असम: आईआईटी- गुवाहाटी का कमाल, कम ऊर्जा में लंबे डेटा का विश्लेषण करेगा नया एआई मॉडल
आईआईटी गुवाहाटी के शोधकर्ताओं ने कम ऊर्जा में लंबे समय तक आने वाले डेटा का विश्लेषण करने वाला नया एआई मॉडल विकसित किया है। इसका इस्तेमाल स्वास्थ्य उपकरणों, सेंसर, स्मार्ट कारखानों, पर्यावरण निगरानी और पूर्वानुमान में हो सकता है।
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आईआईटी गुवाहाटी के शोधकर्ताओं ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का ऐसा नया मॉडल विकसित किया है, जो लंबे समय तक लगातार आने वाले डेटा का कम ऊर्जा खर्च करके विश्लेषण कर सकता है। इसे खास तौर पर उन उपकरणों के लिए उपयोगी माना जा रहा है, जहां बिजली या बैटरी की क्षमता सीमित होती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह तकनीक ऐसे उपकरणों में सीधे एआई के इस्तेमाल का रास्ता आसान कर सकती है, जिनके लिए हर बार दूर स्थित सर्वर पर निर्भर रहना जरूरी नहीं होगा।
यह शोध आईआईटी गुवाहाटी के मेहता फैमिली स्कूल ऑफ डाटा साइंस एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सस्टेनएआई प्रयोगशाला के शोधकर्ताओं ने किया है। मॉडल को ‘स्पाइकिंग हेटेरोजीनियस हार्मोनिक रेजोनेट-एंड-फायर स्टेट स्पेस मॉडल’ नाम दिया गया है। इसे दक्षिण कोरिया के सियोल में आयोजित अंतरराष्ट्रीय मशीन लर्निंग सम्मेलन-2026 में प्रस्तुत किया गया।
हर सूचना पर नहीं करता पूरी गणना
आम एआई मॉडल लगातार मिलने वाले डेटा को संसाधित करते हैं। डेटा जितना लंबा होता जाता है, उतनी ही अधिक कंप्यूटिंग क्षमता और ऊर्जा की जरूरत पड़ सकती है। नए मॉडल में मानव मस्तिष्क से प्रेरित ‘स्पाइकिंग न्यूरल नेटवर्क’ तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसमें कृत्रिम तंत्रिका कोशिकाएं हर समय सक्रिय रहने के बजाय महत्वपूर्ण बदलाव या घटना होने पर ही सक्रिय होती हैं। इससे अनावश्यक गणना कम होती है और ऊर्जा की बचत होती है।
मॉडल में अलग-अलग गुण वाली कृत्रिम तंत्रिका कोशिकाएं भी रखी गई हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, इससे यह वास्तविक दुनिया के डेटा में मौजूद जटिल और लंबे समय तक चलने वाले बदलावों को बेहतर तरीके से समझ सकता है।
17 मानक आंकड़ा समूहों पर हुआ परीक्षण
शोधकर्ताओं ने मॉडल को 17 मानक आंकड़ा समूहों पर परखा। इनमें लंबे समय के डेटा का वर्गीकरण, अनुमान, मानव गतिविधियों की पहचान और भविष्य के रुझानों का पूर्वानुमान जैसे परीक्षण शामिल थे। शोध के अनुसार, मॉडल ने कई आधुनिक एआई प्रणालियों के बराबर प्रदर्शन किया और अनुमानित ऊर्जा खपत काफी कम रही।
आईआईटी गुवाहाटी के सहायक प्रोफेसर डॉ. आयन बोर्थाकुर ने कहा कि स्वास्थ्य उपकरणों, पर्यावरण सेंसर, औद्योगिक निगरानी तथा मौसम और यातायात के पूर्वानुमान में लगातार बड़ी मात्रा में डेटा आता है। ऐसे में कम ऊर्जा में उसका विश्लेषण करने वाली तकनीक महत्वपूर्ण है।
स्वास्थ्य से लेकर उद्योग तक इस्तेमाल
शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस मॉडल का इस्तेमाल पहनने योग्य स्वास्थ्य निगरानी उपकरणों, इंटरनेट से जुड़े सेंसर, स्मार्ट कारखानों, पर्यावरण निगरानी, स्वचालित प्रणालियों और लंबे समय के पूर्वानुमान में किया जा सकता है। शोध टीम अब वास्तविक परिस्थितियों में इसके परीक्षण और इसकी दक्षता बढ़ाने पर काम करेगी।
क्यों खास है यह मॉडल?
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कम ऊर्जा में लंबे डेटा का विश्लेषण
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बैटरी से चलने वाले उपकरणों के लिए उपयोगी
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महत्वपूर्ण बदलाव होने पर ही सक्रिय होने की क्षमता
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17 मानक आंकड़ा समूहों पर परीक्षण
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स्वास्थ्य, उद्योग, पर्यावरण और स्वचालित प्रणालियों में उपयोग की संभावना
असम के स्कूलों में एआई और तकनीक की पढ़ाई, छह संस्थाओं से समझौते
असम सरकार ने स्कूल शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), तकनीक और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए छह संस्थाओं के साथ समझौता किया है। समग्र शिक्षा, असम की इस पहल का उद्देश्य छात्रों की पढ़ाई का स्तर सुधारने के साथ शिक्षकों को आधुनिक डिजिटल कौशल से लैस करना है।
समझौते के तहत गूगल एआई शिक्षकों को एआई आधारित शैक्षणिक उपकरण और प्रशिक्षण देगा। आईआईटी मद्रास-बोधन एआई मई 2027 तक कक्षा छह से 12वीं तक पढ़ाने वाले करीब एक लाख शिक्षकों को एआई का प्रशिक्षण देने की योजना पर काम करेगा।
वाधवानी एआई छात्रों की पढ़ने की क्षमता का तकनीक के जरिये आकलन करेगा, जिससे बुनियादी साक्षरता मजबूत की जा सके। एजुकेट गर्ल्स स्कूल से बाहर रहने वाले किशोरों, खासकर लड़कियों की पहचान, नामांकन और पढ़ाई जारी रखने में मदद करेगा।
एकस्टेप-एएक्सएल बुनियादी पढ़ाई और गणित के लिए व्यक्तिगत सीखने की सुविधा विकसित करेगा। वहीं, कैनवा एजुकेशन शिक्षकों और छात्रों में डिजिटल साक्षरता, रचनात्मकता और नवाचार की क्षमता बढ़ाने पर काम करेगा। शिक्षा मंत्री रनोज पेगू ने कहा कि इन साझेदारियों से असम में शिक्षा व्यवस्था को अधिक समावेशी और तकनीक आधारित बनाने में मदद मिलेगी।