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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: 'अनुभवी अधिकारी के नेतृत्व में हो जांच', सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी पर क्या कहा?
Mon, 20 Jul 2026 03:50 PM IST
राहुल कुमार
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Mon, 20 Jul 2026 03:50 PM IST
सार
Supreme Court: अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में मिले दान में कथित गड़बड़ी के आरोपों की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से एसआईटी के पुनर्गठन पर निर्देश लेने को कहा है। अदालत ने साफ किया कि जांच अनुभवी वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी की निगरानी में होनी चाहिए। किसी भी तरह का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। आइए, विस्तार से जानते हैं मामले की सुनवाई के दौरान क्या-क्या हुआ...
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सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी पर क्या कहा?
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं से मिले दान में कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। मामले में अदालत ने साफ संकेत दिया है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और पेशेवर तरीके से होनी चाहिए। इसी को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से विशेष जांच टीम (एसआईटी) के पुनर्गठन पर आवश्यक निर्देश लेने को कहा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस पूरे मामले को राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए और जांच अपने तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचनी चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ अयोध्या राम मंदिर में मिले दान के कथित गबन की सीबीआई जांच की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। अदालत ने इससे पहले उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी से जांच की स्थिति रिपोर्ट मांगी थी। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि आदेश के अनुपालन में स्थिति रिपोर्ट दाखिल कर दी गई है। जांच जारी है और अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। हालांकि उन्होंने कहा कि जांच के इस चरण में अधिक जानकारी सार्वजनिक करना उचित नहीं होगा।
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मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ अयोध्या राम मंदिर में मिले दान के कथित गबन की सीबीआई जांच की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। अदालत ने इससे पहले उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी से जांच की स्थिति रिपोर्ट मांगी थी। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि आदेश के अनुपालन में स्थिति रिपोर्ट दाखिल कर दी गई है। जांच जारी है और अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। हालांकि उन्होंने कहा कि जांच के इस चरण में अधिक जानकारी सार्वजनिक करना उचित नहीं होगा।
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क्या सुप्रीम कोर्ट नई एसआईटी बनाने के पक्ष में?
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने सबसे पहले यह जानना चाहा कि क्या मौजूदा समय में एसआईटी जांच कर रही है। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि फिलहाल राज्य पुलिस जांच कर रही है और अलग से कोई एसआईटी सक्रिय नहीं है। इसके बाद अदालत ने एसआईटी की संरचना और जांच अधिकारियों के बारे में सवाल किए। मुख्य न्यायाधीश ने कहा उत्तर प्रदेश सरकार को एसआईटी के पुनर्गठन के संबंध में आवश्यक निर्देश ले। अदालत चाहती है कि जांच का नेतृत्व ऐसे वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के हाथों में हो, जिन्हें इस तरह के मामलों की जांच का पर्याप्त अनुभव हो। अदालत ने आगे कहा कि सरकार इस संबंध में निर्देश लेकर अगली सुनवाई में अपनी स्थिति स्पष्ट करे, ताकि जांच निष्पक्ष और प्रभावी तरीके से आगे बढ़ सके।
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