विजय माल्या आर्थिक भगोड़ा घोषित, सरकार जब्त कर सकेगी संपत्ति
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मुंबई की एक विशेष अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय की याचिका पर फरार शराब कारोबारी विजय माल्या को शनिवार को भगोड़ा आर्थिक अपराधी (एफईओ) घोषित किया। माल्या नए भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम के प्रावधानों के तहत एफईओ घोषित होने वाला पहला कारोबारी बन गया है। यह अधिनियम पिछले वर्ष अगस्त में प्रभावी हुआ था।
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प्रवर्तन निदेशालय ने धनशोधन रोकथाम कानून (पीएमएलए) की अदालत से माल्या को भगोड़ा घोषित करने और उसकी संपत्तियों को जब्त करने और उन्हें केन्द्र सरकार के नियंत्रण में लाने का अनुरोध किया था। विशेष न्यायाधीश एम एस आजमी ने माल्या के वकील और ईडी के वकील की व्यापक दलील सुनने के बाद माल्या को कानून की धारा 12 के तहत एफईओ घोषित किया। अब भारत में उसकी संपत्ति जब्त की जा सकेगी।
Special PMLA court declares Vijay Mallya a fugitive economic offender. His properties can now be confiscated by the government. pic.twitter.com/KHhzCaR50e
— ANI (@ANI) January 5, 2019
माल्या की संपत्ति जब्त करने पर अदालत में सुनवाई 5 फरवरी को होगी।
The hearing in Special PMLA court on the confiscation of the properties of Vijay Mallya will be held on 5th February. Special PMLA court has declared Vijay Mallya a fugitive economic offender. (file pic) pic.twitter.com/xOfkRDTYt5
— ANI (@ANI) January 5, 2019
इससे पहले बीते साल 26 दिसंबर को कोर्ट ने फैसला 5 जनवरी तक के लिए सुरक्षित कर दिया था। वहीं माल्या ने अदालत को बताया था कि वह आर्थिक भगोड़ा नहीं है। साथ ही उसने कहा था कि वह मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध में भी शामिल नहीं है।
विशेष अदालत में चला मामला
ईडी ने अदालत में दी याचिका में माल्या को भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम 2018 के तहत ‘भगोड़ा’ घोषित किए जाने का अनुरोध किया था। अर्जी मंजूर हो जाने पर एजेंसी को माल्या की संपत्तियां जब्त करने का अधिकार मिल गया है। वहीं माल्या की ओर से उसके वकील अमित देसाई ने याचिका खारिज करने की मांग की थी।माल्या के वकील देसाई ने उस दावे का विरोध किया था, जिसमें माल्या को लेकर कहा गया है कि वह मार्च 2016 में एक सम्मेलन के बहाने सामान से भरे 300 बैग लेकर जेनेवा चला गया था। हकीकत में वह देश से भागा था।