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सुप्रीम कोर्ट में बढ़ेगी जजों की संख्या: अब 38 न्यायाधीश करेंगे न्याय, लंबित मुकदमों में आएगी कमी
Sun, 17 May 2026 09:37 PM IST
राकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sun, 17 May 2026 09:37 PM IST
सार
सर्वोच्च अदालत में चार नए न्यायाधीशों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। अब सीजेआई सहित कुल 38 जजों की क्षमता के साथ शीर्ष अदालत लंबित मुकदमों का निपटारा अधिक तेजी और प्रभावशीलता से कर सकेगी।
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शीर्ष अदालत में बढ़ने वाली है जजों की संख्या
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
देश की सर्वोच्च अदालत में लंबित मुकदमों के बोझ को कम करने के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के लिए एक नया अध्यादेश जारी किया है। इस अध्यादेश के लागू होने के बाद सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या में चार पदों की बढ़ोतरी हो गई है। इस अध्यादेश को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंजूरी दे दी है।
स्वीकृत क्षमता में ऐतिहासिक विस्तार
इस नए फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की कुल स्वीकृत संख्या अब 34 से बढ़कर 38 हो गई है। इस कुल संख्या में भारत के मुख्य न्यायाधीश भी शामिल हैं। कानूनविदों का मानना है कि जजों की संख्या बढ़ने से अदालती कार्यवाही में तेजी आएगी। इसके साथ ही देश के नागरिकों को न्याय मिलने में होने वाली देरी को भी कम किया जा सकेगा।
यह भी पढ़ें: Supreme Court: सरकारी नियंत्रण वाले मंदिरों के पुजारियों को मिले न्यूनतम वेतन, याचिका पर कल 'सुप्रीम' सुनवाई
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लंबित मामलों के निपटारे में मिलेगी मदद
सुप्रीम कोर्ट में पिछले कुछ समय से मुकदमों की संख्या में लगातार इजाफा देखा जा रहा है। मामलों के त्वरित निपटारे के लिए लंबे समय से जजों की संख्या बढ़ाने की मांग की जा रही थी। इस अध्यादेश के माध्यम से सरकार ने न्याय व्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास किया है। जजों के चार नए पद जुड़ने से अब बड़ी संवैधानिक पीठों का गठन आसानी से हो सकेगा। इसके साथ ही नियमित मामलों की सुनवाई की गति भी तेज होगी।
नियुक्ति प्रक्रिया में आएगी तेजी
अध्यादेश जारी होने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम जल्द ही नए जजों के नामों की सिफारिश कर सकता है। स्वीकृत पदों की संख्या 38 होने से उच्च न्यायालयों के योग्य न्यायाधीशों और वरिष्ठ वकीलों को शीर्ष अदालत में सेवा देने का अवसर मिलेगा। कानून मंत्रालय इस पूरी प्रक्रिया को जल्द पूरा करने के लिए तैयार है।
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स्वीकृत क्षमता में ऐतिहासिक विस्तार
इस नए फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की कुल स्वीकृत संख्या अब 34 से बढ़कर 38 हो गई है। इस कुल संख्या में भारत के मुख्य न्यायाधीश भी शामिल हैं। कानूनविदों का मानना है कि जजों की संख्या बढ़ने से अदालती कार्यवाही में तेजी आएगी। इसके साथ ही देश के नागरिकों को न्याय मिलने में होने वाली देरी को भी कम किया जा सकेगा।
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लंबित मामलों के निपटारे में मिलेगी मदद
सुप्रीम कोर्ट में पिछले कुछ समय से मुकदमों की संख्या में लगातार इजाफा देखा जा रहा है। मामलों के त्वरित निपटारे के लिए लंबे समय से जजों की संख्या बढ़ाने की मांग की जा रही थी। इस अध्यादेश के माध्यम से सरकार ने न्याय व्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास किया है। जजों के चार नए पद जुड़ने से अब बड़ी संवैधानिक पीठों का गठन आसानी से हो सकेगा। इसके साथ ही नियमित मामलों की सुनवाई की गति भी तेज होगी।
नियुक्ति प्रक्रिया में आएगी तेजी
अध्यादेश जारी होने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम जल्द ही नए जजों के नामों की सिफारिश कर सकता है। स्वीकृत पदों की संख्या 38 होने से उच्च न्यायालयों के योग्य न्यायाधीशों और वरिष्ठ वकीलों को शीर्ष अदालत में सेवा देने का अवसर मिलेगा। कानून मंत्रालय इस पूरी प्रक्रिया को जल्द पूरा करने के लिए तैयार है।