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West Bengal: शुभेंदु ने मतगणना में संविदा कर्मियों की तैनाती पर उठाए सवाल, चुनाव आयोग से हस्तक्षेप की मांग

Sat, 02 May 2026 11:42 AM IST
Riya Dubey एएनआई, कोलकाता
एएनआई, कोलकाता Published by: Riya Dubey Updated Sat, 02 May 2026 11:42 AM IST
सार

पश्चिम बंगाल में पिंगला और दासपुर विधानसभा क्षेत्रों की मतगणना से पहले विवाद खड़ा हो गया है। नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया है कि संविदा और अस्थायी कर्मचारियों की तैनाती से चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है।

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Subhendu raises questions on deployment of contract workers in counting of votes, demands intervention from EC
भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

पश्चिम बंगाल में 4 मई को होने वाली मतगणना से ठीक पहले सियासी माहौल गरमा गया है। पिंगला और दासपुर विधानसभा क्षेत्रों में मतगणना ड्यूटी के लिए संविदा और अस्थायी कर्मचारियों की तैनाती को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर खतरा बताते हुए चुनाव आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

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ये कर्मचारी स्थायी सरकारी ढांचे का हिस्सा नहीं होते

अधिकारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि मतगणना जैसे अत्यंत संवेदनशील कार्य में जीविका सेवक, सहायक और संविदा डाटा एंट्री ऑपरेटर (DEO) जैसे कर्मियों को तैनात करना चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि ये कर्मचारी स्थायी सरकारी ढांचे का हिस्सा नहीं होते और उन पर राजनीतिक दबाव पड़ने की आशंका अधिक रहती है, जिससे चुनाव परिणामों की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।

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उन्होंने विशेष रूप से पिंगला और दासपुर विधानसभा क्षेत्रों के जारी आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि कई संविदा कर्मियों को मतगणना और संकलन टीमों में शामिल किया गया है। अधिकारी के मुताबिक, इन कर्मियों को ईवीएम की आवाजाही, वीवीपैट की सीलिंग और पोस्टल बैलेट की गणना जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में लगाया गया है, जो अत्यधिक संवेदनशील जिम्मेदारियां हैं।

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चुनाव आयोग से की क्या अपील?

भाजपा नेता ने चुनाव आयोग से अपील करते हुए कहा कि मतगणना प्रक्रिया में केवल नियमित और स्थायी सरकारी कर्मचारियों की ही नियुक्ति की जाए, ताकि पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता बनी रहे। उन्होंने पश्चिम मिदनापुर जिले में मतगणना से जुड़े सभी कर्मियों का ऑडिट कराने और किसी भी पैरा-स्टाफ या संविदा कर्मचारियों को हटाने की मांग भी की। अधिकारी ने इसे लोकतंत्र के संविदाकरण की संज्ञा देते हुए आरोप लगाया कि यह सत्तारूढ़ दल द्वारा अंतिम जनादेश को प्रभावित करने की कोशिश हो सकती है।

टीएमसी का रुख 

वहीं, सत्तारूढ़ टीएमसी ने भी इस मुद्दे पर पहले अलग रुख अपनाते हुए मतगणना में केंद्रीय सरकारी और सार्वजनिक उपक्रमों (PSU) के कर्मचारियों की तैनाती का विरोध किया था। इससे स्पष्ट है कि दोनों प्रमुख दल मतगणना प्रक्रिया को लेकर एक-दूसरे पर अविश्वास जता रहे हैं, जिससे राजनीतिक तनाव और बढ़ गया है।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

इस बीच, मामले ने न्यायिक मोड़ भी ले लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस की याचिका पर सुनवाई के लिए विशेष पीठ का गठन किया है। यह याचिका कलकत्ता उच्च न्यायालय के उस फैसले के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें मतगणना में बाहरी कर्मचारियों की तैनाती को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी गई थी। न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने कोई भी नया आदेश पारित करने से साफ इनकार कर दिया है।
 

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