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2020 दिल्ली दंगे: सुनवाई टालने की मांग पर पुलिस से सुप्रीम कोर्ट नाराज, कहा- वैकल्पिक व्यवस्था की जरूरत
Tue, 31 Jan 2023 07:36 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Tue, 31 Jan 2023 07:36 PM IST
सार
शीर्ष अदालत दिल्ली उच्च न्यायालय के 15 जून, 2021 के फैसले को चुनौती देने वाली पुलिस की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इसमें नताशा नरवाल, देवांगना कलिता और आसिफ इकबाल तनहा को नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान सांप्रदायिक हिंसा से संबंधित मामले में जमानत दी गई थी।
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सुप्रीम कोर्ट।
- फोटो : ANI
विस्तार
साल 2020 में उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के मामले में तीन छात्र कार्यकर्ताओं को जमानत के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई स्थगित करने की दिल्ली पुलिस की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कड़ी नाराजगी जताई। दरअसल, दिल्ली पुलिस का प्रतिनिधित्व करने वाले सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता दूसरे न्यायालय में व्यस्त थे। न्यायमूर्ति एस के कौल और न्यायमूर्ति ए एस ओका की पीठ ने कहा कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता कई मामलों में व्यस्त हो सकते हैं, लेकिन कुछ वैकल्पिक व्यवस्था करनी होगी ताकि मामले की सुनवाई हो सके।
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फिलहाल पीठ ने इस मामले की सुनवाई 21 फरवरी के लिए सूचीबद्ध की है। इस दौरान पीठ ने कहा कि अगर कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जाती है तो हम मानेंगे कि सरकार के पास इस मामले में कहने के लिए कुछ नहीं है। दरअसल, जब 17 जनवरी को शीर्ष अदालत के समक्ष इस मामले में सुनवाई के लिए दलील आईं थी तो पुलिस ने यह कहते हुए मोहलत मांगी थी कि मेहता अन्य मामले में संविधान पीठ के समक्ष थे। तब पीठ ने मामले को सुनवाई के लिए मंगलवार को पोस्ट किया था। साथ ही यह भी कहा था कि अगर सरकार सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की वैकल्पिक व्यवस्था करना चाहती है तो सुनवाई की अगली तारीख के लिए ऐसा कर सकती है।
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इसके बाद जब आज यानी मंगलवार को मामले को लेकर पहली बार सुनवाई शुरू हुई को तो सॉलिसिटर जनरल के अदालत में मौजूद नहीं थे, जिस कारण उस समय इस पर सुनवाई नहीं हो सकी। बाद में, जब मामले को फिर से उठाया गया, तो पुलिस की ओर से पेश अधिवक्ता रजत नायर ने पीठ से मामले की सुनवाई अगले सप्ताह के लिए स्थगित करने का अनुरोध करते हुए कहा कि सॉलिसिटर जनरल अदालत में मौजूद थे, लेकिन उन्हें संविधान पीठ के समक्ष एक अन्य मामले की सुनवाई के लिए जाना पड़ गया।
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इस पर पीठ ने अपने अंतिम आदेश का हवाला देते हुए कहा कि अगर कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जाती है तो हम मानेंगे कि सरकार के पास इस मामले में कहने के लिए कुछ नहीं है। 17 जनवरी को मामले की सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा था, "हम अनावश्यक रूप से लोगों को सलाखों के पीछे रखने में विश्वास नहीं करते हैं।
शीर्ष अदालत दिल्ली उच्च न्यायालय के 15 जून, 2021 के फैसले को चुनौती देने वाली पुलिस की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।इसमें नताशा नरवाल, देवांगना कलिता और आसिफ इकबाल तनहा को नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान सांप्रदायिक हिंसा से संबंधित मामले में जमानत दी गई थी।
दरअसल, नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किए गए छात्र कार्यकर्ताओं नताशा नरवाल, देवांगना कलिता और आसिफ इकबाल तन्हा को दिल्ली हाईकोर्ट ने सांप्रदायिक हिंसा से संबंधित मामले में जमानत दे दी थी। दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट द्वारा 15 जून, 2021 को दिए गए फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।