कोरोना के मामलों में अचानक बढ़ोतरी सामुदायिक संक्रमण का पहला चरण, सभी होंगे देर-सबेर बीमार!
- सर्वोच्च दर, फ्लैट कर्व आना टेस्टिंग क्षमता बढ़ाने पर निर्भर
- 24 घंटे में हुए 1,15,364 टेस्ट, अब तक कुल टेस्ट 28 लाख 34 हजार 798
- दिल्ली के कुल 12910 केसों में मात्र 6412 सक्रिय,
- केवल 184 को पड़ी आईसीयू की जरूरत, 27 वेंटीलेटर पर
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विस्तार
भारत की सफलता इसी बात में है कि संक्रमण फैलने की दर अपेक्षाकृत धीमी रहे, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था का ढांचा इसका बोझ उठाने की स्थिति में रहे और हर बीमार को अस्पताल में इलाज मिल सके।
हालांकि, अभी केंद्र या किसी राज्य सरकार ने देश में सामुदायिक संक्रमण होने की बात से सहमति नहीं जताई है।
प्राइमस हॉस्पिटल के मेडिसिन विभाग के हेड डॉक्टर अनुराग सक्सेना ने अमर उजाला डॉट कॉम को बताया कि देश में जिस तरह कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है, यह सामुदायिक संक्रमण का पहला चरण माना जा सकता है।
संक्रमण फैलने की दर कितनी तेज है, यह कोविड मरीजों की केस हिस्ट्री की विवेचन करने के बाद ही तय किया जा सकता है। यह काम सरकार के स्तर पर ही किया जा सकता है।
लेकिन जिस तरह ऐसे मामलों की संख्या बढ़ रही है, जिनमें कोरोना होने के ठीक-ठीक कारण का पता नहीं चल रहा है, यह सामुदायिक संक्रमण का लक्षण माना जा सकता है।
तैयार रहें कि सबको कोरोना होगा
डॉ. अनुराग सक्सेना के मुताबिक हमें इस बात के लिए तैयार रहना चाहिए कि हम सबको देर-सबेर कोरोना अवश्य होगा। इससे हमारे अंदर हर्ड इम्यूनिटी का विकास होगा, जो भविष्य में लोगों को कोरोना के संक्रमण से बचाएगा। लेकिन इसके फैलने की दर धीमी रहे और हर बीमार को अस्पताल में उपचार की सुविधा मिल सके, हमारे लिए यही बड़ी सफलता होगी।
अगर लॉकडाउन जारी भी रखा जाता है तो भी कोरोना के मामलों में वृद्धि अवश्य होगी। तब यह गति अपेक्षाकृत धीमी रहेगी। लेकिन इसके अन्य नुकसान अर्थव्यवस्था पर देखने को मिल रहे थे, जिससे बचना उतना ही आवश्यक है जितना कि कोरोना के संक्रमण से बचना।
ऐसे में सरकार का धीरे-धीरे बाजार-परिवहन को खोलने का फैसला बिल्कुल सही कहा जा सकता है। लॉकडाउन का जो लाभ देश को मिलना था, वह लिया जा चुका है। आज देश पीपीई किट्स, वेंटीलेटर और एन-95 मास्क पर्याप्त संख्या में बना रहा है, जबकि कोरोना संक्रमण की शुरुआत में इसकी संख्या शून्य थी।
कोरोना का फ्लैट कर्व कब तक?
जहां तक कोरोना के सर्वोच्च स्तर की बात है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि एक बार में कोरोना के अधिकतम कितने मामले सामने आते हैं। यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि कोरोना की टेस्टिंग किस स्तर पर की जाती है।
आज देश में 6,000 से कुछ अधिक केस रोज सामने आ रहे हैं। अगर टेस्टिंग क्षमता बढ़ा दी जाएगी तो आज ही और ज्यादा केस सामने आने लगेंगे। इस तरह सर्वोच्च दर टेस्टिंग क्षमता और उसके परिणाम पर निर्भर करती है।
लेकिन यह दर जितने नीचे रोकने पर हम सफल हो सकें, देश के लिए उतना ही बेहतर रहेगा क्योंकि अगर एक बार में करोड़ों की संख्या में लोगों को कोरोना होने लगेगा, तो कोई भी देश सबका इलाज नहीं कर सकता जैसा कि अमेरिका, इटली, स्पेन जैसे देशों में देखने को मिला।
इसलिए संक्रमण की दर को निचले स्तर पर रोक लेना ही भारत की सफलता होगी। यह जिम्मेदारी सरकार की नहीं, जनता की है कि वह सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क पहनने के नियम को माने और कोरोना संक्रमण से बची रहे।
ग्रमीण भारत पर भी पड़ेगा असर
कैलाश अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर सुधीर गुप्ता ने बताया कि लाखों की संख्या में श्रमिकों के गांवों तक पहुंचने से वहां भी कोरोना के मामलों में तेज वृद्धि हो सकती है। केरल, आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों के जिन ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य का ढांचा मजबूत है, वहां तो इससे निबटने में आसानी रहेगी।
लेकिन यूपी, बिहार जैसे जिन राज्यों में स्वास्थ्य ढांचा कमजोर है, वहां इससे निबटने में मुश्किल आ सकती है।
प्रतिशत में मामले सही स्तर पर बढ़ रहे
डॉक्टर सुधीर गुप्ता के मुताबिक कोरोना के मामले बढ़ अवश्य रहे हैं, लेकिन इसकी दर अभी भी पांच-छह फीसदी के आसपास ही है। इस तरह कहा जा सकता है कि प्रतिशत के लिहाज से कोरोना की वृद्धि दर अभी भी सामान्य है।
यह चिंताजनक नहीं है क्योंकि हम इस दर पर बेहतर इलाज सुविधा देने में सक्षम हैं। लेकिन यह दर ज्यादा न बढ़ने पाए, हमारी यह कोशिश होनी चाहिए।
स्थिति से कैसे निबटेगी सरकार
शनिवार तक दिल्ली में कोरोना के कुल मामलों की संख्या 12910 हो चुकी है। इसमें सक्रिय केसों की संख्या केवल 6412 है। इनमें आईसीयू में केवल 184 मरीज भर्ती हैं और वेंटीलेटर पर केवल 27 लोगों को ही रखने की जरुरत पड़ी है।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस प्रकार गंभीर रोगियों की संख्या बहुत कम है, इसलिए कोरोना के कुल मामलों के बढ़ने पर भी उन सबका इलाज करना संभव होगा। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इसी दम पर यह बात कही है कि अगर दिल्ली में 50 हजार केस भी सामने आ जाएंगे, तो वे सबका इलाज करने में सक्षम होंगे।