फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   supreme court priests salary pil temple employees ashwini upadhyay government controlled temples hindi news

Supreme Court: सरकारी नियंत्रण वाले मंदिरों के पुजारियों को मिले न्यूनतम वेतन, याचिका पर कल 'सुप्रीम' सुनवाई

Sun, 17 May 2026 01:37 PM IST
अमन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमन तिवारी Updated Sun, 17 May 2026 01:37 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सरकारी नियंत्रण वाले मंदिरों के पुजारियों और कर्मचारियों के वेतन की समीक्षा के लिए न्यायिक आयोग बनाने की याचिका पर सुनवाई करेगा। याचिका में उन्हें कर्मचारी घोषित करने और सम्मानजनक वेतन देने की मांग की गई है।

विज्ञापन
supreme court priests salary pil temple employees ashwini upadhyay government controlled temples hindi news
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट सोमवार को एक महत्वपूर्ण याचिका पर सुनवाई करने वाला है। यह याचिका सरकारी नियंत्रण वाले मंदिरों के पुजारियों, सेवादारों और कर्मचारियों के वेतन और अन्य सुविधाओं की समीक्षा से जुड़ी है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच इस जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर सकती है। वकील अश्विनी उपाध्याय ने यह याचिका दायर की है।
विज्ञापन


याचिका में क्या?
याचिका में केंद्र और राज्य सरकारों को एक न्यायिक आयोग या विशेषज्ञ समिति बनाने का निर्देश देने की मांग की गई है। यह समिति पुजारियों और मंदिर कर्मचारियों को मिलने वाले पैसे और अन्य लाभों की जांच करेगी। याचिकाकर्ता चाहते हैं कि पुजारियों और मंदिर कर्मचारियों को 'वेतन संहिता, 2019' की धारा 2(के) के तहत 'कर्मचारी' माने जाएं।
विज्ञापन


विज्ञापन
विज्ञापन


याचिका में तर्क दिया गया है कि जब राज्य किसी मंदिर का प्रशासनिक और आर्थिक नियंत्रण अपने हाथ में ले लेता है, तो वहां मालिक और कर्मचारी का रिश्ता बन जाता है। ऐसे में पुजारियों को सम्मानजनक वेतन न देना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले जीवन जीने के अधिकार का उल्लंघन है। अश्विनी उपाध्याय ने बताया कि इस मामले की शुरुआत 4 अप्रैल को हुई। उस दिन वह वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में एक कार्यक्रम में शामिल होने गए थे। वहां पूजा करने के बाद उन्हें पता चला कि सरकारी नियंत्रण वाले इस मंदिर के पुजारियों और कर्मचारियों को सम्मानजनक जीवन जीने के लिए न्यूनतम वेतन भी नहीं मिलता है।


याचिका में आंध्र प्रदेश-तेलंगाना के कर्मचारियों भी जिक्र 
याचिका में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना का भी जिक्र किया गया है। वहां हाल ही में पुजारियों और कर्मचारियों ने न्यूनतम वेतन की मांग को लेकर बड़ा विरोध प्रदर्शन किया था। याचिका के अनुसार, इन लोगों को अकुशल या अर्ध-कुशल मजदूरों के लिए तय न्यूनतम वेतन भी नहीं मिल रहा है। इसे एक तरह का शोषण बताया गया है। राज्य एक आदर्श नियोक्ता के रूप में काम करने के बजाय न्यूनतम मजदूरी अधिनियम और नीति निर्देशक सिद्धांतों (अनुच्छेद 43) का उल्लंघन कर रहा है।

ये भी पढ़ें: Bengal: हावड़ा स्टेशन के बाहर चला बुलडोजर, अतिक्रमण हटाने के लिए टूटीं दुकानें; कार्रवाई से भड़के दुकानदार

याचिका में सात फरवरी 2025 की एक घटना का भी उल्लेख है। उस दिन मदुरै के 'दंडायुथपाणि स्वामी मंदिर' में एक सर्कुलर जारी कर पुजारियों को 'आरती की थाली' में 'दक्षिणा' लेने से मना कर दिया गया था। हालांकि विरोध के बाद इसे वापस ले लिया गया, लेकिन इससे पुजारियों के सामने भुखमरी का खतरा पैदा हो गया था क्योंकि उन्हें सरकार से कोई औपचारिक वेतन नहीं मिलता है। याचिका में यह भी दावा किया गया है कि राज्य लाखों मंदिरों को नियंत्रित कर रहे हैं, लेकिन एक भी मस्जिद या चर्च उनके नियंत्रण में नहीं है। अंत में, इलाहाबाद हाईकोर्ट के पुराने फैसलों के आधार पर पुजारियों के कल्याण के लिए कदम उठाने की मांग की गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed