री रहे बेअंत सिंह की 1995 में हुई हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए बलवंत सिंह राजोआना की मौत की सजा को बदलने से इनकार कर दिया। याचिका में मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदलने की मांग की गई थी। हालांकि, कोर्ट ने राजोआना की दया याचिका पर सक्षम प्राधिकारियों को जरूरत के हिसाब से फैसला लेने का निर्देश दिया। 
विज्ञापन


गौरतलब है कि राजोआना ने 26 साल की लंबी कैद के आधार पर अपनी मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने की मांग की थी। शीर्ष कोर्ट ने पिछले साल दो मई को केंद्र से राजोआना की ओर से दायर कम्युटेशन याचिका पर दो महीने के भीतर फैसला करने को कहा था। हालांकि, केंद्र की तरफ से फैसला न होने पर पिछले साल 28 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने मामले को अपने हाथ में ले लिया था। 
विज्ञापन

Supreme Court News and updates Beant Singh Case ED Sanjay Mishra  mustard crop same-sex marriages
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

सांसदों के खिलाफ मुकदमे में तेजी लाने के लिए विशेष अदालतों को निर्देशित करें 
सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामलों के त्वरित निस्तारण में सहायता के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी  ने बुधवार को शीर्ष अदालत से उनके खिलाफ लंबित मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए निर्देश जारी करने का आग्रह किया।साथ ही उच्च न्यायालयों से यह भी अनुरोध किया कि वे विशेष एमपी/एमएलए अदालतों की अध्यक्षता करने के लिए आवश्यक न्यायाधीशों की संख्या की समीक्षा करें।

वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया ने एक रिपोर्ट में कहा कि विशेष न्यायालयों को लंबित मामलों की सुनवाई में तेजी लाने का निर्देश दिया जा सकता है। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने के बाद ही उच्च न्यायालय विशेष अदालतों के पीठासीन अधिकारियों को स्थानांतरित कर सकते हैं।

SC ने अमरावती भूमि मामले में SIT जांच पर हाईकोर्ट की रोक को किया खारिज
 सुप्रीम कोर्ट से जगन मोहन रेड्डी सरकार को बड़ी राहत मिली है। शीर्ष कोर्ट ने बुधवार को अमरावती भूमि मामले में SIT जांच पर हाईकोर्ट की रोक को खारिज कर दिया। दरअसल,आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने पिछली टीडीपी सरकार के समय में हुए अमरावती में भूमि सौदों में कथित अनियमितताओं की एसआईटी जांच पर रोक लगा दी थी। 

26 सितंबर, 2019 के एक सरकारी आदेश के बाद रेड्डी सरकार ने तत्कालीन सरकार के सदस्यों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए एक कैबिनेट उप समिति नियुक्त की थी।  

चंद्रबाबू नायडू और पूर्व मंत्री पी नारायण को बनाया गया था आरोपी
इस कथित घोटाले में चंद्रबाबू नायडू और पूर्व मंत्री पी नारायण को ज्ञात/संदिग्ध/अज्ञात आरोपी बनाया गया था। यह मामला 2015 में राज्य के नए राजधानी शहर अमरावती के विकास के लिए जमीन को पूल किए जाने से संबंधित है। पूल किए जाने का अर्थ है कि भू मालिकों का एक समूह विकास के लिए सरकार को अपनी जमीन सौंपता है।

विज्ञापन

Supreme Court News and updates Beant Singh Case ED Sanjay Mishra  mustard crop same-sex marriages
सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : सोशल मीडिया

 SC ने बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को रद्द किया 
 सुप्रीम कोर्ट ने आईएलएफएस के पूर्व ऑडिटर फर्म बीएसआर एंड एसोसिएट्स और डेलॉयट हास्किंस एंड सेल्स की गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) जांच पर रोक लगाने वाला बॉम्बे हाईकोर्ट का आदेश खारिज कर दिया। एसएफआईओ और केंद्र सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। शीर्ष अदालत ने इसे स्वीकार करते हुए कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 140 (5) की वैधता को भी बरकरार रखा।

जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस एमएम सुंदरेश की पीठ ने कहा, यह प्रावधान ऑडिटरों को हटाने और इस्तीफे से संबंधित है। धोखाधड़ी से काम करने या किसी भी धोखाधड़ी में उकसाने या मिलीभगत साबित होने पर और एक ऑडिटिंग फर्म पर पांच साल का प्रतिबंध लगाता है। पीठ ने कहा, कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 140(5) की सांविधानिक वैधता को चुनौती विफल होती है। धारा 140(5) न तो भेदभावपूर्ण, मनमाना या अनुच्छेद 14, 19(1)(जी) का उल्लंघन है।

पीठ ने हाईकोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया जिसमें ऑडिट फर्मों के खिलाफ अधिनियम की धारा 140 (5) के तहत कार्यवाही को इस आधार पर रद्द कर दिया गया था कि ऑडिटरों ने इस्तीफा दिया था। पीठ ने कहा, अधिनियम, 2013 की धारा 140(5) के तहत आवेदन/कार्यवाही को संबंधित लेखापरीक्षकों के इस्तीफे के बाद भी विचारणीय माना जाता है। अब एनसीएलटी (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल) इसलिए कानून के अनुसार जांच करने के बाद इस तरह के आवेदन पर अंतिम आदेश पारित करता है। पीठ ने हालांकि स्पष्ट किया कि उसने लेखा परीक्षकों के खिलाफ आरोपों पर योग्यता पर कोई राय व्यक्त नहीं की है और अंततः एनसीएलटी को एसएफआईओ की याचिका पर अंतिम आदेश पारित करना होगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed