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CJI महाभियोग मामला: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले पीछे हटी कांग्रेस, सिब्बल ने वापस ली याचिका

Tue, 08 May 2018 03:28 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 08 May 2018 03:28 PM IST
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Supreme Court dismissed the petitions of two Rajya Sabha Congress members against CJI
कपिल सिब्बल

कांग्रेस ने मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग का नोटिस खारिज करने के उप-राष्ट्रपति के फैसले के खिलाफ दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट से वापस ले लिया है। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस लगातार सीजेआई दीपक मिश्रा पर महाभियोग चलाने की मांग कर रही है। जिसे उप-राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू खारिज कर चुके हैं। कांग्रेस के दो राज्यसभा सांसदों प्रताप सिंह बाजवा और अमी हर्षाद्रय याग्निक ने 5 जजों की संवैधानिक पीठ के सामने याचिका दायर की थी।

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कांग्रेस की तरफ से पक्ष रख रहे वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने वेंकैया नायडू के फैसले के खिलाफ दायर याचिका को वापस ले लिया है। इस याचिका को कांग्रेस के पंजाब और गुजरात के राज्ससभा सांसदों ने कोर्ट में दायर किया था। इस याचिका पर कोर्ट की संवैधानिक पीठ जस्टिस एके सीकरी, एसए बोबडे, एनवी रमाना, अरुण मिश्रा और आदर्श गिरी को सुनवाई करनी थी। मगर सुनवाई से पहले ही कांग्रेस ने याचिका को वापस ले लिया जिसके बाद यह खारिज हो गई है। 
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वकील अश्विनी उपाध्याय और आरपी लूथरा ने कांग्रेस सांसदों के पक्ष में सिब्बल की मौजूदगी विरोध किया था। उनका कहना था कि भारतीय बार काउंसिल उन राजनेता वकीलों को उसी केस की सुनवाई करने से प्रतिबंधित करता है जिन्होंने महाभियोग वाले नोटिस पर हस्ताक्षर किए हों। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यह सिब्बल पर निर्भर करता है कि वह मामले पर बहस करना चाहते हैं या नहीं। जस्टिस सीकरी द्वारा जिस पीठ का प्रतिनिधित्व किया जा रहा था उसमें कोई भी वरिष्ठ वकील शामिल नहीं था। यहां तक कि 12 जनवरी को जस्टिस मिश्रा पर महत्वपूर्ण केसों को जूनियर जजों वाली चुनिंदा बेंचों को देने का आरोप लगाने वाले जस्टिस चलमेश्वर, रंजन गोगोई, मदन बी लोकुर और कुरियन जोफेस भी मौजूद नहीं थे।
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जस्टिस सीकरी ने इस पर सिब्बल से कहा कि वह मेरिट के आधार पर दलीलें दें। जिसपर अड़ते हुए सिब्बल ने कहा कि हम मेरिट पर दलील पेश नही करेंगे, हमें प्रशासनिक आदेश की कॉपी चाहिए। हम आदेश को चुनौती  देना चाहते हैं। सिब्बल ने सवाल पूछते हुए कहा कि क्या संविधान में चीफ जस्टिस का प्रशासनिक आदेश ही अकेला ऐसा आदेश है जिसे चुनौती नहीं दी जा सकती? कॉपी न मिलने पर सिब्बल ने कहा कि वह याचिका वापस ले रहे हैं। जिसकी बेंच ने उन्हें इजाजत दे दी।

याचिका वापस लेने के बाद कपिल सिब्बल ने कहा है कि हमने कल सुप्रीम कोर्ट में महाभियोग प्रस्ताव को खारिज करने के उप-राष्ट्रपति के फैसले को चुनौति दी थी। इस मामले पर आज सुनवाई होनी थी। लेकिन हमें कल शाम को बताया गया कि हमारी याचिका की सुनवाई 5 जजों की बेंच करेगी। आखिर किसने बेंच बनाने के यह आदेश दिए?

 

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